जोधपुर की प्रसिद्ध कथावाचक और साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में अभी सस्पेस बना हुआ है. 28 जनवरी को हुई साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो मौत के कारणों को लेकर तस्वीर साफ हो पाई है और न ही जांच एजेंसियां किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंच सकी हैं. इसी बीच बाड़मेर जिले के परेऊ गांव स्थित शिव शक्ति धाम में साध्वी प्रेम बाईसा की समाधि का विधिवत पूजन किया गया. इस दौरान साधु-संतों, महात्माओं और बड़ी संख्या में अनुयायियों की मौजूदगी ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया.
समाधि पूजन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से संत-महात्मा परेऊ गांव पहुंचे. पगड़ी रस्म के साथ संतों का जुलूस समाधि स्थल तक पहुंचा, जहां वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच साध्वी प्रेम बाईसा को पुष्पांजलि अर्पित की गई. श्रद्धांजलि सभा में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं और एक ही सवाल सभी के मन में था आखिर साध्वी प्रेम बाईसा की मौत हुई या यह किसी गहरी साजिश का नतीजा थी?
सनातन की बेटी थी प्रेम बाईसा
समाधि पूजन के दौरान संत-महात्माओं ने साध्वी प्रेम बाईसा को केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सनातन की बेटी बताया. चौहटन के डूंगरपुरी मठ के मठाधीश ने कहा, साध्वी प्रेम बाईसा केवल इस धरा की बेटी नहीं थीं, वे सनातन परंपरा की बेटी थीं. उन्होंने अपने ज्ञान, वाणी और आचरण से प्रदेश ही नहीं, देश के कई राज्यों में सनातन धर्म का प्रचार किया. उनकी मृत्यु ने पूरे संत समाज को व्यथित किया है. संतों ने एक स्वर में ईश्वर से साध्वी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की मांग की. संतों का कहना था कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक साध्वी के अनुयायियों और परिजनों का दर्द कम नहीं हो सकता.
तीन दिन से अन्न-जल त्यागे बैठे थे पिता
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ को साधु-संतों ने अपना संकल्प तोड़ने के लिए मनाया. बेटी की मौत के बाद वीरम नाथ ने अन्न-जल त्याग दिया था. बताया गया कि वे तीन दिनों से न तो भोजन कर रहे थे और न ही पानी पी रहे थे. बेटी के वियोग में डूबे पिता ने मौन और उपवास को ही अपना सहारा बना लिया था.
डूंगरपुरी मठ के मठाधीश ने बताया साध्वी की मृत्यु के बाद से ही उनके पिता ने अन्न त्याग रखा था. तीन दिन तक उन्होंने जल भी ग्रहण नहीं किया. आज साधु-संतों ने उन्हें समझाया कि जीवन बचा रहना भी धर्म है. पहले उन्हें दूध पिलाया गया, फिर विधिवत भोजन करवाया गया. संतों द्वारा जब वीरम नाथ को दूध पिलाया गया, तो वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं.
पगड़ी रस्म और समाधि पूजन
जगदीश पुरी महाराज ने बताया कि उनके संप्रदाय में कुछ विशेष रीति-रिवाज होते हैं, जिनका पालन किया गया. हमारे संप्रदाय के अनुसार समाधि पूजन और पगड़ी रस्म का विशेष महत्व है. आज उसी परंपरा के तहत पूजा की गई. साध्वी के अनुयायियों और संत समाज ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. हमारी एक ही मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो. समाधि स्थल पर लगातार न्याय दो, न्याय दो की आवाजें भी सुनाई देती रहीं. हालांकि संतों ने सभी से शांति बनाए रखने और जांच एजेंसियों को अपना काम करने देने की अपील की.
कंपाउंडर का बड़ा खुलासा
इस बीच, साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर जांच में एक नया मोड़ तब आया, जब आजतक के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित ने कई अहम बातें सामने रखीं. देवी सिंह ने दावा किया कि उन्होंने साध्वी को पहले से लिखे प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर इंजेक्शन लगाए थे. कंपाउंडर के मुताबिक, मैंने जो इंजेक्शन लगाए, वे पहले से लिखे प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार थे. इंजेक्शन लगाने के बाद मैं वहां से निकल गया. करीब 20 मिनट बाद वीरम नाथ का कॉल आया कि तबियत खराब हो गई है. मैंने उन्हें तुरंत हॉस्पिटल ले जाने को कहा. देवी सिंह ने बताया कि पहले उन्हें दोपहर 12 बजे कॉल आया था और फिर शाम करीब 5 बजे दोबारा फोन आया, जिसके बाद वे आश्रम पहुंचे और इंजेक्शन लगाए. सूत्रों के अनुसार, कंपाउंडर ने डेक्सोना, डेक्सोना और डायनापार जैसे इंजेक्शन मसल्स पर लगाए थे. बताया जा रहा है कि देवी सिंह पिछले एक साल से साध्वी प्रेम बाईसा के आश्रम से जुड़े हुए थे और इससे पहले भी 3-4 बार आश्रम जा चुके थे. इतना ही नहीं, उन्होंने साध्वी के पिता वीरम नाथ को भी पहले इंजेक्शन लगाए थे और कई बार कथाएं सुनने भी गए थे.
SIT की जांच तेज
28 जनवरी को हुई मौत के बाद से ही कंपाउंडर की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे थे. अब जब उसका बयान सामने आया है, तो निगाहें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) पर टिक गई हैं. रविवार सुबह एफएसएल की टीम एक बार फिर आरती नगर स्थित आश्रम पहुंची और वहां से कुछ और सैंपल लिए. जोधपुर के पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश पासवान स्वयं आश्रम पहुंचे और SIT की प्रभारी छवि शर्मा व उनकी टीम के साथ करीब 20 मिनट तक बातचीत की. इसके बाद लगभग तीन घंटे तक SIT ने साध्वी के पिता वीरम नाथ, मामा गंगाराम और आश्रम के केयरटेकर सुरेश से पूछताछ की. SIT प्रमुख छवि शर्मा ने बताया, हमें कुछ पहलुओं पर दोबारा बात करनी थी. जांच के दौरान कुछ नए इन्वेस्टिगेशन एंगल सामने आए हैं, जिनकी तस्दीक जरूरी थी. इसलिए हम दोबारा मौके पर आए.
अशोक शर्मा