राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की बिक्री को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है. पेट्रोल पंप संचालकों के संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान मामले में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिन पर अदालत ने विस्तृत बहस के लिए अगली तारीख तय कर दी है. याचिका पेट्रोलियम डीलर्स डिस्ट्रीब्यूटर्स ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर की गई है. संगठन का आरोप है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम पेट्रोल पंप संचालकों पर दबाव बना रही हैं. यह दबाव मौखिक आदेशों और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए बनाए जाने का दावा किया गया है.
याचिका में कहा गया है कि पंप संचालकों को केवल सीमित मात्रा में ही पेट्रोल-डीजल बेचने के निर्देश दिए जा रहे हैं. इसके अलावा यदि कोई पंप तय सीमा से ज्यादा बिक्री करता है तो उसकी सप्लाई रोकने और बिक्री निलंबित करने की चेतावनी भी दी जा रही है. एसोसिएशन ने अदालत में दलील दी कि पेट्रोलियम उत्पाद आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आवश्यक वस्तु की श्रेणी में आते हैं.
ऐसे में इनके उत्पादन, वितरण और बिक्री को नियंत्रित करने का अधिकार सिर्फ केंद्र या राज्य सरकार के पास है. यह अधिकार भी केवल वैधानिक आदेश या अधिसूचना के माध्यम से ही लागू किया जा सकता है. याचिका में यह भी कहा गया है कि सरकार की ओर से इस तरह का कोई अधिकृत आदेश जारी नहीं किया गया है. इसलिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा लगाए गए कथित प्रतिबंध पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैध हैं.
व्हाट्सएप और मौखिक आदेशों से दबाव बनाने का दावा
राजस्थान हाईकोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिका की प्रतियां भारत संघ, राज्य सरकार और संबंधित ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से पेश अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराई गईं. अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले को विस्तृत बहस के लिए सूचीबद्ध कर दिया. इस मामले में याचिकाकर्ता संगठन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश के साथ अधिवक्ता हिमांशु रंजन सिंह भाटी ने पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने अपनी प्रारंभिक दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 25 मई 2026 निर्धारित की.
पेट्रोलियम कारोबार और आपूर्ति व्यवस्था पर असर की आशंका
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका सीधा असर पेट्रोलियम कारोबार और परिवहन क्षेत्र पर पड़ सकता है. पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि यदि इस तरह की सीमाएं जारी रहती हैं तो बाजार व्यवस्था और ईंधन आपूर्ति पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा. वहीं दूसरी तरफ ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की तरफ से अभी विस्तृत जवाब अदालत में प्रस्तुत किया जाना बाकी है. अदालत अब आगामी सुनवाई में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनेगी और उसके बाद आगे की दिशा तय की जाएगी. फिलहाल यह विवाद राजस्थान में पेट्रोल-डीजल आपूर्ति और बिक्री व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस का विषय बना हुआ है.
शरत कुमार