राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ को बचाने को लेकर चल रहे आंदोलन के चौथे दिन आमरण अनशन पर बैठे करीब 20 संतों की तबीयत खराब हो गई. धरना स्थल पर ही अस्पताल बनाकर 17 लोगों को भर्ती कराया गया है जबकि दो संतों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है.
बिश्नोई समाज रेगिस्तान की जीवन रेखा कही जानेवाली खेजड़ी के पेड़ की पूजा करता है मगर पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और पाली में बड़ी संख्या में सोलर प्लांट लगाए जाने की वजह से हज़ारों की संख्या में खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे है.इसके खिलाफ जैसलमेर में बड़ी संख्या में लोग चार दिनों से धरना दे रहे है.
पहले 363 लोगों को आमरण अनशन पर बैठना था मगर 420 लोग स्वेच्छा से खेजड़ी को बचाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं. वहीं मौक़े पर भारी भीड़ और संतों के अनशन को देखते हुए राजस्थान सरकार ने वार्ता के लिए मंत्री के. के. बिश्नोई को मौके पर भेजा है लेकिन संत और समाज खेजड़ी कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगने तक अनशन नहीं खत्म करने पर अड़ा हुआ है.
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इसे लेकर राजस्थान विधानसभा में भी कांग्रेस नेता हरीश चौधरी और निर्दलीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने मामला उठाया. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत समेत कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने भी खेजड़ी कटाई पर रोक लगाने की मांग की है. दरअसल खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष कहा जाता है जिसे रेगिस्तान का 'कल्पवृक्ष' या 'जीवनरेखा' कहा जाता है. बिश्नोई समाज के लिए यह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि उनकी आस्था और संस्कृति का अटूट हिस्सा है.
बिश्नोई समाज में खेजड़ी का महत्व
बिश्नोई समाज ने खेजड़ी बचाने के लिए ऐतिहासिक बलिदान दिया था.1730 में जोधपुर के खेजड़ली गांव में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोईयों ने खेजड़ी के वृक्षों को कटने से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी.
बिश्नोई समाज के गुरु जम्भेश्वर भगवान के बताए 29 नियमों में हरे पेड़ों को न काटना एक मुख्य नियम है. "सिर सांटे रूंख रहे, तो भी सस्तो जाण" (यदि सिर कटने पर भी पेड़ बचता है, तो भी वह सस्ता सौदा है) समाज का मूल मंत्र है. दीपावली और जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर खेजड़ी की पूजा की जाती है.
फाइव स्टार होटलों में डिमांड है इसके फली की
खेजड़ी को चमत्कारी पेड़ कहा जाता है. इसकी कच्ची फलियों को सांगरी कहते हैं, जिसकी सब्जी राजस्थान की पहचान है. इसमें भरपूर प्रोटीन और खनिज होते हैं. अकाल के समय लोग इसकी छाल का आटा बनाकर भी उपयोग करते थे. इसकी डिमांड फाइव स्टार होटलों में भी है.
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पर्यावरणविदों का माननना है कि रेगिस्तान में पशु पक्षी भी खेजड़ी के आड़ में जीते है. सोलर प्लांट की वजह से अबतक 50 से 60 हजार खेजड़ी की कटाई हो चुकी है जिसकी वजह राजस्थान के तापमान में चार डिग्री तक की बढ़ोतरी दिख रही है.
शरत कुमार