राजस्थान की राजनीति के एक प्रतिष्ठित परिवार में इन दिनों एक ऐसी प्रेम कहानी चर्चा में है, जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक दायरे तक हलचल पैदा कर दी है. यह मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह जसोल के बेटे और पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह जसोल से जुड़ा हुआ है. 60 वर्ष की उम्र में उनका नाम नीरजा सिंह चारण के साथ जोड़े जाने के बाद उनके निजी जीवन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस घटनाक्रम ने परिवार और परंपराओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है.
कौन हैं नीरजा सिंह चारण?
करीब 37 वर्ष की नीरजा चारण राजस्थान के पाली जिले के खीनामड़ी गांव की निवासी बताई जाती हैं. वे जोधपुर में एक लग्जरी कार कंपनी के शोरूम में जनरल मैनेजर के रूप में काम करती थीं. बताया जाता है कि मानवेंद्र सिंह और नीरजा की पहली मुलाकात कार की सर्विसिंग के दौरान हुई थी. शुरुआत में दोनों के बीच केवल औपचारिक पहचान थी, लेकिन समय के साथ यह जान-पहचान दोस्ती में बदल गई. चर्चा यह भी है कि पत्नी चित्रा सिंह के निधन के बाद जब मानवेंद्र सिंह कठिन मानसिक और शारीरिक दौर से गुजर रहे थे, तब नीरजा उनके करीब आईं और उनका सहारा बनीं.
सोशल मीडिया की तस्वीरों से बढ़ीं अटकलें
हालांकि इस रिश्ते को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आई कुछ तस्वीरों ने चर्चाओं को और हवा दे दी है. जोधपुर के एक होटल में आयोजित पार्टी की तस्वीरों में मानवेंद्र और नीरजा एक-दूसरे के गले में माला पहने नजर आ रहे हैं. वहीं केक पर 'हैप्पी बर्थडे नीरजा' लिखा हुआ दिखाई देता है. इसके अलावा नीरजा की एक दोस्त ने इंस्टाग्राम पर 'हैप्पी 3 मंथ गाइस' लिखकर एक स्टोरी साझा की, जिसके बाद शादी की अटकलें और तेज हो गईं.
मां ने घर के दरवाजे पर ही रोका
इस पूरे विवाद में भावनात्मक मोड़ तब आया जब मानवेंद्र सिंह की 90 वर्षीय मां शीतल कंवर ने इस रिश्ते का खुलकर विरोध किया. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में वह अपने घर के दरवाजे पर खड़ी दिखाई देती हैं और पुलिस के साथ पहुंचे बेटे मानवेंद्र को अंदर आने से रोक देती हैं. परिवार की परंपराओं की संरक्षक मानी जाने वाली शीतल कंवर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करेंगी.
परिवार की ओर से नोटिस जारी
इस मामले में मानवेंद्र सिंह के बेटे हमीर सिंह की ओर से भी एक नोटिस जारी किया गया है. इसमें पिता को नाम लेकर संबोधित करते हुए परिवार ने उनके किसी भी 'बाहरी महिला' के साथ संबंध को मान्यता देने से इंकार कर दिया है. इस नोटिस में मानवेंद्र की मां, भाई और बेटी की असहमति भी दर्ज बताई गई है.
सामाजिक परंपराओं को लेकर भी विवाद
यह विवाद केवल पारिवारिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक परंपराओं का मुद्दा भी इससे जुड़ गया है. राजपूत समाज में चारण समुदाय की महिलाओं को पारंपरिक रूप से 'बहन-बेटी' का सम्मान दिया जाता है. ऐसे में इस रिश्ते की चर्चा ने समाज के एक वर्ग को नाराज कर दिया है, जो इसे परंपराओं के खिलाफ मान रहा है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि 60 साल की उम्र में अपने जीवन से जुड़ा निर्णय लेना मानवेंद्र सिंह का निजी अधिकार है.
फिलहाल मानवेंद्र सिंह सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और इस पूरे मामले पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि उनकी निजी जिंदगी को लेकर उठी यह बहस अब राजस्थान की राजनीति और समाज दोनों में चर्चा का विषय बन चुकी है.
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