उदयपुर में तेंदुओं ने मचाया आतंक, 10 दिनों में 6 लोगों की ले ली जान

उदयपुर में तेंदुओं के आतंक ने लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया है. बीते 10 दिनों में तेंदुए के हमले में 6 इंसानों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग घायल हुए हैं. तेंदुओं के हमलों को देखते हुए कई जगह पिंजड़े भी लगाए गए हैं जिसमें 4 तेंदुए पकड़े भी गए हैं.

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यह सांकेतिक तस्वीर है यह सांकेतिक तस्वीर है

सतीश शर्मा

  • उदयपुर,
  • 29 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:10 PM IST

राजस्थान के उदयपुर में तेंदुओं के आंतक ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. बीते 10 दिनों में तेंदुए के हमले में 6 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 6 दिन में 4 तेंदुए पकड़े भी गए हैं.

रविवार सुबह गोगूंदा इलाके के बाघदड़ा गांव में चौथे तेंदुए को पकड़ा गया है. ये वो जगह है, जहां एक सप्ताह पहले तेंदुए ने खेत में बैल का शिकार किया था. रविवार सुबह 6 बजे गांव के सरपंच गणेशलाल सहित 4-5 ग्रामीणों ने तेंदुए को पिंजड़े में कैद देखा जिसके बाद उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी. 

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विभाग के ​अधिकारी मौके पर पहुंचे और तेंदुए को सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया गया है. इससे पहले 23 सितंबर की रात छाली ग्राम पंचायत के उमरिया गांव में दो अलग-अलग पिंजरों में दो तेंदुए कैद हुए थे. वहीं, 27 सितंबर को देर रात मजावद ग्राम पंचायत के कुडाऊ गांव की भील बस्ती के पास पिंजरे में एक तेंदुआ पकड़ा गया था.

डरे हुए हैं गांव के लोग

छाली के सरपंच गणेशलाल ने बताया, जहां पिंजरा लगा था, उस जगह से उनका घर करीब 400 मीटर की दूरी पर है. रात करीब 1 बजे तेंदुए की आवाजें सुनाई दीं. अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. रात के समय पिंजरे के पास दो तेंदुओं के आपस में लड़ने की आवाजें आ रही थीं.

सरपंच ने कहा कि तेंदुए के इस क्षेत्र में इंसानों पर हमलों की संख्या में इजाफा चिंताजनक है. हम अब प्रशासन और वन विभाग के साथ मिलकर इस पर चर्चा करेंगे. वहीं इससे पहले देर शाम (शनिवार) को गुड़ा गांव में मवेशियों के लिए चारा लेने गई गटू बाई (55) की तेंदुए ने जान ले ली थी. देर रात तक वन विभाग की ओर से गांव में पिंजरा नहीं लगाने और अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने से ग्रामीण नाराज हो गए थे.

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मृतक महिला के गुस्साए परिजन सैकड़ों ग्रामीणों के साथ रोड पर शव को लेकर धरने पर बैठ गए और रात 2 बजे तक धरना चलता रहा. गोगुंदा थाने की पुलिस और तहसीलदार कैलाश इनाणिया मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाया. तब जाकर मामला शांत हुआ था.

 

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