राजस्थान में मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो आस्था को एक नया आयाम देती है. यहां इंसानों की भीड़ तो हर दिन ठाकुरजी के दर्शन के लिए उमड़ती है लेकिन अब यहां एक कबूतर भी चर्चा का केंद्र बन गया है. कहा जा रहा है कि ये कबूतर रोज़ाना मंदिर के कपाट खुलने का इंतज़ार करता है और सबसे पहले भगवान के दर्शन करता है.
मेवाड़ के श्रीकृष्ण धाम में विराजमान भगवान सांवलिया सेठ, जिनके प्रति भक्तों की आस्था अटूट है. हर महीने मंदिर में करोड़ों रुपये का चढ़ावा और दूर-दराज़ से आने वाले लाखों श्रद्धालु. इस बात का प्रमाण हैं कि यहां विश्वास हर दिन और गहरा होता जा रहा है. सुबह की पहली आरती से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों का सैलाब उमड़ा रहता है.
लेकिन इन दिनों इस भीड़ के बीच एक अलग ही “भक्त” की चर्चा है. ना वो इंसान है ना कोई खास पहचान. वो है एक साधारण सा कबूतर. जिसकी हरकतें लोगों को हैरान कर रही हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि ये कबूतर पिछले लंबे समय से मंदिर के कपाट खुलने का इंतज़ार करता है. ठीक वैसे ही जैसे बाकी श्रद्धालु करते हैं.
मंदिर के कपाट अभी बंद हैं. बाहर भक्तों की कतारें लगी हैं. हर किसी की नजर एक ही पल पर टिकी है. जब कपाट खुलेंगे? और ठाकुरजी के दर्शन होंगे. इसी भीड़ में एक कोने में ये कबूतर भी चुपचाप बैठा नजर आता है. ना कोई घबराहट, ना कोई उड़ान. बस जैसे इसे भी उसी क्षण का इंतजार हो. और फिर जैसे ही पुजारी मंदिर के कपाट खोलते हैं, एक ऐसा दृश्य सामने आता है जो हर किसी को चौंका देता है. भक्तों से पहले ये कबूतर अचानक उड़कर सीधे मंदिर के भीतर प्रवेश करता है. कैमरे में कैद ये पल अपने आप में बेहद अनोखा और दुर्लभ है.
मंदिर के भीतर पहुंचकर ये कबूतर सीधे भगवान सांवलिया सेठ के चरणों में रखे चरणामृत के पास जाता है, अपनी चोंच से चरणामृत ग्रहण करता है. कुछ पल वहीं रुकता है और उसकी हरकतें देखकर ऐसा लगता है मानो वो सिर झुकाकर ठाकुरजी को प्रणाम कर रहा हो. कुछ सेकंड का ये दृश्य हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है. फिर बिना किसी हलचल के, वो कबूतर उड़ जाता है. लेकिन पीछे छोड़ जाता है एक ऐसा सवाल, क्या आस्था सिर्फ इंसानों तक सीमित है? या फिर भगवान की कृपा हर जीव पर समान रूप से होती है.
मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव बताते है- भगवान सांवलिया सेठ अपने हर भक्त पर कृपा करते हैं. यहां कोई भेदभाव नहीं है. इंसान हो या कोई जीव-जंतु, सभी में परमात्मा का वास है. मंदिर मंडल की ओर से जहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन, ठहरने और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है. वहीं पशु-पक्षियों के लिए भी दाना-पानी की व्यवस्था है. मंदिर की गौशाला में सैकड़ों गायों की सेवा की जाती है. और परिसर में कबूतरों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं.
इस घटना को देखने वाले श्रद्धालु भी इसे आस्था और चमत्कार का प्रतीक मान रहे हैं. कई लोग इसे ठाकुरजी की कृपा बता रहे हैं. तो कुछ इसे प्रकृति और विश्वास का अद्भुत संगम मानते हैं. हमने खुद अपनी आंखों से इस पूरे घटनाक्रम को देखा, और कैमरे में कैद किया. ये सिर्फ एक कबूतर की कहानी नहीं बल्कि उस आस्था की तस्वीर है जहां भगवान के दरबार में हर जीव समान है.
चेतन गुर्जर