थाने में खाने बनाने वाली की बेटी का ब्याह... ₹6.21 लाख का भात लेकर पहुंचा पुलिस स्टाफ; SHO बने 'नाना'

Rajasthan Police: इस मानवीय पहल के लिए आर्थिक सहयोग भी अनोखे तरीके से जुटाया गया. पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक मुहिम शुरू की, जिससे आम लोगों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया. हर एक योगदान ने इस विवाह को न सिर्फ भव्य बल्कि यादगार बना दिया.

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जयपुर पुलिस ने भरा मायरा भात.(Photo:ITG) जयपुर पुलिस ने भरा मायरा भात.(Photo:ITG)

रिदम जैन

  • जयपुर ,
  • 04 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

जयपुर के कालवाड़ पुलिस थाने के स्टाफ ने यह साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ कानून की नहीं, इंसानियत और करुणा की भी पहचान होती है. थाने में पिछले दस वर्षों से पुलिसकर्मियों के लिए भोजन बनाने वाली महिला कुक हिम्मत कंवर की बेटी गामिनी कंवर की शादी में थाने का पूरा स्टाफ ऐसे शामिल हुआ, जैसे कोई अपना ही परिवार हो. हिम्मत कंवर के पति के निधन के बाद से ही पुलिसकर्मी उनके सहारे बन गए थे, और जब बेटी की शादी की घड़ी आई, तो सबने मिलकर मामा और नाना का फर्ज निभाया.

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इस अनोखी पहल की अगुवाई थाना प्रभारी (SHO) नवरत्न धोलिया ने की. उनके नेतृत्व में पूरा स्टाफ मालीवाड़ा गांव पहुंचा, जहां शादी का आयोजन था. पुलिसकर्मियों ने न केवल अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, बल्कि बेटी के प्रति रिश्ते की सारी मर्यादाएं निभाईं.

उन्होंने मिलकर ₹6.21 लाख का ‘भात’ भरा, जिसमें ₹4.21 लाख नकद, ₹2 लाख के जेवर और गृहस्थी का पूरा सामान शामिल था. बर्तन, बेड, रजाई, और जरूरत की अन्य वस्तुओं से लेकर सब कुछ उन्होंने अपने परिवार की तरह दिया.

इस मौके को खास बनाने के लिए पुलिसकर्मी केवल मेहमान नहीं बने, बल्कि रस्मों में पूरी श्रद्धा से हिस्सा लिया. ढोल-नगाड़ों की थाप पर थाने से बारात की तरह रवाना होकर, पूरा पुलिस परिवार पैदल विवाह स्थल तक पहुंचा.

₹6.21 लाख का भात और पूरी गृहस्थी का सामान भेंट किया.

वहां SHO नवरत्न धोलिया ने ‘नाना’ की भूमिका निभाई, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों ने ‘मामा’ बनकर दुल्हन गामिनी कंवर को चुनरी ओढ़ाई, तिलक किया और सभी पारंपरिक रस्में निभाईं. पूरा माहौल भावनाओं और अपनत्व से भर गया.

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जब गामिनी कंवर की शादी की रस्में पूरी हुईं, तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम थीं. हिम्मत कंवर की आंखों से आभार के आंसू झलक पड़े. उन्होंने भावुक होकर कहा, “पति के जाने के बाद मैंने सोचा था, अब जिंदगी में सहारा नहीं बचेगा. लेकिन पुलिस परिवार ने मुझे अपनाया, बेटी की शादी में मामा-नाना बनकर जो किया, उसे मैं जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगी.”

यह घटना सिर्फ एक विवाह की कहानी नहीं, बल्कि उस मानवीय संवेदना की मिसाल है, जो पुलिस वर्दी के भीतर धड़कते दिल की ताकत को दिखाती है. कालवाड़ थाना स्टाफ ने यह साबित कर दिया कि ड्यूटी सिर्फ अपराधियों को पकड़ने या कानून लागू करने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज में भरोसे, दया और रिश्तों की डोर मजबूत करने का भी नाम है.

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