राजस्थान के जयपुर के बगरू रीको औद्योगिक क्षेत्र में वाणिज्यिक एलपीजी की सप्लाई ठप होने से उद्योगों में गंभीर संकट खड़ा हो गया है. करीब 30 गैस आधारित उद्योग पिछले कई दिनों से प्रभावित हैं, जिससे उत्पादन पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है. लगातार चलने वाले इन उद्योगों के बंद होने से सप्लाई चेन पर भी असर पड़ रहा है और इससे जुड़े अन्य कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं.
4000 कामगारों की आजीविका पर असर
बगरू इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के महासचिव नवनीत झालानी ने बताया कि इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन को पत्र लिखा गया है. उन्होंने जयपुर के जिला कलेक्टर और रसद अधिकारियों से तत्काल कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की है. उनका कहना है कि इन उद्योगों में करीब 4000 स्थानीय और प्रवासी मजदूर काम करते हैं, जिनकी आजीविका सीधे तौर पर इससे जुड़ी है.
उद्योगपतियों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा. दिलीप सेरामिक के मालिक दिलीप वैद ने बताया कि उनका उत्पाद 40 से अधिक देशों में निर्यात होता है, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों से गैस नहीं मिलने के कारण फर्नेस बंद है और 400 मजदूरों में से केवल 20 ही काम पर बचे हैं. इससे निर्यात पर भी गंभीर असर पड़ रहा है.
विदेश में निर्यात होते हैं कपड़े
इसी तरह मरुधरा डाईटेक प्राइवेट लिमिटेड के मालिक सुशील मेहता ने भी अपनी फैक्ट्री बंद कर दी है. बगरू प्रिंट के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र में कपड़ा उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. यहां से तैयार होने वाले कपड़े देश-विदेश में निर्यात होते हैं, लेकिन गैस सप्लाई ठप होने से पूरा उत्पादन रुक गया है.
रोजाना 2000 टन एलपीजी की जरूरत
उद्योग संगठनों के अनुसार, केवल बगरू क्षेत्र में ही रोजाना करीब 2000 टन एलपीजी की जरूरत होती है. यूनाइटेड काउंसिल ऑफ राजस्थान इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नीलेश अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण गैस संकट गहराया है, लेकिन सरकार ने उद्योगों को गैर-प्राथमिकता श्रेणी में रखकर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया है.
उन्होंने चेतावनी दी कि एक उद्योग के बंद होने से पूरी औद्योगिक श्रृंखला प्रभावित होती है और इसका असर कई अन्य इकाइयों पर भी पड़ता है. हालात ऐसे हो गए हैं कि उद्योगों को ताले लगाने पड़ रहे हैं और मजदूरों को घर भेजना पड़ रहा है.
स्थिति से नाराज उद्योग संगठनों ने राजस्थान दिवस के अवसर पर आयोजित 'मुख्यमंत्री का उद्यमियों के साथ संवाद' कार्यक्रम का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. उनका कहना है कि जब तक गैस आपूर्ति बहाल नहीं होती, तब तक किसी भी संवाद का कोई मतलब नहीं है.
शरत कुमार