करीब 40 दिनों तक चले भीषण तनाव और हमलों के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बन गई है, जो फिलहाल दो हफ्तों के लिए लागू रहेगा. इस सीजफायर के पीछे पर्दे के पीछे चली कूटनीतिक कोशिशों में कई देशों की भूमिका बताई जा रही है, जिसमें पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता की चर्चा भी शामिल है. युद्धविराम से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी धमकियां दी थीं, लेकिन हालात तेजी से बदले और दोनों पक्ष समझौते पर पहुंच गए। खास बात यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और ईरान के कड़े रुख ने इस समझौते में अहम भूमिका निभाई, जिससे क्षेत्रीय तनाव फिलहाल कम होने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि इजरायल के लेबनान पर तोबड़तोड़ हमले से इस युद्ध विराम पर सवाल खड़े होने लगे हैं.