देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक बहस तेज हो गई है. पिछले दस दिनों में तेल के दामों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है और दिल्ली समेत ज्यादातर शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये को पार कर चुकी है. ईंधन के दामों में कई बार बढ़ोतरी होने के बाद आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की वजह से विपक्ष सरकार पर हमलावर है जबकि सरकार का पक्ष है कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय संकटों के बावजूद भारत में स्थिति नियंत्रित है. आर्थिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया और अन्य वैश्विक तनावों का असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव महंगाई, रोजगार, आर्थिक विकास और विकास दर पर भी पड़ सकता है. इसी मुद्दे पर देखें दंगल