आज से ठीक 4 साल पहले 24 फरवरी 2024 को जब रशिया और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ था, तब दुनिया यही कहती थी कि इस युद्ध में यूक्रेन 4 दिन भी रशिया की सेना का सामना नहीं कर पाएगा. लेकिन इसके बाद समय बीतता गया और आज इस युद्ध को पूरे चार साल पूरे हो चुके हैं. ये भी तब हुआ है, जब राष्ट्रपति ट्रम्प अपनी चुनावी रैलियों में कहते थे कि वो इस यूक्रेन युद्ध को 24 घंटे के अंदर समाप्त करा देंगे. लेकिन राजनीतिक धुंधलेपन ने इन बातों को काफी पीछे धकेल दिया और अब वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि जिस यूक्रेन को अमेरिका ने युद्ध लड़ने के लिए खूब हथियार और पैसे दिए, वही अमेरिका जब ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने की धमकी दे रहा है तो रशिया ने कहा है कि वो इस युद्ध में ईरान का साथ देगा. यानी रशिया के खिलाफ युद्ध में 'यूक्रेन' का सारथी अमेरिका बना तो अमेरिका के खिलाफ युद्ध में ईरान का सारथी अब रशिया बनेगा और इस बार ये युद्ध पक्का माना जा रहा है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई ने तो इस युद्ध में अपनी मौत के बाद की योजना भी बनानी शुरू कर दी है और उन्होंने एक आंतरिक समूह बनाया है, जो उनकी मौत के बाद ईरान की इस्लामिक सत्ता को संभालेगा. इसके बाद हम भारत की उस प्रहार नीति का विश्लेषण करेंगे, जो आतंकवादियों का सफाया करने के लिए बनाई गई है. अब तक इज़रायल दुनिया का इकलौता ऐसा देश था, जिसने काउंटर टेरर पॉलिसी के तहत आतंकवादियों को चुन-चुन कर मारा और उनके आकाओं को जहन्नुम में पहुंचा दिया लेकिन अब भारत ने भी पहली बार आतंकवाद के खिलाफ एक लिखित डॉक्टरिन तैयार की है, जिसमें आतंकवादियों के लिए सिर्फ एक ही संदेश है और वो है, ओवर एंड आउट. इसके बाद हम आपको ये बताएंगे कि जब दुनिया के बड़े बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक अनिश्चितता और अस्थिरता के कारण खुद को दबाव में महसूस कर रही हैं, तब भारत की अर्थव्यवस्था धुरंधर बनी हुई है. Confederation of All India Traders का अनुमान है कि इस बार होली के त्योहार पर पूरे देश में लगभग 80 हज़ार करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है, जो पिछले साल से 20 हज़ार करोड़ रुपये ज्यादा होगा. आज हम आपको ये बताएंगे कि त्योहारों पर भारत के लोगों का बढ़ता खर्च कैसे देश की अर्थव्यवस्था को विशाल और मजबूत बना रहा है.