केदारनाथ में प्यार का इजहार, गुस्सा जायज है या निराधार?

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों को पिकनिक स्पॉट बना दिया गया है. जहां लोग मोबाइल पर रील बनाने में जुटे हुए हैं. वायरल वीडियो को लेकर लोग इसलिए भड़क गए हैं कि धार्मिक स्थान पर इस तरह का प्रपोजल नहीं दिया जाना चाहिए.

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केदारनाथ मंदिर के सामने कपल (फोटो- इंस्टाग्राम) केदारनाथ मंदिर के सामने कपल (फोटो- इंस्टाग्राम)

Akashdeep Shukla

  • नई दिल्ली ,
  • 05 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 12:12 PM IST

मैं तुझसे मिलने आई मंदिर जाने के बहाने... साल 1973 में सुनील दत्त और आशा पारेख की फिल्म 'हीरा' का यह गाना अगर इंटरनेट के इस युग में लिखा जाता तो शायद अब तक इस गाने पर रोक लगाने की बातें शुरू हो चुकी होतीं. कारण होता भावनाओं का आहत हो जाना. सोशल मीडिया के युग में रील एक नया दौर है. छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, घर से लेकर धार्मिक स्थलों तक रील बनाने का जुनून छाया हुआ है. लेकिन एक धड़ा ऐसा भी है जिसमें इस जुनून को लेकर नाराजगी है. 

बात इतनी बढ़ चुकी है कि अब धार्मिक स्थलों पर मोबाइल को बैन कर देने की मांग तक शुरू हो गयी है. ये सब तब और बढ़ गया जब उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ मंदिर परिसर में राइडर गर्ल विशाखा ने अपने पार्टनर रजत प्रताप सिंह के सामने घुटनों पर बैठकर अपने प्यार का इज़हार कर दिया. इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर आया और बवाल मच गया. वीडियो को देखने वाले लोग आहत हैं. उनका मानना है कि रील बनाने के चक्कर में लोग अपनी मर्यादा भूल रहे हैं. बात यहां तक पहुंच गई है कि धार्मिक स्थलों पर मोबाइल फोन को बैन किये जाने की मांग तेज है. 

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विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों को पिकनिक स्पॉट बना दिया गया है. जहां लोग मोबाइल पर रील बनाने में जुटे हुए हैं. विशाखा के वायरल वीडियो को लेकर लोग इसलिए भड़क गए हैं कि धार्मिक स्थान पर इस तरह का प्रपोजल नहीं दिया जाना चाहिए. इस तरह की हरकतों से लोग धर्म के साथ खिलवाड़ के अलावा और कुछ नहीं कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि यह सब कुछ लोग सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए करते हैं.  

लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें खिलवाड़ और भावनाओं को आहत करने जैसा क्या है? एक जोड़े ने ईश्वर को साक्षी मानकर एक दूसरे को अपना लिया, इस दौरान न ही उन्होंने भड़काऊ कपड़े पहने और न ही कोई अश्लील हरकत की. फिर भी हंगामा क्यों बरपा हुआ है, यह समझना थोड़ा मुश्किल है. 

वहीं विशाखा और रजत के इस वायरल वीडियो को स्क्रिप्टेड भी बताया जा रहा है. लेकिन इन सब चर्चाओं के दौरान हमें यह भी समझना होगा कि कपल के बीच धार्मिक स्थलों पर इज़हार का दौर नया नहीं है. भारतीय परंपराओं पर अगर एक नजर डालें तो हम पाएंगे कि ज्यादातर अरेंज मैरिज से पहले लड़का-लड़की पहली बार मंदिर में ही मिलते हैं. आज भी उनकी पहली मुलाक़ात के लिए धार्मिक स्थल को ही चुना जाता है. जहां दो लोग एक दूसरे को अपना जीवनसाथी चुनते हैं. 

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किसी मंदिर की भूमिका इतनी ही नहीं है बल्कि आज भी आर्य समाज मंदिर में पूरी रीति-रिवाज के साथ दो शादियां भी कराई जाती हैं, जिसे कानूनी तौर पर भी स्वीकार किया गया. बिहार के भागलपुर में स्थित बूढ़ानाथ मंदिर को लेकर तो अनोखी मान्यता है. माना जाता है कि इस शिव मंदिर में हुई शादी कभी नहीं टूटती, जिसकी वजह से यहां शादी करने वाले जोड़ों की लाइन लगी रहती है.  

किसी भी रिश्ते की शुरुआत के लिए धार्मिक स्थल से पवित्र दूसरी कौन सी जगह होगी. शायद इसीलिए विशाखा ने रजत को अपनी दिल की बात कहने के लिए ऐसा ही एक धर्मिक स्थल चुना और दोनों हमेशा हमेशा के लिए एक हो गए.   

विशाखा एक निडर लड़की हैं, वो चाहतीं तो अपने प्यार के इज़हार के लिए कोई भी एडवेंचर चुन सकती थीं, लेकिन उन्होंने सब कुछ दरकिनार कर ईश्वर को अपने प्यार का साक्षी बनाया. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह वीडियो स्क्रिप्टेड है, यानी सोच समझ कर पूरी प्लानिंग के साथ ऐसा किया गया है. अगर ऐसा है, तो भी इसमें दिक्कत क्या है? हां यह दिक्कत तब हो सकती थी जब यह कपल मंदिर परिसर में कोई अश्लील हरकत कर रहा होता, प्यार के इज़हार और अश्लील हरकत में फर्क होता है. और वीडियो में मुझे किसी भी तरह की अश्लीलता नहीं नजर आई.  

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हालांकि, भावना आहत प्रधानता सिर्फ प्यार के मामले में ही नहीं बल्कि और भी ऐसे मुद्दों में देखी गई जिसे सोचना तक मुश्किल है. फिल्मों की कहानी से लेकर किसी जायज़ बात तक. सोशल मीडिया पर लोग कब किस बात से आहत हो जाएं किसे खबर है. एक लड़का अपनी पीठ पर अपने पालतू डॉग को लेकर मंदिर पहुंचता है तो भी एक भीड़ आहत हो जाती है. ऐसे में मुझे लगता है कि महाभारत के दौर में अगर इंटरनेट होता तो शायद ये सभी लोग युधिष्ठिर से भी नाराज़ हो जाते, और उन्हें भी ट्रोल कर रहे होते. 

दिल्ली में एक लड़की पर जब एक लड़का बुरी तरह चाकू चला रहा होता है तब यही भीड़ वहां से चुपचाप निकल जाती है. लेकिन यही भीड़ प्यार के इज़हार पर आहत हो जाती है. क्रिस्टोफर मार्ले का एक कथन है, 'अगर हमें पता चले कि हमारे पास जीवन के सिर्फ पांच मिनट बचे हैं, और हमें वो सब कहना है जो हम कहना चाहते हैं, तो दुनिया के हर टेलीफोन बूथ पर लोगों की भीड़ लग जाएगी, जो एक दूसरे से हकलाते हुए फ़ोन पर कह रहे होंगे कि वे उन्हें प्यार करते थे. दुनिया को यह बात जितनी जल्दी हो समझ लेनी चाहिए. ताकि हमारा बचा हुआ समय प्यार में बीते. फसाद या भावना आहत करने में नहीं.

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