पूरी दुनिया की नजरें फारस की खाड़ी (Persian Gulf) पर टिकी हैं. ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान कि ‘हम दो-तीन हफ्तों में ईरान के मोर्चे से हट जाएंगे, चाहे होर्मुज स्ट्रेट खुले या न खुले‘, गले नहीं उतर रहा. 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के मद में चूर ट्रंप पीछे हटने के लिए नहीं जाने जाते. हां, वे इसे अपनी चालाकी के रूप में दिखा सकते हैं. इसीलिए उनके इस बयान के पीछे एक गहरी खामोशी है. वह खामोशी जो अक्सर तूफान से पहले आती है.
जानकार मान रहे हैं कि यह 'वापसी' नहीं, बल्कि ईरान के तट पर एक 'ट्रोजन हॉर्स' खड़ा करने की तैयारी है. ट्रंप जानते थे कि ईरान को केवल प्रतिबंधों से नहीं झुकाया जा सकता. अब तो यह भी जान गए हैं कि हवाई हमले भी काफी नहीं हैं. ऐसे में, मरीन कॉर्प्स और पैराट्रूप रेजिमेंट का एक ऐसा 'कहर' तैयार किया जा रहा है, जो खार्ग आइलैंड (Kharg Island) से लेकर पूरे दक्षिणी ईरान के तटीय बेल्ट पर कब्जा कर सके.
यूनानी किंवदंतियों में मशहूर ट्रॉय की जंग जैसे हालात फारस खाड़ी में है. लेकिन, क्या अंजाम भी वैसा ही होगा?
ट्रॉय की जंग और वो काठ का घोड़ा
युद्ध की इस रणनीति को समझने के लिए हमें हजारों साल पीछे 'बैटल ऑफ ट्रॉय' (Battle of Troy) में जाना होगा. वो कहानी जो हमने बचपन में पढ़ी है. कैसे, दस साल तक ग्रीक सेना ने ट्रॉय के मजबूत किले को घेर कर रखा, लेकिन वे उसे जीत नहीं पाए. जंग बेनतीजा थी, सैनिक थक चुके थे और हार सामने खड़ी थी.
तब यूनानी योद्धा ओडिसियस (Odysseus) ने एक शातिर चाल चली. उन्होंने एक विशाल खोखला 'काठ का घोड़ा' बनाया. जिसे दुनिया ने बाद में ट्रोजन हॉर्स कहा. ग्रीक सेना ने दिखावा किया कि वे हार मानकर पीछे हट रहे हैं और अपने जहाज लेकर समुद्र में दूर चले गए. वे अपने पीछे केवल उस लकड़ी के घोड़े को छोड़ गए, जिसके भीतर करीब 30 यूनानी योद्धा छुपे हुए थे. ट्रॉय के निवासियों को लगा कि यह उनकी जीत का तोहफा है और वे उस घोड़े को शहर के भीतर ले गए.
रात के अंधेरे में, उस घोड़े के पेट में छिपे योद्धा बाहर निकले, और उन्होंने किले के दरवाजे खोल दिए. जो सेना 'पीछे हटने' का नाटक कर रही थी, वह वापस आ गई. फिर जो हुआ वह इतिहास है. ट्रॉय हार गया.
लेकिन, क्या ईरान 'ट्रॉय' बनेगा?
आज के दौर में ट्रंप का बयान वही 'पीछे हटने' वाला नाटक लग रहा है. ट्रंप यह संदेश दे रहे हैं कि उन्हें होर्मुज स्ट्रेट की फिक्र नहीं है, ताकि ईरानी कमांडर रिलेक्स हो जाएं.
1. खार्ग आइलैंड और होर्मुज पर कब्जा: ईरान की इकोनॉमी की रीढ़ 'खार्ग आइलैंड' है, जहां से उसका अधिकांश तेल निर्यात होता है. अगर अमेरिकी मरीन्स एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' के जरिए यहां कब्जा कर लेते हैं, तो ईरान के पास मोलभाव करने की कोई ताकत नहीं बचेगी. ट्रंप का ‘पीछे हटने‘ का बयान ईरान को इस बात के लिए उकसा सकता है कि वे अपनी सुरक्षा घेराबंदी को थोड़ा ढीला करें. और आगे का काम अमेरिकी योद्धा कर सकें.
2. पैराट्रूपर्स और मरीन का कहर: दुनिया जानती है कि अमेरिकी सैन्य ताकत का असली चेहरा उसके मरीन्स और पैराट्रूप रेजिमेंट (82nd Airborne Division) है. यदि ट्रंप की योजना 'ट्रोजन हॉर्स' जैसी है, तो इसका मतलब है कि ओमान की खाड़ी और डिएगो गार्सिया जैसे बेस पर उनकी स्ट्राइक फोर्स ‘लॉन्च‘ होने के लिए तैयार बैठी होगी. उन्हें जैसे ही कहा जाएगा, वे धावा बोल देंगे. समुद्री रास्तों को फिर से नियंत्रित करने की कोशिश करेगा, ये पैराट्रूपर्स आसमान से दक्षिणी ईरान के भीतर तक उतर सकते हैं.
'सरप्राइज'- युद्ध का सबसे बड़ा हथियार
इतिहास गवाह है कि जंग केवल बारूद से नहीं, बल्कि 'डिसेप्शन' यानी सरप्राइज से जीती जाती है. जैसे 28 फरवरी को पहले घंटे में हुआ इजरायल और अमेरिका का हमला ईरान के लिए सरप्राइज था. जिसमें वो खामनेई सहित कई नेता और कमांडर खो बैठे. ट्रॉय की कहानी में लकड़ी का घोड़ा ऐसा ही एक 'सरप्राइज गिफ्ट' था. ट्रंप के मामले में, ‘शांति और पीछे हटने‘ का प्रस्ताव वही 'गिफ्ट' हो सकता है.
अगर ट्रंप वास्तव में पीछे हट रहे होते, तो वे अपनी नेवी को अटैक पोजिशन में तैनात नहीं करते. उसके तीन amphibious जहाज (पानी और किनारे तक आ जाने में समर्थ) भी किसी वक्त फारस की खाड़ी के नजदीक आ सकते हैं. डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप का असली निशाना ईरान के केवल परमाणु केंद्र नहीं, बल्कि पूरे दक्षिणी ईरान की 'कोस्टल लाइन' है. क्योंकि ऐसा करके ही वे अपनी फौज को सुरक्षित बना सकते हैं. ओर यदि वे होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर बैठ जाते हैं, तो वे न केवल ईरान बल्कि चीन और भारत तक जाने वाली तेल की सप्लाई लाइन को अपने अंगूठे के नीचे दबा लेंगे.
क्या ईरानी कमांडर 'ट्रोजन हॉर्स' को नहीं पहचानते?
यहां एक बड़ा 'ट्विस्ट' है. ट्रंप अगर यह सोच रहे हैं कि वे इतिहास दोहराएंगे, तो ये आसान नहीं होगा. ईरानी जनरल और 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के कमांडर भी इतिहास के मंझे हुए खिलाड़ी हैं.
'ट्रोजन हॉर्स' की कहानी दुनिया की हर सैन्य अकादमी में पढ़ाई जाती है. ईरानी कमांडरों ने इस बात का अंदाजा पहले ही लगा लिया होगा कि अमेरिका का 'पीछे हटने' का दांव एक छलावा हो सकता है.
ईरान सीधा मुकाबला करने के बजाय छापामार युद्ध में माहिर है. उन्होंने अपने मिसाइलें और ड्रोन पहले ही पहाड़ों की गुफाओं और भूमिगत बंकरों में छिपा रखे हैं. होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की 'स्वार्म बोट' (Swarm Boats) रणनीति किसी भी बड़े जहाज के लिए काल बन सकती है. खार्ग की निगरानी में ईरान पलक नहीं झपका रहा है. उसकी माइन्स, मिसाइलें और ड्रोन तैयार हैं. मरीन्स के खून से फारस की खाड़ी का पानी लाल करने के लिए.
इतिहास दोहराया जाएगा या नया लिखा जाएगा?
ट्रंप की 'रिट्रीट' वाली रणनीति अगर एक ट्रोजन हॉर्स है, तो यह आधुनिक युग का सबसे बड़ा मिलिट्री गैंबल होगा. कुल मिलाकर, ट्रॉय में ग्रीक सेना इसलिए जीती क्योंकि ट्रॉय के लोग अति-उत्साह में आ गए थे. क्या ईरान भी वही गलती करेगा? या फिर ट्रंप का यह काठ का घोड़ा पहले ही जला दिया जाएगा?
यदि ट्रंप का इरादा दक्षिणी ईरान पर कब्जा करना है, तो उन्हें पैराट्रूपर्स और मरीन के साथ-साथ एक बहुत बड़े खूनखराबे के लिए तैयार रहना होगा. ट्रॉय की कहानी का अंत शहर की तबाही से हुआ था, लेकिन 21वीं सदी में अगर 'काठ के घोड़े' वाली रणनीति फेल हुई, तो तबाही का दायरा केवल एक शहर या एक देश तक सीमित नहीं रहेगा.
ट्रंप के शब्दों पर नहीं, उनके मरीन्स और पैराट्रूप रेजिमेंट की मूवमेंट पर नजर रखिए- क्योंकि असली जंग वहीं से शुरू होगी जहां ट्रंप 'खत्म' करने की बात कर रहे हैं.
धीरेंद्र राय