अमेरिका को कांटे की तरह चुभता रहा क्‍यूबा, ट्रंप तोड़ेंगे 11 राष्‍ट्रपतियों की नाकामी का सिलसिला?

क्यूबा पिछले छह दशकों से अमेरिका को सीधे चुनौती दे रहा है. कोल्‍ड वॉर के दौर में अमेरिका ने इस देश पर अपने नियंत्रण के लिए नाकाबंदी, हमले, फिदेल कास्त्रो की हत्या की कोशिशें, सब कुछ किया. लेकिन अटलांटिक महासागर का द्विपीय देश क्यूबा अपने एजेंडे पर कायम रहा और अमेरिका की छाती में नश्‍तर की तरह चुभता रहा.

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अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और क्यूबा के दिवंगत राष्ट्रुपति फिदेल कास्त्रो अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और क्यूबा के दिवंगत राष्ट्रुपति फिदेल कास्त्रो

संयम श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:27 PM IST

अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को चेतावनी दी कि वह 'बहुत देर होने से पहले अमेरिका के साथ समझौता कर ले'. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, 'मार्को रुबियो क्यूबा के राष्ट्रपति होंगे'. ट्रंप ने इसे शेयर करते हुए लिखा, 'यह सुनने में अच्छा लग रहा है' (Sounds good to me!). विदेश मंत्री मार्को रुबियो का ‘क्यूबा का राष्ट्रपति’ बनना उन्हें 'अच्छा आइडिया लगता है'. जाहिर है कि इस तरह की बातें करके अमेरिकी राष्ट्रपति क्यूबा को खुलकर धमकी दे रहे हैं. पर सवाल यह है कि क्या क्यूबा ट्रंप के लिए वेनेजुएला की तरह आसान निशान बनेगा?

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इतिहास बताता है कि क्यूबा एक ऐसा देश रहा है जो अमेरिका के बिल्कुल पास में होने के बावजूद कभी उससे डरकर अपने सिद्धांतों और विचारों से समझौता नहीं किया. एक छोटे से कैरेबियाई देश ने जिसने दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति संयुक्त राज्य अमेरिका को 65 साल से ज्यादा समय तक चुनौती दी. और न केवल बचा रहा, बल्कि अपनी स्वतंत्रता और विचारधारा पर भी अडिग रहा. 1959 से आज तक क्यूबा ने अमेरिका के सामने कभी घुटने नहीं टेका. इस छोटे से देश ने अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सीने पर ऐसा मूंग दला कि वाशिंगटन को बार-बार अपनी नीतियां बदलनी पड़ीं. लेकिन क्यूबा कभी झुका नहीं.

कास्त्रो और क्यूबा

1 जनवरी 1959 को फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में यहां के लोगों ने अमेरिका समर्थित तानाशाह फुलगेन्सियो बतिस्ता को देश छोड़ने को मजबूर कर दिया. कास्त्रो ने शासन में आने के बाद अमेरिकी कंपनियों की जमीनें और कारखाने राष्ट्रीयकृत कर दिए. अमेरिका को लगा कि यह उसके पिछवाड़े में कम्युनिस्ट खतरा है. जवाब में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने 1960 में आर्थिक नाकाबंदी (embargo) कर दी, जो आज तक (2026 में भी) जारी है . दुनिया की सबसे लंबी चलने वाली नाकाबंदी. अमेरिका ने सोचा कि कुछ महीनों में क्यूबा की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी, लोग भूखे मरेंगे और कास्त्रो गिर जाएगा. लेकिन क्यूबा ने जवाब दिया . सोवियत संघ से हाथ मिलाया. सोवियत संघ ने चीनी और अन्य जरूरतों की भरपाई की. क्यूबा ने कहा कि हम भूखे मरेंगे, लेकिन झुकेंगे नहीं. क्यूबा के राष्ट्रपति अपनी प्राकृतिक मौत ही मरे.

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बे ऑफ पिग्स (1961): अमेरिका की सबसे बड़ी शर्मिंदगी

अप्रैल 1961 में CIA ने क्यूबाई निर्वासितों (exiles) को प्रशिक्षित करके बे ऑफ पिग्स पर हमला करवाया. लेकिन क्यूबाई सेना ने 72 घंटे में हमलावरों को नेस्तनाबूद कर दिया. 1,200 से ज्यादा अमेरिकी समर्थित सैनिक कैद हो गए. कास्त्रो ने दुनिया को दिखाया कि छोटा क्यूबा बड़े अमेरिका को हरा सकता है. कैनेडी प्रशासन को बड़ा झटका लगा था..

1962 में दुनिया परमाणु युद्ध के कगार पर थी. अमेरिकी नाकेबंदी के बीच सोवियत ने क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात कर दीं. 13 दिन तक दुनिया परमाणु युद्ध के कगार पर खड़ी रही. आखिर में सोवियत नेता ख्रुश्चेव ने मिसाइलें हटा लीं जिसके एवज में अमेरिका ने तुर्की से अपनी मिसाइलें हटाईं.

638 से ज्यादा बार कास्त्रो की हत्या की कोशिशें

CIA ने कास्त्रो को मारकर क्यूबा का तख्ता पलट करने की 638 से ज्यादा साजिशें रचीं . 1975 की चर्च कमेटी ने 1960 और 1965 के बीच कास्त्रो की हत्या की सीआईए की आठ साजिशों की पुष्टि की थी. वहीं, क्यूबा की काउंटर-इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख फेबियन एस्केलेंटे ने 638 कोशिशों का दावा किया और कहा कि अकेले निक्सन के जमाने में ही 184 कोशिशें हुई थीं.

इन कोशिशों में विस्फोटक सिगार, जहरीला मिल्कशेक, जहरीला डाइविंग सूट आदि का प्रयोग किया गया. कास्त्रो को डाइविंग करना पसंद था वहां के लिए एक चमकीले रंग का शेल को तैयार किया गया था, जिसमें बम लगाया गया था. एक पूर्व प्रेमिका से उन्हें जहर देने के लिए भी कहा गया. पर हर बार कास्त्रो ने मौत को धोखा दे दिया. कास्त्रो मजाक में कहते थे कि अगर जीने के लिए प्रतियोगिता होती, तो मैं जीत जाता. ये असफलताएं अमेरिका की कमजोरी दिखाती हैं. 25 नवंबर को 2016 को उनकी प्राकृतिक मौत हुई.

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क्यूबा ने कास्त्रों के नेतृत्व में अपनी तरक्की से दुनिया को अचंभित कर दिया

क्यूबा ने फिदेल कास्त्रो के नेतृत्व में 1959 की क्रांति के बाद कई क्षेत्रों में ऐसी तरक्की की, जिसने दुनिया को सचमुच अचंभित कर दिया. एक छोटा सा द्वीप राष्ट्र, जिस पर दशकों से अमेरिका की आर्थिक नाकाबंदी (embargo) लगी रही, फिर भी स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक समानता में इतनी ऊंचाइयां छू लीं कि कई विकसित देश भी इसे मिसाल मानते थे.

क्रांति के बाद क्यूबा ने स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. 1960 के दशक में ही मुफ्त, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली बनाई गई, आज क्यूबा की जीवन प्रत्याशा (life expectancy) 78-79 वर्ष है, जो अमेरिका से अधिक है. शिशु मृत्यु दर 4-5 प्रति 1000 है, जो अमेरिका और कई यूरोपीय देशों से बेहतर या बराबर है. क्यूबा ने 1960 में जहां 6,000 से कम डॉक्टर थे, वहाँ आज 9 डॉक्टर प्रति 1,000 लोग हैं , जो दुनिया में सबसे ऊंचा अनुपात है. COVID-19 में क्यूबा ने अपनी Abdala और Soberana वैक्सीन बनाईं, जो 90% से अधक प्रभावी रहीं और कई देशों को निर्यात की गईं.

क्रांति के तुरंत बाद 1961 में साक्षरता अभियान चलाया गया.1 साल में साक्षरता दर 76% से बढ़ाकर 99.8% कर दी. आज भी दुनिया में सबसे ऊंची है. शिक्षा पूरी तरह मुफ्त है, प्राथमिक से यूनिवर्सिटी तक. क्यूबा में प्रति व्यक्ति किताबों का उत्पादन और पढ़ाई का स्तर बहुत ऊंचा है.

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क्यूबा ने जाति, लिंग और आर्थिक असमानता को काफी हद तक खत्म किया. राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बहुत ऊंची है. संसद में 53% महिलाएं हैं. खेल में भी क्यूबा ने ओलंपिक में कई मेडल जीते, खासकर बॉक्सिंग और एथलेटिक्स में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. नाकाबंदी के बावजूद क्यूबा ने दिखाया कि संसाधनों की कमी विचारधारा और इच्छाशक्ति से पूरी की जा सकती है. कास्त्रो का दौर (1959-2008) क्यूबा को एक मिसाल बना गया.

क्या क्यूबा अब अमेरिका के लिए वेनेजुएला जैसा आसान शिकार बन जाएगा

क्यूबा आज की तारीख में भी वेनेजुएला जैसा आसान शिकार नहीं बनेगा. हालांकि स्थिति बहुत नाजुक और चुनौतीपूर्ण हो चुकी है. जनवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाईं कर निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया और वहां नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश चल रही है. ट्रंप ने इसके बाद कहा है कि क्यूबा अब गिरने के लिए तैयार है. क्योंकि उसकी आय का बड़ा हिस्सा वेनेजुएला से आने वाला तेल था. वेनेजुएला से क्यूबा को रोजाना 30,000-35,000 बैरल सस्ता तेल मिलता था, जो बदले में क्यूबाई डॉक्टर, सैन्य सलाहकार और खुफिया सहायता देता था.

अब यह सप्लाई खतरे में है. अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल टैंकर जब्त करना शुरू कर दिया है. क्यूबा की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है. बिजली कटौती 20 घंटे तक, दवाइयों-खाने की कमी, मुद्रास्फीति 50% से अधिक और जनसंख्या 25% तक घट चुकी है. 2020-2025 में 8 मिलियन से कम हुई है. लेकिन क्यूबा वेनेजुएला से अलग है. क्यूबा में तेल नहीं होना ही उसके लिए फायदेमंद हो गया है. वेनेजुएला की तरह अमेरिका को तेल के लिए आकर्षण नहीं है. वेनेजुएला में तेल के भंडार थे, इसलिए अमेरिका ने हस्तक्षेप किया.

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वेनेजुएला के मुकाबले क्यूबा में रूस और चीन का निवेश बहुत कम है. क्यूबा में अभी भी ये दोनों देश राजनीतिक और सीमित आर्थिक मदद देते हैं. इसके साथ ही रूस ने हाल ही में क्यूबा से रक्षा समझौते नवीनीकृत किए हैं.

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