भारत और कनाडा के बीच चल रहे विवाद के बीच कनाडा के रहने वाले एक पंजाबी रैपर और सिंगर शुभ का मुंबई कॉन्सर्ट कैंसिल कर दिया गया है. शुभ पर खालिस्तान समर्थक होने का आरोप है. उसने कुछ दिन पहले भारत का एक विवादास्पद नक्शा सोशल मीडिया पर शेयर किया था. इसमें पंजाब और जम्मू-कश्मीर को नहीं दिखाया गया था. इतना ही नहीं उसके कई गानों में खालिस्तानी सुर सुनाई देता है. यही वजह है कि उसके भारत दौरे के मद्देनजर उसका विरोध शुरू हो गया था. बीजेपी की यूथ विंग ने उसके कॉन्सर्ट को कैंसिल करने की मांग की थी, जो कि मुंबई में कॉर्डेलिया क्रूज पर क्रूज कंट्रोल 4.0 के नाम से होने वाला था.
साल 2021 में अपना सिंगिंग करियर की शुरू करने वाले शुभनीत सिंह ऊर्फ शुभ कनाडा में रहता है. 'डॉन्ट लुक', 'एलिवेटेड', 'चेक्स', 'नो लव' और 'वन लव' जैसे उनके रैप सॉन्ग हिंदुस्तान में भी काफी पॉपुलर हैं. महज 26 साल के इस सिंगर के दीवानों में विराट कोहली, केएल राहुल और हार्दिक पांड्या तक का नाम शामिल है. लेकिन इस विवाद के बाद सभी क्रिकेटर्स ने उनको सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया है. मुंबई ही नहीं दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद सहित 12 शहरों में होने वाले उनके सभी कॉन्सर्ट कैंसिल कर दिए गए हैं. इस तरह भारत हर स्तर पर कनाडा को मुंहतोड़ जवाब देने की कोशिश कर रहा है.
वैसे ये पहली बार नहीं है कि कोई पंजाबी सिंगर या रैपर खालिस्तान का समर्थन किया है. हिंसा, गन कल्चर से लेकर अलगाववाद तक को बढ़ावा देने वालों की संख्या बड़ी है. इसमें कई नामचीन नाम शामिल हैं. पिछले साल गैंगवार का शिकार हुआ मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला भी खालिस्तान समर्थक था. पंजाब के मानसा के मूसा गांव का रहने वाला शुभदीप सिंह सिद्धू ऊर्फ सिद्धू मूसेवाला के गानों में अक्सर खालिस्तान समर्थन का सुर दिखता था. वो अक्सर अपने गानों में गन कल्चर को प्रमोट करता था. सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ दिखाई देता था. उस पर आर्म्स ऐक्ट के तहत केस भी दर्ज हुआ था.
साल 2020 सिद्धू मूसेवाला का एक गाना 'पंजाब: माय मदरलैंड' रिलीज हुआ था. इसमें उसने खालिस्तानी अलगाववादी जरनैल सिंह भिंडरावाले का समर्थन किया था. इतना ही नहीं गाने में खालिस्तान समर्थक भरपूर सिंह बलबीर के भाषण के कुछ दृश्य भी शामिल किए गए थे, जो उसने साल 1980 में दिए थे. इसके साथ ही मूसेवाला ने किसान आंदोलन का भी समर्थन किया था. आरोप है कि किसान आंदोलन को खालिस्तानी समर्थक नेताओं ने खूब सपोर्ट किया था. कनाडा सहित कई देशों से पैसे उपलब्ध कराए गए थे. सिद्धू ही नहीं उसका परिवार भी उसके विचार का पोषक है. इसकी झलक उसकी बरसी पर दिखी थी.
सिद्धू मूसेवाला की पहली बरसी पंजाब के मानसा की किसान मंडी में आयोजित की गई थी. इस दौरान हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट की मानें तो उस दौरान सिद्धू मूसेवाला की मां चरण कौर ने स्टेज से कहा, ''मैं बस तुमसे एक ही बात पूछना चाहती हूं कि हमारा देश आजाद है या गुलाम? इस पर वहां मौजूद लोगों ने कहा, ''गुलाम''. इसके बाद 'खालिस्तान जिंदाबाद, खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगने लगे. स्टेज से किसी ने लोगों को रोकने की कोशिश तक नहीं की थी. इसके बाद भी चरण कौर ने कहा, ''हमें किसी भुलावे में नहीं रहना चाहिए कि हम आजाद हो गए, हम आज भी गुलाम हैं.''
सिद्धू मूसेवाला की तरह कनाडा निवासी पंजाबी सिंगर जैजी बी भी अक्सर अपने गानों में हिंदुस्तान विरोधी सुर लगाता रहता है. उसने अपने एक गाने ''पुत्त सरदारा दे'' में खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले का महिमामंडन किया है. इसके साथ ही सिखों के लिए अलग खालिस्तान राज्य की मांग की है. इस गाने के बोल अमित बोवा ने लिखे हैं. इसमें ये भी कहा गया है कि सिखों को पता है कि वो भारत में अपने लोगों के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम का बदला कैसे लेंगे. इस गाने में भिंडरावाले के भाषण में इस्तेमाल किए गए हैं. जैजी बी का असली नाम जसविंदर सिंह बैंस है, जो कि किसान आंदोलन के दौरान भी सक्रिय था.
जैजी बी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए किसान आंदोलन की आवाज उठाई थी. हालांकि, भारत की तरफ से कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद उसके अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया गया था. जैजी साल 2000 से 2010 तक यूथ के बीच काफी पॉपुलर था. उसने कई हिट गाने गाए हैं. इनमें 'जट दा फ्लैग', 'मिस करदा', 'जिन्ने मेरा दिल लुटिया', 'वन मिलियन', 'जवानी' जैसे गाने शामिल हैं. इसके अलावा उसने कई फिल्मों में भी काम किया है. इसमें शहीद उधम सिंह, तीसरी आंख, जट और जूलियट, बेस्ट ऑफ लक, रोमियो रांझा, फरार और पोस्ती जैसी फिल्मों का नाम शामिल है. वो फिलहाल यूके में रह रहा है.
यदि पंजाब के नेशनल सिंगर्स की बात छोड़ दी जाए तो ज्यादातर रीजनल सिंगर्स खालिस्तानी विचार से प्रभावित दिखते हैं. इसके पीछे की एक बड़ी वजह पैसा है. हमेशा से आरोप लगते रहे हैं कि खालिस्तानी समर्थक संगठन पंजाब के लोगों के बीच अपने विचार को मजबूत करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं. इनके निशाने पर ज्यादातर नवोदित सिंगर, रैपर और एक्टर होते हैं, जो कुछ गाने और फिल्में करके मशहूर हो जाते हैं. यूथ के बीच इनकी लोकप्रियता बहुत होती है. ऐसे में इनको पैसे देकर अपने समर्थन में काम कराया जाता है. हम जानते हैं कि सिनेमा और संगीत का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है.
इसके साथ ही खालिस्तानी समर्थकों को पंजाब के कई सियासी दल राजनीतिक संरक्षण भी देते हैं. राजनीतिक रसूख हासिल करने के लिए भी कुछ पंजाबी सिंगर्स अपने गानों के जरिए खालिस्तान का समर्थन करते हैं. यूथ को लुभाने के लिए गन कल्चर को प्रमोट करते हैं. यहां तक कि अपने फैन फॉलोइंग की सियासी सोच को भी प्रभावित करने की कोशिश करते हैं. इसका सबसे अहम उदाहरण सिद्धू मूसेवाला ही है. उसने अपने गानों के जरिए पहले अलगाववाद को बढ़ावा दिया. हिंसा और गन कल्चर को प्रमोट किया. मौका देखते ही राजनीति में आ गया. पिछले विधान सभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू ने मूसेवाला को कांग्रेस में शामिल कराया था. उसे पंजाब के मानसा सीट से टिकट भी दिलाया था, लेकिन आम आदमी पार्टी के डॉ. विजय सिंगला से मूसेवाला चुनाव हार गया था.
मुकेश कुमार गजेंद्र