अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से पूरी दुनिया हिली पड़ी है. हाल ही में, ट्रंप ने 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025' को मंजूरी दी है, जो रूस से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने वाले देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने की अनुमति देता है. इस बिल के तहत भारत और चीन जैसे देशों से आयातित सामानों पर कम से कम 500% टैरिफ लगाए जा सकते हैं. यह टैरिफ उन देशों पर लागू होंगे जो रूस से यूरेनियम और पेट्रोलियम उत्पादों के आदान-प्रदान में जानबूझकर शामिल होते हैं. यह कदम यूक्रेन के साथ शांति समझौते पर बातचीत से इनकार करने वाली रूसी सरकार को दंडित करने का उद्देश्य रखता है. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह सब केवल रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़ा है, या ट्रंप भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से बौखला गए हैं?
भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 2025-26 के लिए 7.4% अनुमानित है, जो वैश्विक मंदी के बीच एक चमकदार उपलब्धि है. क्या ट्रंप की यह नीति भारत की इस सफलता को कुंद करने की कोशिश है? क्या भारत की आर्थिक उन्नति ट्रंप के लिए एक चुनौती बन गई है.
1-ट्रंप की सैंक्शन पॉलिसी की पृष्ठभूमि
ट्रंप प्रशासन ने हमेशा से 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति अपनाई है. 2025 में सत्ता में वापसी के बाद, ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अपने एजेंडे का केंद्र बनाया. 'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट' को अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के साथ मिलकर तैयार किया है. ग्राहम का कहना है कि यह बिल उन देशों को दंडित करेगा जो सस्ते रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं. विशेष रूप से चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों को निशाना बनाया गया है, क्योंकि ये राष्ट्र रूसी तेल के बड़े आयातक हैं.
बिल के प्रावधान स्पष्ट हैं: यदि अमेरिकी राष्ट्रपति पाते हैं कि रूसी सरकार या उसके एजेंट यूक्रेन के साथ शांति समझौते पर बातचीत से इनकार कर रहे हैं, तो ऐसे देशों से आयातित सामानों पर 500% टैरिफ लगाए जा सकते हैं. यह टैरिफ आयातित सामानों की कीमत के सापेक्ष होंगे. यदि कोई शांति समझौता होता है और उसे तोड़ा जाता है, या यूक्रेन पर नया आक्रमण होता है, तो ये उपाय रद्द हो सकते हैं. लेकिन वर्तमान में, यूक्रेन की सरकार को उखाड़ फेंकने या कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ यह बिल एक हथियार है.ट्रंप ने पहले ही अगस्त 2025 में भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगा दिया था, जिससे कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया. इसका कारण भारत का रूस से ऊर्जा व्यापार था.
ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि भारत रूसी तेल मुद्दे पर मदद नहीं करता, तो टैरिफ और बढ़ सकते हैं. हालांकि, ट्रंप ने स्वीकार किया है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम की है.भारत ने ट्रंप के दावे का खंडन किया है कि पीएम मोदी ने रूसी तेल खरीद बंद करने का आश्वासन दिया था. भारत का कहना है कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई. अमेरिकी सीनेटर ग्राहम ने बताया कि भारत के राजदूत ने 25% टैरिफ से राहत मांगी थी, यह दावा करते हुए कि रूसी तेल खरीद कम हो गई है. यह सब दर्शाता है कि ट्रंप की नीति केवल रूस को अलग-थलग करने की नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार को अपने पक्ष में मोड़ने की है.
2-रूस तो केवल बहाना है
ट्रंप प्रशासन रूस को दंडित करने के लिए भारत-चीन और ब्राजील को निशाना बनाने के लिए यह बिल ले आया है. पर हकीकत यह है कि अमेरिका खुद रूस से यूरेनियम का आज भी आयात करता है. भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक अमेरिकी कंपनियां परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के लिए पैलेडियम, उर्वरक और रसायन रूस से खरीदना जारी रखे हुए हैं. जबकि ट्रंप भारत पर अपने व्यापारिक संबंधों को कम करने का दबाव बना रहे हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह बयान पहली बार भारत पर टैरिफ लगाने पर दिया गया था.भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर रूस से तेल आयात का बचाव किया था और अमेरिका वह यूरोपीय संघ पर पाखंड का आरोप लगाया था.
इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक भारतीय पत्रकार ने सवाल किया कि भारत का कहना है कि अमेरिका रूस से यूरेनियम और उर्वरक खरीदता है, जबकि रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने के लिए भारत की आलोचना करता है. ट्रंप ने यह कहकर अपना पीछा छुड़ाया था कि उन्हें इस संबंध में कुछ मालूम नहीं है.
3-भारत की 6.5% ग्रोथ, एक वैश्विक चमत्कार
हाल ही में जारी अनुमानों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.4% रहने की उम्मीद है. यह पिछले वर्ष की 6.5% ग्रोथ से अधिक है. रॉयटर्स, सीएनबीसी और इकोनॉमिक टाइम्स जैसे स्रोतों के अनुसार, यह ग्रोथ वैश्विक चुनौतियों जैसे अमेरिकी टैरिफ और मुद्रास्फीति के बावजूद हासिल की जा रही है. विनिर्माण क्षेत्र, जो जीडीपी का 13% है, 7% की वृद्धि दिखा सकता है, जबकि पिछले वर्ष यह 4.5% था. यह ग्रोथ भारत को एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत कर रही है.
वैश्विक मंदी में जहां अमेरिका और यूरोप संघर्ष कर रहे हैं, भारत की अर्थव्यवस्था चमक रही है. अग्रिम अनुमानों में रियल जीडीपी 7.4% बढ़ने का अनुमान है. यह सफलता 'मेक इन इंडिया', डिजिटल इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशों का परिणाम है. लेकिन क्या यह ट्रंप को चुभ रही है? ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति में, भारत जैसा उभरता हुआ राष्ट्र एक प्रतिस्पर्धी के रूप में देखा जा सकता है.
4-ट्रंप की बौखलाहट का कारण भारत की ग्रोथ
ट्रंप की नीतियों को रूस-यूक्रेन युद्ध से जोड़ा जा रहा है, लेकिन गहराई में देखें तो यह भारत की आर्थिक स्वतंत्रता पर हमला लगता है. ट्रंप ने चुनाव अभियान में भारत को 'टैरिफ किंग' कहा था और दावा किया था कि भारत अमेरिका से ज्यादा टैरिफ वसूलता है. अब, रूस से तेल खरीद को बहाना बनाकर ट्रंप भारत पर दबाव बना रहे हैं लेकिन भारत ने रूसी तेल खरीद कम की है, फिर भी 500% टैरिफ की धमकी क्यों?
शायद जवाब भारत की 7.4% ग्रोथ में छिपा है. ट्रंप अपने पहले टर्म में भी भारत पर स्टील और एल्युमिनियम पर टैरिफ लगाए थे. अब, जब भारत वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत हो रहा है, ट्रंप की नीति भारत को कमजोर करने की लगती है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति और बेरोजगारी है, जबकि भारत में निवेश बढ़ रहा है. एफडीआई में वृद्धि, स्टॉक मार्केट की ऊंचाई, और निर्यात में बढ़ोतरी ट्रंप को जलन पैदा कर सकती है.
ग्राहम के बयान से स्पष्ट है कि यह बिल भारत और चीन के लिए है कि वे रूसी तेल न खरीदें. लेकिन भारत के लिए रूसी तेल सस्ता और जरूरी है, जो ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है. यदि भारत इसे बंद करता है, तो तेल कीमतें बढ़ेंगी, जो ग्रोथ को प्रभावित कर सकती हैं. ट्रंप शायद यही चाहते हैं कि भारत की ग्रोथ को धीमा किया जाए ताकि अमेरिकी कंपनियां लाभ उठा सकें.
5-ट्रंप की बौखलाहट का एक प्रमुख कारण BRICS और उसकी मुद्रा
ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता आज की तारीख में अमेरिकी डॉलर की वैश्विक प्रभुत्व को सबसे बड़ा खतरा है. BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित नए सदस्य जैसे ईरान, UAE, इंडोनेशिया) डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है.ट्रंप ने कई बार 100% टैरिफ की धमकी दी है, अब 500 प्रतिशत की धमकी दे रहे हैं. ट्रंप कह चुके हैं कि BRICS को डॉलर को कमजोर करने के लिए बनाया गया है... ऐसा करने वाले देश अमेरिकी बाजार से अलविदा कहें.
ट्रंप की यह बौखलाहट इसलिए है क्योंकि BRICS वैश्विक GDP का बड़ा हिस्सा (37% से अधिक) और आबादी (46%) कवर करता है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों ने BRICS को डॉलर-मुक्त व्यापार के लिए प्रेरित किया. ट्रंप के टैरिफ और सैंक्शन उल्टे de-dollarization को तेज कर रहे हैं, क्योंकि देश अमेरिकी दबाव से बचने के लिए विकल्प तलाश रहे हैं. हालांकि, BRICS में पूर्ण साझा मुद्रा अभी दूर है (भारत जैसे सदस्य इसका विरोध करते हैं), लेकिन स्थानीय मुद्रा व्यापार बढ़ रहा है.
संयम श्रीवास्तव