ओडिशा: बेटी को सबके सामने पीटा, बेइज्जती से आहत होकर बुजुर्ग ने की खुदकुशी

भद्रक जिले में कंगारू कोर्ट और भीड़ के न्याय का एक गंभीर मामला सामने आया है. बेटी की सार्वजनिक पिटाई और अपमान से आहत बुजुर्ग लम्बोदर तराई ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने दस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच जारी है.

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महिला की सार्वजनिक पिटाई (Photo: Screengrab) महिला की सार्वजनिक पिटाई (Photo: Screengrab)

अजय कुमार नाथ

  • भद्रक,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:26 PM IST

ओडिशा के भद्रक जिले से भीड़ के न्याय और तथाकथित कंगारू कोर्ट का एक दर्दनाक मामला सामने आया है.  यहां एक बुजुर्ग ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली. आरोप है कि गांव की भीड़ ने उसकी बेटी को न सिर्फ पीटा बल्कि पूरे गांव और बाजार में घुमाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया. इस घटना से आहत होकर बुजुर्ग ने यह कदम उठाया.

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यह मामला चांदबाली ब्लॉक के बंसदा थाना क्षेत्र अंतर्गत चडादिया पंचायत का है. मृतक की पहचान लम्बोदर तराई के रूप में हुई है. पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी लक्ष्मीप्रिया परिडा को अवैध शराब कारोबार के आरोप में गांव के कुछ युवक और महिलाएं उनके घर से जबरन उठा ले गईं. परिवार का आरोप है कि भीड़ ने बिना किसी कानूनी अधिकार के उनके घर में तोड़फोड़ की और घरेलू सामान नष्ट कर दिया.

बुजुर्ग ने जहर खाकर की खुदकुशी

परिजनों का कहना है कि भीड़ ने लक्ष्मीप्रिया परिडा के साथ घर के अंदर मारपीट की और फिर उसे गांव और स्थानीय बाजार में घुमाया गया. इस दौरान उसे गालियां दी गईं और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया. बाद में गांव में एक तरह की कंगारू कोर्ट लगाई गई, जहां लम्बोदर तराई को भी बुलाया गया और सबके सामने उन्हें भी अपमानित किया गया.

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परिवार का आरोप है कि खुद को पंचायत या समाज का ठेकेदार बताने वाले लोगों ने उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया. जब परिवार इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ रहा तो आरोप है कि भीड़ ने जबरन दस हजार रुपये नकद वसूल किए. इसके बाद ही लक्ष्मीप्रिया को छोड़ा गया.

बेटी की पिटाई से मानसिक रूप से टूट गए थे

इस पूरी घटना से लम्बोदर तराई मानसिक रूप से टूट गए. बेटी के साथ हुए व्यवहार और समाज में मिली बेइज्जती का सदमा वह सहन नहीं कर पाए. अगले ही दिन उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया. हालत बिगड़ने पर उन्हें चांदबाली अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

लक्ष्मीप्रिया परिडा ने अपने बयान में कहा कि वह पहले अवैध शराब के कारोबार से जुड़ी हुई थी, लेकिन उसने पुलिस को लिखित रूप में आश्वासन देकर यह काम पूरी तरह छोड़ दिया था. उसका कहना है कि उसने भीड़ को यह बात समझाने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी. उन्होंने सीधे तोड़फोड़ शुरू कर दी और हमला कर दिया.

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की

घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस ने मारपीट, जबरन वसूली और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों में मामला दर्ज कर लिया है. गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है और सबूत जुटाए जा रहे हैं.

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भद्रक के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बंसदा इलाके में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अवैध शराब के खिलाफ अभियान चला रही थीं. पुलिस के अनुसार, मृतक की बेटी पहले अवैध शराब बेचने के मामलों में पकड़ी जा चुकी थी और आबकारी व पुलिस टीमों ने पहले भी कार्रवाई की थी. इसी वजह से 25 जनवरी को स्वयं सहायता समूह के सदस्यों ने उसके घर जाकर कार्रवाई की और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया.

दस लोगों के खिलाफ केस दर्ज एक गिरफ्तार 

पुलिस के मुताबिक, इसके बाद लम्बोदर तराई ने समूह के सदस्यों से बेटी को छोड़ने की गुहार लगाई थी, इसी दौरान कथित तौर पर उन्हें फटकार लगाई गई. अगले दिन उन्होंने जहर खा लिया और उनकी मौत हो गई. इस मामले में अब तक दस लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि एक अन्य फरार है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस घटना में महिलाओं की भूमिका क्या रही. फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जाएगी.


 

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