इंदौर से 8 बार सांसद रहीं और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की वाराणसी के मणिकर्णिका घाट की घटना पर प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के दौरान मशीनों से नुकसान होना दुखद है, लेकिन सरकार की मंशा पर शक नहीं किया जाना चाहिए.
सुमित्रा महाजन ने मणिकर्णिका घाट की घटना की तुलना अपने व्यक्तिगत अनुभव से करते हुए व्यावहारिक पक्ष रखा. उन्होंने कहा, ''जेसीबी से काम करते समय धक्के लग जाना एक सामान्य हादसा है. मेरे अपने घर में भी जेसीबी लगने से पानी की लाइन फूट गई थी. मणिकर्णिका घाट पर भी यही हुआ है, हालांकि वहां मंदिर या प्राचीन ढांचे को नुकसान पहुंचना एक बड़ा विषय है."
बीजेपी की वरिष्ठ नेत्री ने संतोष जताया कि वाराणसी प्रशासन ने तुरंत अपनी गलती स्वीकार की और विज्ञप्ति जारी कर ढांचे को पुनः ठीक करने का आश्वासन दिया है.
उन्होंने तर्क दिया कि पहले काशी या इंदौर की जनसंख्या कम थी, लेकिन अब लाखों लोग आ रहे हैं. महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई है, इसलिए सुविधाओं का विस्तार जैसे मणिकर्णिका पर शौचालय, स्नानघर और लकड़ी रखने की व्यवस्था अनिवार्य है. देखें VIDEO:-
उन्होंने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा, "काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में अहिल्या माता की मूर्ति स्थापित करना सरकार की ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है. किसी ने मांग नहीं की थी, फिर भी सरकार ने उनके योगदान को सम्मान दिया."
इंदौर की छत्रियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब ट्रस्ट ध्यान नहीं देते, तब नगर निगम और सरकार को ही आगे आकर संरक्षण का काम करना पड़ता है.
'पत्र लिखें, पर थोड़ा धैर्य रखें'
सुमित्रा महाजन ने इस मुद्दे पर आक्रोशित लोगों को सलाह दी. उन्होंने कहा कि जिन्हें दुख पहुंचा है, उन्हें शासन को पत्र लिखकर अपनी भावनाएं बतानी चाहिए और कहना चाहिए कि हमें दुख हुआ है, आप इसे ठीक करें. सरकार इतिहास और विरासत को मानती है, इसलिए हमें थोड़ा इंतजार करना चाहिए कि वे इसे कितनी जल्दी और बेहतर तरीके से ठीक करते हैं.
'आया राम, गया राम' की राजनीति पर तंज
BJP की वरिष्ठ नेत्री सुमित्रा महाजन ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस में गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर कड़ा संदेश दिया. उन्होंने साफ कहा कि दल बदलने वालों को जिस भी पार्टी में जाएं, ईमानदारी से काम करना चाहिए, वरना बदनामी भाजपा की ही होती है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो भी 'आया राम, गया राम' पद्धति के लोग हैं, वो जिस भी दल में रहें, पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करना चाहिए. सुमित्रा महाजन के इस बयान को मौजूदा राजनीतिक हालात और लगातार हो रहे दल-बदल के संदर्भ में अहम माना जा रहा है.
धर्मेंद्र कुमार शर्मा