'लव मैरिज और भाग के शादी वालों का हुक्का पानी बंद, समाज से बाहर...' रतलाम में ऐसे फरमान के बाद 6 पर एक्शन

रतलाम जिले में प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार के ऐलान ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. गांव में खुलेआम जारी इस फरमान का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और शांति भंग की आशंका के चलते छह ग्रामीणों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई. प्रशासन अब ऐसे सामाजिक आदेशों पर सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है.

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रतलाम में फरमान के बाद 6 पर एक्शन (Photo: itg) रतलाम में फरमान के बाद 6 पर एक्शन (Photo: itg)

aajtak.in

  • रतलाम ,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:38 AM IST

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एक गांव में प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों और उनके परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का फरमान जारी होने से सनसनी फैल गई. अब इस अजीब फरमान का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने छह ग्रामीणों के खिलाफ शांति बनाए रखने के लिए कानूनी कार्रवाई की. प्रशासन ने साफ किया है कि कानून से ऊपर कोई सामाजिक तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

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घर से भागकर प्रेम विवाह करने पर बायकॉट

यह मामला रतलाम जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित पांचेवा गांव का है. यहां 23 जनवरी को गांव के कुछ लोगों ने ऐलान किया कि जो युवक-युवतियां घर से भागकर प्रेम विवाह करेंगे, उनका और उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. इतना ही नहीं, ऐसे लोगों की मदद करने वालों को भी इसी सजा का सामना करना पड़ेगा.

हुक्का पानी भी किया जाएगा बंद

इस फरमान से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति गांव के लोगों के सामने यह घोषणा करता नजर आ रहा है. वीडियो में कहा गया कि प्रेम विवाह करने वालों को किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाएगा, उन्हें रोजगार नहीं दिया जाएगा और यहां तक कि दूध व अन्य दैनिक जरूरतों की आपूर्ति भी बंद कर दी जाएगी.

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वीडियो सामने आते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया. रतलाम के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि वीडियो के आधार पर गांव के छह लोगों को ‘बाउंड ओवर’ किया गया है, यानी उन्हें कानूनन शांति बनाए रखने और भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहने के लिए पाबंद किया गया है.

न्याय विभाग के सहयोग से गांव में संवाद कार्यक्रम

एसपी अमित कुमार ने यह भी बताया कि पांचेवा गांव के एक पीड़ित परिवार की शिकायत को संबंधित थाना अधिकारियों को भेज दिया गया है और मामले में कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन का कहना है कि किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

पुलिस और जिला प्रशासन अब सामाजिक न्याय विभाग के सहयोग से गांव में संवाद कार्यक्रम चला रहे हैं, ताकि लोगों को कानून, संविधान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बारे में जागरूक किया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जाएगी. 

 

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