'UGC समाज के लिए दोधारी तलवार...', महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरी की सरकार को चेतावनी, प्रयागराज की घटना पर जताया रोष

MP News: राजगढ़ के खिलचीपुर में महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरी ने UGC को समाज के लिए घातक बताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की. साथ ही प्रयागराज में बटुकों के अपमान पर पुलिस प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त की.

Advertisement
प्रयागराज की घटना पर बरसीं महामंडलेश्व अन्नपूर्णागिरी.(Photo:ITG) प्रयागराज की घटना पर बरसीं महामंडलेश्व अन्नपूर्णागिरी.(Photo:ITG)

पंकज शर्मा

  • राजगढ़,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:31 PM IST

UGC समाज के लिए दोधारी तलवार का काम करेगा. किसी के लिए यह विकास का कार्य करेगा तो किसी के लिए विनाशकारी साबित होगा. मुझे लगता है कि समाज में यूजीसी का निर्णय घातक साबित हो सकता है. सरकार इस पर पुनर्विचार करे. यह बात पंचायती निरंजनी अखाड़ा की महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरी ने कही.

वे मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में हिंदू सम्मेलन को संबोधित करने आई थीं. महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरी ने कहा कि हम लोग सामाजिक समरसता के पूर्ण पक्षधर हैं, क्योंकि हम भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के अनुयायी हैं. राम ने हमें सिखाया है कि राम मंदिर के फेरों में नहीं, शबरी के बेरों में मिलते हैं.

Advertisement

अन्नपूर्णागिरी ने कहा, ''माघ मेले प्रयागराज में जो कुछ हुआ, वह एक समय की घटना थी, एक गलतफहमी जैसी घटना थी. शंकराचार्य जी हमारे भगवान हैं, मैं उन्हें प्रमाण मानती हूं, लेकिन शंकराचार्य जी के साथ जिन बटुकों और ब्राह्मणों का अपमान हुआ, उसका हम विरोध करते हैं. उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था. मैं पुलिस प्रशासन के अनुशासन से नाखुश नहीं हूं, लेकिन उन्होंने जो अपनी ड्यूटी में बटुकों की चोटी-शिखा खींची और ब्राह्मणों को पीटा, उससे मैं नाराज हूं. ऐसा नहीं होना चाहिए था. देश में संतों का सम्मान किया जाता है, बटुकों और ब्राह्मणों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था. पुलिस प्रशासन को इस तरह नहीं करना चाहिए था.''

महामंडलेश्वर ने यह भी कहा कि शंकराचार्य ही हमारे भगवान हैं और योगी आदित्यनाथ जी भी हमारे संत एवं सन्यासी हैं, जिन्होंने संतत्व की ऐसी परिभाषा दी है कि धर्म और राष्ट्र दोनों के लिए एक साथ काम किया. देखें VIDEO:- 

Advertisement

पंचायती निरंजनी अखाड़ा की संत ने कहा, ''मैं हिंदू सम्मेलन में संबोधन करने आई हूं. सम्मेलन का उद्देश्य सिर्फ जागृति है, हम किसी का विरोध करने नहीं आए हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमें सिखाता है नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे. संघ हमें सामाजिक समरसता सिखाता है. सामाजिक समरसता एक बहुत बड़ा विषय है, जिसके लिए हम काम कर रहे हैं.''

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement