नाव और क्रूज के दो हादसे और 'लाइफ जैकेट' वाली लापरवाही, कब लेंगे हम सबक?

लाइफ जैकेट पहनने से डूबने की घटनाओं में जान बचाने की संभावना 90% से अधिक होती है, लेकिन नियमों की अवहेलना लगातार जानलेवा साबित हो रही है. बीती 10 अप्रैल को ही मथुरा में बड़ा नाव हादसा हो गया था, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी.

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जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज डूब गया है, सामने आया है कि यात्रियों को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज डूब गया है, सामने आया है कि यात्रियों को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

नर्मदा नदी के बैकवाटर में गुरुवार शाम बड़ा हादासा हो गया. पर्यटकों के नदी की सैर करा रहा क्रूज तेज आंधी से डगमगा गया और बरगी डैम में डूब गया. लोगों ने बताया है कि जैसे ही क्रूज बीच धारा में पहुंचा उसी दौरान मौसम अचानक बदल गया. तेज हवाएं चलने लगीं और पानी में ऊंची लहरें उठने लगीं. कुछ ही देर में क्रूज डगमगाने लगा. यात्रियों में चीख-पुकार मच गई. देखते ही देखते क्रूज में पानी भरने लगा और वह डूबने लगा. 

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नियमों की अनदेखी बन रही है मौत की वजह
जब तक कोई सुरक्षा उपाय किए जाते तब तक 10 लोग अपनी जान गंवा चुके थे. हादसा कैसे हुआ, क्यों हुआ? इन सवालों के बीच फिर से विलेन 'लापरवाही' और 'नियमों की अनदेखी'ही बनी है. सामने आया है कि क्रूज पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहना था. 

'क्रूज में किसी को लाइफ जैकेट दी ही नहीं गई'
क्रूज हादसे में जीवित बच गए दिल्ली निवासी प्रदीप ने चौंकाने वाली वजह बताई है. उन्होंने कहा कि, क्रूज में लापरवाही ही लापरवाही थी. जो दो लोग क्रू के सदस्य थे उन्होंने पर्यटकों को उनके हाल पर छोड़ दिया. प्रदीप का आरोप है कि क्रूज में सवार लोगों को लाइफ जैकेट भी पहनने को नहीं दी गई. पर्यटकों ने ख़ुद ही एक दूसरे को लाइफ जैकेट पहनाई.

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प्रदीप ने आरोप लगाया कि जब लहरें तेज हुईं तो किनारे पर खड़े लोगों ने क्रूज चालक से कहा कि वो उसे किनारे लगा ले, लेकिन चालक ने एक न मानी और क्रूज को वापस स्टार्टिंग पॉइंट तक ले जाने पर अड़ा रहा और यह हादसा हो गया. हादसे में प्रदीप की पत्नी और 4 साल का बेटा लापता है.

यह भी पढ़ें: जबलपुर के बरगी डैम में पर्यटकों से भरा क्रूज डूबा, 4 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

आखिर क्यों हर बार ऐसा होता है कि पर्यटक स्थलों पर इस तरह की लापरवाही बरती जाती है. जबकि लगातार ऐसे हादसों की खबरें आती रहती हैं. पानी में डूबने जैसी कठिन परिस्थिति में 'लाइफ जैकेट' बहुत बड़े जीवन रक्षक सपोर्ट के तौर पर सामने आती है. अगर नाव-क्रूज, मोटरबोट पर बैठने वाले लोग इसे ठीक से पहनें और इसमें कोई भी लापरवाही नहीं करें तो हादसे की विषम परिस्थितियों में भी मौत की दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. 

कैसे जान बचाती है लाइफ जैकेट?
नाव में डूबने की स्थिति में लाइफ जैकेट पहनने से जान बचने की संभावना 90% से अधिक हो जाती है. यह किसी भी डूबने वाले को बेहोशी की हालत में भी पानी की सतह पर ऊपर रखती है और उसके चेहरे को पानी से बाहर रखती है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है. भले ही डूबने वाला तैरना न जानता हो, फिर भी यह जैकेट एक ऐसे डिवाइस के तौर पर काम करती है, जो डूबने नहीं देती. अगर आप चोट लगने या शॉक की वजह से पानी में बेहोश भी हो जाएं तो भी यह डूबने नहीं देती है. ठंडे पानी में शरीर को झटके (Cold Water Shock) से बचाने में मदद करती है. 
 
इतने फायदे के बावजूद नाव या मोटरबोट के सफर में यात्रियों को 'लाइफ जैकेट' देने और उसे पहनाने में कोताही बरती जाती है. अभी हाल ही में मथुरा-वृंदावन में भी नाव हादसा हुआ था. यहां हादसे से ठीक पहले का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें नाव में सवार लोग भजन गा रहे थे, लेकिन किसी ने भी लाइफ जैकेट नहीं पहन रखी थी.

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10 अप्रैल को हुआ था मथुरा नाव हादसा
मथुरा के केशी घाट पर ये हादसा 10 अप्रैल को हुआ था. इस भीषण नाव हादसे में लाइफ जैकेट की भारी कमी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण 13 से अधिक लोगों की जान चली गई. वहीं ये भी सामने आया था कि 15 से 20 लोगों की क्षमता वाली नाव में 30 लोग सवार थे. अधिक यात्रियों (ओवरलोडिंग) के कारण नाव पलटी, जिसमें किसी ने भी लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी. 

इस बड़े हादसे के बावजूद स्थिति नहीं बदली और महज 20 दिन में दूसरा हादसा मध्य प्रदेश के जबलपुर में हो गया. क्रूज या बोट पर सवार होने के नियमों में किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट देना भी जरूरी है. मौसम खराब होने पर संचालन तुरंत रोकना चाहिए. लेकिन बरगी डैम में इन नियमों का कितना पालन हुआ, यह अब जांच का विषय है.

हादसे के बाद अब जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं, वह इस बात को पुख्ता करती हैं कि नियमों में लापरवाही तो हुई है. ये लापरवाही इतनी बड़ी है कि कल जो लोग हंसते-खेलते परिवार के साथ घूमने निकले थे, आज वह किनारे पर बैठे-बैठे या तो अपनों को तलाश रहे हैं या फिर शवों पर विलाप कर रहे हैं.

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