मध्य प्रदेश पुलिस की ट्रेनिंग से जुड़ा एक नया आदेश राजनीतिक बहस का कारण बन गया है. पुलिस ट्रेनिंग ले रहे जवानों को दिन की शुरुआत श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र के पाठ से करने के लिए कहा गया है. लेकिन इसे लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है.
यह निर्देश ADG (ट्रेनिंग) राजा बाबू सिंह की ओर से जारी किया गया है जिसमें उन्होंने कहा है कि राज्य के सभी पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों (पीटीएस) में हर सुबह प्रशिक्षण शुरू होने से पहले परिसर में लगे लाउडस्पीकरों के जरिए दक्षिणामूर्ति स्तोत्र का प्रसारण किया जाए, ताकि ट्रेनर और ट्रेनी जवान दोनों इसे सुन सकें.
राजाबाबू सिंह भगवान शिव के स्वरूप दक्षिणामूर्ति को ज्ञान और चेतना का प्रतीक बताते हुए कहा है कि पुलिस बल को केवल शारीरिक रूप से सक्षम ही नहीं, बल्कि मानसिक और नैतिक रूप से भी मजबूत होना चाहिए.
एक आदर्श पुलिस अधिकारी के लिए ज्ञान का अर्थ केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि सही निर्णय लेने की क्षमता और नैतिक स्पष्टता भी है. इसलिए स्तोत्र के नियमित श्रवण से ट्रेनी जवानों में आत्मचिंतन और अनुशासन की भावना विकसित होगी, जिससे वे बेहतर और मानवीय अधिकारी बन सकेंगे.
इससे पहले भी पुलिस प्रशिक्षण में धार्मिक ग्रंथों को शामिल करने के फैसलों को लेकर विवाद हो चुका है. एडीजी राजाबाबू सिंह इससे पहले पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में भगवद गीता का एक अध्याय पढ़ने का निर्देश दिया था.
राजाबाबू सिंह ट्रेनी जवानों को रामचरितमानस के श्लोक पढ़ने के निर्देश भी दे चुके हैं. हालांकि विपक्षी दल समय-समय पर इन कदमों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं.
दक्षिणामूर्ति स्तोत्र क्या है?
दक्षिणामूर्ति स्तोत्र भगवान शिव के उस स्वरूप की स्तुति में रचा गया एक प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है, जिसे दक्षिणामूर्ति कहा जाता है. दक्षिणामूर्ति को 'आदि गुरु' या 'परम शिक्षक' माना जाता है ऐसे गुरु जो मौन के माध्यम से ज्ञान प्रदान करते हैं. यह स्तोत्र परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को समर्पित माना जाता है और इसमें अद्वैत वेदांत (अद्वैत दर्शन) के गूढ़ सिद्धांतों को श्लोकों के रूप में प्रस्तुत किया गया.
दक्षिणामूर्ति कौन हैं?
दक्षिणामूर्ति भगवान शिव का वह रूप हैं जो दक्षिण दिशा की ओर मुख करके वटवृक्ष के नीचे बैठे हुए दर्शाए जाते हैं. वे ऋषियों को मौन भाव से आत्मज्ञान का उपदेश देते हैं. उनकी छवि ज्ञान, ध्यान, विवेक और आत्मबोध का प्रतीक मानी जाती है.
रवीश पाल सिंह