ग्वालियर हाईकोर्ट की युगलपीठ ने एक हैबियस कॉर्पस मामले में SSP ग्वालियर को कड़ी फटकार लगाई है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एडिशनल एडवोकेट जनरल से तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आपका एसएसपी ताल ठोककर कहता है कि वह स्वयं कॉर्पस को बरामद कर कोर्ट में पेश करता है, जबकि हकीकत यह है कि कॉर्पस तो पुलिस की सूचना पर खुद थाने में उपस्थित होता है। फिर ऐसी झूठी वाहवाही क्यों लूटी जा रही है?
दरअसल, ग्वालियर के मुरार निवासी योगेश गोयल ने अपने अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया के माध्यम से हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी. याचिका में बताया गया कि 3 मई 2022 को योगेश गोयल का विवाह आगरा निवासी निशा राठौर से हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था. 27 दिसंबर 2023 को उनकी पत्नी ने एक बेटे कृति को जन्म दिया.
योगेश का आरोप है कि उसकी पत्नी का व्यवहार परिवार के प्रति बेहद क्रूर था और वह लगातार सास से अलग रहने की जिद करती थी. पत्नी को खुश रखने के लिए वह अपने माता-पिता से अलग भी रहा, लेकिन इसके बावजूद घरेलू विवाद खत्म नहीं हुआ.
मई 2025 में उसकी पत्नी बच्चे को लेकर मुरार बाजार गई और बिना बताए आगरा चली गई. बाद में उसने मैसेज कर बताया कि वह अपने बॉयफ्रेंड सचिन से शादी करना चाहती है. जब योगेश ने तलाक के बिना शादी पर आपत्ति जताई, तो पत्नी ने कहा कि बिना तलाक ही शादी होगी और अगर बच्चा चाहिए तो 50 लाख रुपए देने होंगे.
4 दिसंबर 2025 को योगेश अपने दोस्तों के साथ आगरा पहुंचा और बच्चे को लेकर ग्वालियर लौटने लगा, लेकिन उसकी पत्नी ने पुलिस को फोन कर उसे गिरफ्तार करा दिया.
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के नोटिस पर महिला अपने बच्चे को लेकर मुरार थाने पहुंची, जहां से महिला पुलिस उसे हाईकोर्ट लेकर आई. जब कोर्ट ने महिला आरक्षक से पूछा कि महिला और बच्चा कहां से लाए गए हैं, तो जवाब मिला कि मुरार थाने से.
इस पर हाईकोर्ट ने एडिशनल एडवोकेट जनरल से सख्त लहजे में कहा, जब कॉर्पस खुद थाने में मौजूद था, तो फिर एसएसपी द्वारा खुद बरामदगी का दावा कर वाहवाही क्यों लूटी जा रही है?
याचिकाकर्ता के वकील अवधेश भदौरिया ने महिला और उसके बॉयफ्रेंड के संबंधों से जुड़े फोटोग्राफ पेश करने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने एक सप्ताह बाद अगली सुनवाई तय की है.
सर्वेश पुरोहित