20 बच्चों को बचाने के लिए दे दी अपनी जान, जानें MP की कंचनबाई की दिलेरी की कहानी

मध्य प्रदेश के नीमच जिले में इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए एक आंगनवाड़ी कर्मी ने अपनी जान गंवा दी. नीमच जिले के रानपुर गांव में मधुमक्खियों के हमले के दौरान कंचन बाई मेघवाल ने करीब 20 मासूम बच्चों को बचाया. बच्चों को सुरक्षित करने के बाद वह खुद मधुमक्खियों का शिकार हो गईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

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 MP की कंचनबाई की दिलेरी की कहानी (Photo: itg) MP की कंचनबाई की दिलेरी की कहानी (Photo: itg)

अजय बाड़ोलिया

  • नीमच,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव में सोमवार को मानवता और ममता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसे सुनकर हर किसी की आंख नम हो गई. मडावदा पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र पर जब अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला किया, तो वहां मौजूद कंचन बाई मेघवाल ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मौत से मुकाबला किया. जिस समय परिसर में खेल रहे मासूम बच्चों पर मधुमक्खियां ने हमला किया तब कंचन बाई उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़ीं.

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बच्चों को तिरपाल और दरी से ढंका

उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बच्चों को तिरपाल और दरी से ढंका और एक-एक कर करीब 20 बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर पहुंचाया. मासूमों को मौत के मुंह से निकालने के इस प्रयास में हजारों मधुमक्खियों ने कंचन बाई को अपना निशाना बना लिया और उन पर टूट पड़ीं जिसके चलते कंचन बाई बेहोश हो गईं.

चली गई कंचन बाई की जान

आसपास के लोगों ने जब तक कंचन बाई को बचाने का प्रयास किया, तब तक वे बुरी तरह घायल हो चुकी थीं. सूचना पर पहुंची डायल 112 के आरक्षक कालूनाथ और पायलट राजेश राठौर ने उन्हें तत्काल सरवानिया स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था.चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. 

पति को पैरालिसिस, बच्चों के सिर से उठा साया

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कंचन बाई न केवल आंगनवाड़ी में मध्यान भोजन बनाती थीं, बल्कि जय माता दी स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में गांव की सक्रिय महिला भी थीं, उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है,कंचनबाई के पति शिवलाल पहले से ही पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और अब एक बेटे व दो बेटियों के सिर से मां का साया भी उठ गया है. 

गांव वालों का पानी भरना मुश्किल

इस घटना के बाद से पूरे रानपुर गांव में मातम के साथ-साथ भारी दहशत व्याप्त है. आलम यह है कि गांव में पानी भरने का एकमात्र स्रोत वह हेडपंप है जो आंगनवाड़ी के पास लगा है, लेकिन मधुमक्खियों के उसी पेड़ पर जमे होने के कारण ग्रामीणों ने वहां जाना छोड़ दिया है। ग्रामीण अब प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब इन छत्तों को हटाकर क्षेत्र को सुरक्षित किया जाएगा, मंगलवार को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद जब कंचन बाई का शव गांव पहुंचा. 

बच्चों के ऊपर हुआ था मधुमक्खियों का अटैक
 
कंचन बाई हैंडपम्प पर जैसे ही पानी भर रही थी तो अचानक से मधुमक्खियां उड़ीं. उन्होंने देखा बच्चों के ऊपर अटैक हुआ, बच्चों को बचाने के चक्कर में उन्होंने बच्चों को मेटिंग और चादर से ढंका.बच्चों को बचाने का चक्कर में मधुमक्खी ने उनके ऊपर हमला कर दिया. उनके पोता भी है जिसे मधुमक्खियों ने काफी काटा है. 

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