इंदौर: भागीरथपुरा के बाद महू में गंदे पानी का कहर, बीमार पड़े 25 से ज्यादा लोग

इंदौर के भागीरथपुरा के बाद अब महू में भी दूषित पेयजल का कहर देखने को मिला है. पट्टी बाजार और मोती महल सहित कई इलाकों में गंदा पानी पीने से दो दर्जन से अधिक लोग बीमार पड़ गए. देर रात विधायक उषा ठाकुर और कलेक्टर शिवम वर्मा ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया.

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भागीरथपुरा के बाद महू में गंदे पानी का कहर, बीमार पड़े 25 से ज्यादा लोग (Photo: file photo) भागीरथपुरा के बाद महू में गंदे पानी का कहर, बीमार पड़े 25 से ज्यादा लोग (Photo: file photo)

धर्मेंद्र कुमार शर्मा

  • इंदौर,
  • 23 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:46 AM IST

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में दूषित पेयजल का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है. भागीरथपुरा इलाके में गंदे पानी से हुई मौतों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब शहर के महू क्षेत्र में भी दूषित पानी पीने से लोगों के बीमार होने की खबरें सामने आई हैं. इस घटना ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है.

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महू के पट्टी बाजार, मोती महल और चन्दर मार्ग इलाके में दूषित पेयजल के कारण करीब 25 से  ज्यादा लोग बीमार पड़ गए हैं. बीमार लोगों ने उल्टी, दस्त, पेट दर्द की शिकायत बताई है. जैसे ही मामले की जानकारी प्रशासन को मिली, देर रात महू की स्थानीय विधायक उषा ठाकुर प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने पहुंचीं और सभी के उपचार की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए.

दूषित पेयजल से बीमार लोग अस्पताल में उपचाररत है अन्य लोग अपने घर में ही उपचार ले रहे हैं. घटना की जानकारी मिलने के बाद आज सुबह से सीएमएचो डॉ माधव हसानी के निर्देश पर स्वस्थ विभाग का अमला मौके पर मौजूद हैं. 

वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा भी देर रात महू पहुंचे हैं.  उन्होंने महू कैंट बोर्ड को भी पानी की जांच करने एवं स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए. वर्मा ने कहा कि 'अस्पताल में मरीजों का उपचार जारी है, शासन लगातार नजर बनाए हुए है. शनिवार सुबह से क्षेत्र में सर्वे भी शुरू किया जाएगा जिन लोगों में किसी तरह के भी लक्षण पाए जाएंगे उन्हें घर पर भी उपचार दिया जाएगा. गंभीर मरीजों को अस्पताल में उपचार किया जाएगा. फिलहाल कोई भी गंभीर स्थिति में नहीं है. भर्ती मरीजों में भी कुछ लोगों को कल डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.' लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.  

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बता दें कि पहले सामने आए  भागीरथपुरा के मामले में अधिकारियों की मानें तो 51 ट्यूबवेल में दूषित पानी पाया गया था और टेस्ट रिपोर्ट में ई कोलाई बैक्टीरिया होने का पता चला. यह प्रदूषण एक शौचालय के सीवेज के पाइप वाले पीने के पानी में मिलने से हुआ था. भागीरथपुरा के निवासियों ने दावा किया कि पिछले महीने इलाके में उल्टी और दस्त फैलने से अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है.
 
 

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