मध्य प्रदेश के धार जिले में एक किसान का अनोखा विरोध देखने को मिला. ग्राम चंदवाडा के किसान विजय पाटीदार अपने परिजनों के साथ आईडीएफसी बैंक पहुंचे और बैंक में ढोल पर डांस करने लगे. इस नजारे को देखकर बैंक में मौजूद लोग हैरान रहे गए.
विजय पाटीदार ने बताया कि उन्होंने बैंक से 13 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड लिया था. उन्होंने करीब एक महीने पहले ही पूरा लोन चुका दिया था. इसके बावजूद बैंक उन्हें एनओसी नहीं दे रहा था. वह पिछले डेढ़ महीने से बैंक में लगातार चक्कर लगा रहे थे, लेकिन हर बार उन्हें नई तारीख दी जा रही थी.
किसान ने कहा कि बैंक की लगातार तारीख बढ़ाने की प्रक्रिया से वे काफी परेशान हो गए थे. उन्होंने अपने परिवार के साथ ढोल लेकर बैंक का रुख किया. उनका मकसद था कि बैंक उनकी समस्या को गंभीरता से सुने और जल्द से जल्द एनओसी जारी करे.
लोन चुकाने पर भी नहीं मिली एनओसी
बैंक पहुंचते ही विजय पाटीदार और उनके परिजन ढोल की थाप पर डांस करने लगे. बैंक में मौजूद कर्मचारी और अन्य लोग इस दृश्य को देखकर चौंक गए. कई लोग वीडियो भी बनाने लगे. बैंक में ढोल की आवाज और डांस का नजारा काफी अजीब था. जिससे वहां का माहौल पूरी तरह बदल गया.
इस घटना के बाद बैंक मैनेजर ने किसान को आश्वासन दिया कि जल्द ही एनओसी प्रदान की जाएगी. इसके बाद विजय पाटीदार और उनके परिजन बैंक से शांतिपूर्ण तरीके से रवाना हुए. किसान विजय पाटीदार ने कहा कि वे पिछले डेढ़ महीने से लगातार एनओसी के लिए बैंक में आवेदन कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी. उन्होंने कहा कि बैंक को जगाने के लिए उन्होंने ढोल का सहारा लिया. यदि जल्द एनओसी नहीं दी गई, तो वे बैंक के सामने धरना प्रदर्शन भी करने को तैयार हैं.
इस मामले में बैंक की ओर से कोई जिम्मेदार शख्स सामने नहीं आया. बैंक की इस लापरवाही के कारण किसान को असामान्य कदम उठाना पड़ा. विजय पाटीदार के ढोल और नृत्य ने बैंक प्रशासन को जगा दिया और अंततः समस्या का समाधान हो सका.
किसान के डांस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
किसान का यह विरोध न सिर्फ अनोखा था बल्कि इसे देखकर अन्य लोग भी हैरान रह गए. यह घटना दर्शाती है कि आम नागरिकों के अधिकारों की अनदेखी कितनी परेशानियाँ पैदा कर सकती है. विजय पाटीदार का कहना है कि यदि बैंक प्रशासन ने जल्द एनओसी नहीं दी, तो वे और भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे. यह मामला धार जिले में किसानों और बैंक प्रशासन के बीच बढ़ते विवाद का उदाहरण बन गया है.
छोटू शास्त्री