मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. सनावद थाना क्षेत्र में रहने वाले 80 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर शशिकांत कुलकर्णी को फर्जी कॉल और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए दो दिन तक मानसिक दबाव में रखा गया और उनसे 10 लाख रुपये आरटीजीएस करवा लिए गए.
ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियों से जुड़ा बताया और आतंकवादी संगठन से जुड़े लेनदेन का डर दिखाया.
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आतंकवाद के नाम पर डराने की साजिश
घटना 10 और 11 जनवरी की है, जब प्रोफेसर कुलकर्णी को व्हाट्सएप के जरिए एक कॉल आया. कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम अमर सिंह बताया और कहा कि उनके खाते में आतंकवादी संगठन के अकाउंट से करीब 7 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए हैं. ठग ने दावा किया कि दिल्ली में कुछ आतंकवादी पकड़े गए हैं और पूछताछ में कुलकर्णी का नाम सामने आया है. इसी आधार पर उन्हें दिल्ली आने को कहा गया.
बुजुर्ग होने के कारण दिल्ली न जा पाने की बात कहने पर ठगों ने मामला सेटल करने के लिए 10 लाख रुपये आरटीजीएस करने का दबाव बनाया. उन्हें लगातार फोन काटने से मना किया गया और कहा गया कि वे डिजिटल अरेस्ट में हैं.
दो दिन तक मानसिक कैद, बेटे को भी नहीं बताया
ठगों की धमकी भरी भाषा से घबराकर प्रोफेसर कुलकर्णी ने दो दिन तक किसी को भी इस बारे में नहीं बताया. उन्होंने 12 जनवरी को बताए गए अकाउंट में 10 लाख रुपये आरटीजीएस कर दिए. इसके बाद भी आरोपी और पैसे की मांग करते रहे और कहा कि उनके बैंक खाते में ग्रेच्युटी और पीएफ मिलाकर 50-60 लाख रुपये हैं.
प्रोफेसर ने बताया कि ठगों ने कहा था कि अभी 10 लाख दे दो, बाकी रकम बाद में दे देना नहीं तो खाता फ्रीज कर दिया जाएगा और गिरफ्तारी होगी.
सच्चाई सामने आने पर पुलिस में शिकायत
घटना की जानकारी जब प्रोफेसर के बेटे को मिली तो उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी. इसके बाद साइबर सेल और संबंधित विभागों से संपर्क कर जांच की गई. जांच में सामने आया कि दिल्ली पुलिस में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं है, न ही किसी आतंकवादी की गिरफ्तारी हुई है और न ही शशिकांत कुलकर्णी नाम से कोई आरोपी है.
एडिशनल एसपी शकुंतला रुहल ने बताया कि यह एक वरिष्ठ नागरिक के साथ की गई साइबर ठगी का मामला है. पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.
साइबर सेल कर रही जांच
पीड़ित प्रोफेसर ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर आरोपी का नंबर ब्लॉक नहीं किया है ताकि पुलिस की जांच में मदद मिल सके. फिलहाल साइबर सेल में 10 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कर ली गई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
उमेश रेवलिया