'आजतक' की खबर का असर: झाबुआ मनरेगा घोटाले में बैठी जांच, मर चुके लोगों के नाम पर निकाली थी रकम

MP News: झाबुआ में मनरेगा के कामों में फर्जी मस्टर के जरिए करोड़ों का भ्रष्टाचार किया गया, क्योंकि कहीं मृतकों के नाम पर फर्जी आहरण हुए तो कहीं उन लोगों के नाम पर राशि हजम कर ली गई, जिन्होंने कभी काम ही नहीं किया था.

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झाबुआ में 2017 में मरे सकरिया ने 2020 में खोदा तालाब!(File Photo) झाबुआ में 2017 में मरे सकरिया ने 2020 में खोदा तालाब!(File Photo)

रवीश पाल सिंह / चंद्रभान सिंह भदौरिया

  • झाबुआ ,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:13 AM IST

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में मनरेगा के तहत करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला अब तूल पकड़ चुका है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब लोकायुक्त पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं. उधर,  जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जांच दल गठित कर दिया है.

दरअसल, मनरेगा लगातार सुर्खियों में है. योजना का नाम बदलने से लेकर ऑडिट रिपोर्ट में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट आने से हल्ला मचा हुआ है. MP के झाबुआ जिले में ही मनरेगा का 2020 में हुए भ्रष्टाचार के दोषी अधिकारियों पर कई शिकायतों के बाद भी जब कारवाई नहीं हुई तब मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया. हाइकोर्ट की इंदौर बेंच ने लोकायुक्त पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं. 

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घोटाले की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर रानापुर ब्लॉक के थुवादरा गांव से सामने आई. मृतक सकरिया के बेटे लालू डामोर ने अपने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाते हुए बताया कि उनके पिता की मौत 2017 में हो गई थी. इनका आरोप है कि गांव में साल 2020 में मनरेगा के तहत करोड़ों रुपए का तालाब बनाया गया था. 

लालू ने बताया कि इस काम में उनके पिता का जॉब कार्ड नंबर (MP 21 012 032 001 139) का इस्तेमाल किया गया, जबकि उनके पिता की मौत तो 2017 में ही हो चुकी थी, तब वह काम कैसे कर सकते थे? अब लालू अपने पिता के नाम से हुए फर्जीवाड़े की जांच चाहते हैं. 

मई से जुलाई 2020 के बीच सकरिया के नाम पर तीन अलग-अलग किस्तों में राशि का आहरण किया गया, जबकि वह तीन साल पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे. सिर्फ मृतकों के नाम पर ही नहीं, बल्कि जीवित मजदूरों के साथ भी धोखा हुआ है.

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आदिवासी मजदूर तरूबाई ने बताया कि उन्होंने कभी तालाब निर्माण में काम नहीं किया, लेकिन उनके नाम का उपयोग कर बिजियाडूंगरी गांव में राशि निकाल ली गई. ऐसे दर्जनों आदिवासी मजदूर हैं जिन्हें पता ही नहीं कि उनके नाम पर सरकार का पैसा कौन डकार गया.

हाईकोर्ट का कड़ा रुख
झाबुआ जिले के 4 विकासखंडों में मनरेगा में करोड़ों का भ्रष्टाचार होने का दावा कर आदिवासियों के हक़ की लड़ाई लड़ रहे आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष मथियास भूरिया का आरोप है कि वह जिला प्रशासन और शासन से शिकायत करते करते थक गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. मजबूर होकर वह हाईकोर्ट पहुंचे और हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर अधिकारियों को जांच करने को‌ कहा. लेकिन अफसरों ने फिर गोलमोल जांच कर दी. इस पर मथियास तथ्यों को लेकर फिर हाईकोर्ट पहुंचे और अब हाईकोर्ट ने लोकायुक्त पुलिस को जांच के आदेश दिए हैं. 

जिला पंचायत ने किया जांच दल का गठन
'आजतक' पर खबर प्रसारित होने के बाद झाबुआ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने तुरंत एक विशेष जांच दल का गठन किया है. यह दल उन सभी पंचायतों का रिकॉर्ड खंगालेगा जहां 2020 के दौरान फर्जी मस्टर रोल के जरिए करोड़ों के आहरण की बात सामने आई है. 

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