करोड़ों की संपत्ति खून के रिश्तों पर भारी पड़ गई. मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक बुजुर्ग महिला डॉक्टर के साथ जो हुआ, उसने मानवता को कठघरे में खड़ा कर दिया है. जीवन भर लोगों की जान बचाने वाली 81 वर्षीय डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव को उनके ही घर से बेहद खराब हालत में रेस्क्यू किया गया. डॉक्टर हेमलता का आरोप है कि उन्हें खाना तो दूर, पीने के लिए दिन भर में सिर्फ तीन चम्मच पानी दिया जाता था. आशंका जताई जा रही है कि उन्हें भूखा प्यासा रखकर मार डालने की साजिश रची गई ताकि उनकी बेशकीमती संपत्ति पर कब्जा किया जा सके.
डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव जबलपुर की जानी मानी महिला डॉक्टर हैं. उनके इकलौते बेटे की पहले ही मौत हो चुकी है और उनके पति का निधन बीती 6 दिसंबर को हुआ था. इसके बाद वह जबलपुर के पॉश इलाके राइट टाउन स्थित अपनी करोड़ों रुपये की संपत्ति में अकेली रह गई थीं. जानकारी के मुताबिक 9 नवंबर को उन्होंने मेडिकल एजुकेशन से जुड़ी एक कॉन्फ्रेंस भी अटेंड की थी और उस समय वह पूरी तरह स्वस्थ थीं.
भूखा रखकर मौत की तरफ धकेली गईं बुजुर्ग डॉक्टर
26 जनवरी को आईएमए जबलपुर की अध्यक्ष और उनकी जूनियर डॉक्टर रिचा शर्मा को सूचना मिली कि डॉक्टर हेमलता की हालत बेहद खराब है और वह जिंदा लाश जैसी हो गई हैं. इसी दौरान राजस्थान से आई उनकी बहन डॉक्टर कनकलता मिश्रा और गायत्री परिवार ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग उन्हें कहीं ले जाने की कोशिश कर रहे थे. पड़ोसियों ने जब उन्हें रोका तो उनके साथ बहस हुई. पुलिस शिकायत के बाद रात में उन्हें वापस घर छोड़ दिया गया.
यह भी सामने आया कि गंभीर हालत में होने के बावजूद डॉक्टर हेमलता को अस्पताल से यह कहकर डिस्चार्ज करवा लिया गया था कि अब वह अपने घर पर ही शांति से मौत को अपना लेंगी. जब आईएमए के डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की तो उनके साथ भी हुज्जत की गई. डॉक्टर कनकलता द्वारा अपनी बहन के घर पर ही मरने की बात कहे जाने से मामला और गंभीर हो गया.
जीवन भर जान बचाने वाली डॉक्टर को मौत के भरोसे छोड़ा
जांच में यह भी पता चला कि डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की बेशकीमती संपत्ति को लेकर कई दानपत्र पहले ही लिखे जा चुके हैं. इनमें कुछ नाम पड़ोसी डॉक्टरों के हैं और कुछ दानपत्र गायत्री परिवार ट्रस्ट के नाम पर बताए जा रहे हैं. आईएमए अध्यक्ष डॉक्टर रिचा शर्मा ने प्रशासन की मदद लेकर डॉक्टर हेमलता को जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां उनकी हालत में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.
पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की
आईएमए ने राइट टू लिव का हवाला देते हुए बुजुर्ग महिला डॉक्टर की जान बचाने की बात कही है. आईएमए पदाधिकारियों ने आशंका जताई है कि यह सुनियोजित साजिश हो सकती है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए. दूसरी तरफ कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने पांच डॉक्टरों की टीम की निगरानी में इलाज कराने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बुजुर्ग महिला डॉक्टर की संपत्ति हड़पने की साजिश की भी जांच कराने और मामले में वैधानिक कार्रवाई करने की बात कही है. पुलिस प्रशासन भी पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है.
धीरज शाह