मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में ऐसे कपड़े तैयार किए जाते हैं जो आपको कई तरह की बीमारियों से दूर रख सकते हैं. यह कपड़े औषधि तत्वों से युक्त होते हैं और खादी वस्त्रों में औषधि पदार्थ मिलाकर तैयार किए जाते हैं, जिन्हें पहनने के बाद कई तरह की बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से जबलपुर के दयोदय आश्रम में प्रतिभास्थली के 'चल चरखा महिला प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र' की बहनें इन औषधि तत्वों युक्त कपड़ों को तैयार करती हैं. जिनकी मांग अब पूरे देश में की जा रही है.
प्रतिभास्थली में खादी के सामान्य कपड़ों को औषधि के रंगों से रंगा जाता है. जैसे- रंग प्राकृतिक रूप से यानी हल्दी, मेहंदी अनार, टेसू के फूल, नीम समेत अन्य प्राकृतिक फलों और पुष्पों से तैयार किए जाते हैं, जो इतने पक्के होते हैं कि जल्दी खराब नहीं होते. खादी से बने कपड़ों को मजबूती देने के लिए चावल का माड़ और इमली के बीज का माड़ उपयोग किया जाता है. इन कपड़ों को पहनने से हमेशा तरोताजा महसूस करेंगे और प्राकृतिक रंगों से रंगे होने की वजह से पसीने और प्रदूषण से होने वाले त्वचा रोगों से भी बचाव करते हैं, क्योंकि यह कपड़े शरीर में आने वाले विषाक्त पदार्थ (टॉक्सिन्स) को अवशोषित कर लेते हैं.
प्रतिभास्थल की एक सदस्य का कहना है कि देश को केवल आत्मनिर्भर ही नहीं बनाना है, बल्कि लोगों को स्वदेशी के लिए प्रेरित भी करना है, इसलिए प्रतिभास्थली में हथकरघा के जरिए कपड़ों को तैयार किया जाता है. इस कारखाने में सैकड़ों महिलाओं को रोजगार भी दिया है. यहां महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाता है जो बाहर जाकर आसानी से काम कर सकती हैं. प्रतिभा स्थल पर तैयार किए गए औषधियुक्त कपड़ों की डिमांड पूरे देश में हो रही है.
सबसे खास बात यह है कि जो लोग इन कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं, उन्होंने फर्क भी महसूस किया है. बहुत सारे ऐसे मामले आए हैं जिनमें ग्राहकों ने बताया कि लोगों को कैसे त्वचा रोगी रोगों से मुक्ति मिली है.
इस प्रतिभास्थली में पढ़ने वाली बच्चियों को भी 8वीं क्लास से ही प्रशिक्षण दिया जाता है. प्रतिभास्थली के हथकरखा में छात्राओं को हैंडलूम से संबंधित शिक्षा दी जाती है और उन्हें हथकरघा में प्रशिक्षण दिया जाता है. 12वीं क्लास आते आते छात्राएं साड़ी बनाना तक सीख जाती हैं. छात्राओं का कहना है कि अगर शिक्षा के साथ-साथ श्रम करने की भी शिक्षा मिले तो आत्मनिर्भर बनना बहुत आसान हो जाता है. यह प्रशिक्षण उनके जीवन में निश्चित तौर पर काम आएगा.
धीरज शाह