'घर के दो लोग केबिन में रह गए और मर गए', जबलपुर क्रूज हादसे में विकास सोनी की आपबीती

जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसे ने कई जिंदगियां छीन लीं. तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच क्रूज पलट गया. 23 लोग बचाए गए, 9 की मौत हो चुकी है, जबकि कई लापता हैं. हादसे में बचे लोगों की आपबीती ने दिल दहला दिया है और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े किए हैं.

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क्रूज हादसे में विकास सोनी की आपबीती (Photo: itg) क्रूज हादसे में विकास सोनी की आपबीती (Photo: itg)

पुनीत कपूर

  • जबलपुर,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST

मध्यप्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में हुए इस दर्दनाक क्रूज हादसे ने झकझोर दिया है. यहां नर्मदा नदी के बैकवाटर में पर्यटकों से भरा एक क्रूज अचानक डूब गया. बरगी डैम में क्रूज पर सवार लोगों को क्या पता था कि कुछ ही मिनटों में उनका सैर-सपाटे का सफर जिंदगी और मौत की जंग में बदल जाएगा.  जानकारी के अनुसार, जैसे ही क्रूज गहरे पानी वाले इलाके में पहुंचा, अचानक मौसम खराब हो गया और तेज हवाएं चलने लगीं. ऊंची लहरों और तेज हवा के दबाव से क्रूज का संतुलन बिगड़ गया और वह कुछ ही पलों में पानी में समा गया.

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'क्रूज उल्टी- पल्टी हो रही थी'

घटना के तुरंत बाद लोकल बोट वालों और प्रशासन ने मिलकर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया. अब तक लगभग 23 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बचाव दल ने कल से अब तक 9 शव बरामद किए हैं. कुछ लोगों के अभी भी लापता होने की आशंका बनी हुई है. इस बीच, बचाए गए लोगों के बेहद मार्मिक बयान भी सामने आ रहे हैं. इसी क्रम में रेस्क्यू किए गए विकास सोनी ने अपनी आपबीती साझा की.

विकास ने बताया कि शाम 5:30-5:45 की बात है आंधी तूफान रहा था , बहुत तेज़ लहेरें चली. लहर की वजह से क्रूज में पानी भरा और पलट गया. मैंने पहले ही कहा- नाव के अंदर पानी आ रहा है, क्रूज उल्टी- पल्टी हो रही थी , मैं आकर गेट के पास खड़ा हो गया. मैंने अपने साथ के सबको लाइफ जैकेट पहनवायी और ऊपर लेकर जाने लगा.

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'हम 7 लोग थे 5 ठीक हैं , दो डेथ हो गई है'

उन्होंने कहा- मेरे परिवार के कुल 7 लोग थे जिनमें ले दो नहीं पहुंच पाए और केबिन के अंदर ही रह गए. उनकी मृत्यु हो गई. हम लोग घाट पर आए तब वहां के लोगों ने पकड़कर हमको बाहर निकाला. हमारे परिवार के 7 लोग थे 5 ठीक हैं , दो डेथ हो गई है.

बता दें कि ऐसे हादसों में पानी में डूबने से होने वाली मौतें अक्सर तैरना न आने की वजह से नहीं, बल्कि घबराहट, थकान और तेज बहाव के कारण होती हैं. लाइफ जैकेट शरीर को पानी की सतह पर बनाए रखने में मदद करती है. विशेषज्ञों का कहना है कि हादसे के शुरुआती पांच मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. यदि उस समय व्यक्ति ने लाइफ जैकेट पहनी हो, तो उसके बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है. बरगी डैम हादसे में कई लोग ऐसे थे जिन्हें तैरना नहीं आता था, साथ ही क्रूज पर बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे. ऐसे में लाइफ जैकेट उनके लिए सबसे अहम सुरक्षा कवच साबित हो सकती थी.
 

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