श्वेता-अलका की जोड़ी निकली खतरनाक! हनीट्रैप गैंग ने कारोबारियों को बनाया ATM

इंदौर में हनीट्रैप गैंग का बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस के मुताबिक जेल में हुई श्वेता और अलका की दोस्ती बाहर आकर संगठित ब्लैकमेल नेटवर्क में बदल गई. दोनों सोशल मीडिया और वीडियो कॉल के जरिए कारोबारियों व रसूखदार लोगों को जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करती थीं. कई पीड़ित बदनामी के डर से सामने नहीं आए. पुलिस मोबाइल डेटा, बैंक लेनदेन और कॉल डिटेल्स खंगाल रही है.

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जेल में हुई थी श्वेता-अलका की दोस्ती.(Photo: Dharmendra Kumar Sharma/ITG) जेल में हुई थी श्वेता-अलका की दोस्ती.(Photo: Dharmendra Kumar Sharma/ITG)

धर्मेंद्र कुमार शर्मा

  • इंदौर,
  • 23 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:44 PM IST

मध्य प्रदेश के इंदौर में हनीट्रैप मामले में नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. पुलिस जांच में पता चला है कि जेल में हुई दो महिलाओं श्वेता और अलका की दोस्ती बाहर आने के बाद एक संगठित हनीट्रैप गैंग में बदल गई. दोनों महिलाओं ने मिलकर कारोबारियों, संपन्न लोगों और राजनीतिक संपर्क रखने वाले व्यक्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है.

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जानकारी के अनुसार, श्वेता और अलका अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार होकर जेल पहुंची थीं. वहीं दोनों की पहली मुलाकात हुई और बाहर आने के बाद उन्होंने मिलकर एक संगठित नेटवर्क तैयार कर लिया. पुलिस के मुताबिक दोनों सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और कॉलिंग के जरिए अपने टारगेट चुनती थीं. पहले दोस्ती बढ़ाई जाती थी, फिर वीडियो कॉल और निजी मुलाकातों के जरिए संवेदनशील कंटेंट तैयार किया जाता था.

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इसके बाद इसी कंटेंट के आधार पर लोगों को ब्लैकमेल किया जाता था. पुलिस जांच में सामने आया है कि कई पीड़ितों से लाखों रुपए की मांग की गई, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से अधिकांश लोग सामने नहीं आए. इसी वजह से यह गैंग लंबे समय तक सक्रिय रहा और कई लोगों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करता रहा.

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हाई-प्रोफाइल संपर्कों की लिस्ट मिलने का दावा

सूत्रों के मुताबिक गैंग के पास हाई-प्रोफाइल संपर्कों की एक सूची भी मिली है, जिसका इस्तेमाल नए टारगेट चुनने में किया जाता था. पुलिस अब दोनों महिलाओं के कॉल डिटेल्स, बैंक लेनदेन और सोशल मीडिया चैट्स की गहराई से जांच कर रही है. जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई हैं.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस दोनों महिलाओं के मोबाइल से मिले डेटा के आधार पर अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि कई आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिए थे, जिसके चलते डिजिटल साक्ष्य जुटाने में पुलिस को कठिनाई आ रही है.

जांच एजेंसियां भी सक्रिय, पुलिस ने पीड़ितों से की अपील

डीसीपी त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल पुलिस श्वेता और अलका से जब्त मोबाइल डेटा रिकवर करने की कोशिश कर रही है. मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों में से अधिकांश ने अपने मोबाइल डिवाइस का डेटा मिटा दिया था. इसके बावजूद पुलिस तकनीकी जांच के जरिए सबूत जुटाने में लगी हुई है.

हालांकि डीसीपी ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और रसूखदार लोगों को हनीट्रैप में फंसाए जाने से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए देश की विभिन्न जांच एजेंसियों ने भी संज्ञान लिया है और अपने स्तर पर जांच की जा सकती है. पुलिस ने संभावित पीड़ितों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके.

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