Indore Fire Pregnant Woman Death: मध्य प्रदेश के मिनी मुंबई इंदौर के ब्रजेश्वरी एनेक्स का वह तीन मंजिला मकान, जो कुछ घंटों पहले तक खिलौनों, नए कपड़ों और आने वाले नन्हे मेहमान की तैयारियों से चहक रहा था, आज वह सिर्फ राख के ढेर और चीखों का गवाह बनकर खड़ा है. कारोबारी मनोज पुगालिया के घर में जश्न का माहौल था. उनकी बड़ी बहू सिमरन 8 महीने की गर्भवती थी. उधर, घर में एक कार्यक्रम के सिलसिले में कुछ मेहमान भी आए हुए थे. पूरा परिवार चहक रहा था. दादा-दादी बनने की खुशी में मनोज पुगालिया और उनकी पत्नी सुनहरे सपने बुन रहे थे.
लेकिन बुधवार की उस मनहूस रात का किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस आधुनिकता और EV और डिजिटल लॉक्स को वे अपनी सुविधा और सुरक्षा समझ रहे थे, वही एक रात उनके लिए 'मौत का जाल' बन जाएगी.
काल बनकर आई वो रात
मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात, जब पूरा परिवार चैन की नींद सो रहा था, दावा है कि घर के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी थी. रात करीब 3:30 से 4:30 बजे के बीच चार्जिंग स्लॉट में एक जोरदार स्पार्क हुआ. शॉर्ट सर्किट से उठी एक छोटी-सी चिंगारी ने पहले कार को घेरा और फिर धधकती आग की लपटें सीधे ऊपर की मंजिलों तक जा पहुंचीं.
धमाकों से दहल उठा मोहल्ला
देखते ही देखते मंजर भयावह हो गया. किचन में रखे गैस सिलेंडर्स और नीचे के फ्लोर पर रखे कुछ ज्वलनशील पदार्थ एक-एक कर फटने लगे.
आग इतनी भीषण थी कि एसी (AC) के कंप्रेसर में भी ब्लास्ट हुआ. धमाके इतने तेज थे कि पड़ोसियों की दीवारों में दरारें आ गईं. पुगालिया परिवार के घर में बिहार से कुछ रिश्तेदार भी इलाज के लिए आए हुए थे, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल थे.
मनोज पुगलिया के छोटे बेटे हर्षित ने मीडिया को बताया कि मामा विजय सेठिया (65) इंदौर में रहकर कैंसर का इलाज करवा रहे थे. मामी सुमन भी उनके साथ रुकी थीं और मामा जी की छोटी बेटी रुचिका बिहार से अपने बच्चों राशि (12) और तन्मय (8) के साथ मंगलवार रात को ही आई थीं.
डिजिटल लॉक ने छीना बचने का रास्ता
इस त्रासदी की सबसे मार्मिक और डरावनी बात यह रही कि परिवार ने सुरक्षा के लिए घर में जो डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक ताले लगाए थे, वे ही उनकी मौत का कारण बन गए. शॉर्ट सर्किट होते ही घर की बिजली गुल हो गई और वे आधुनिक ताले जाम हो गए. यही नहीं, ऊपर का गेट भी बंद था, इसलिए आग से भागे सदस्य छत पर भी नहीं जा पाए. 3 शव सीढ़ियों पर मिले.
अंदर फंसे लोग दरवाजों को पीटते रहे, चीखते रहे, लेकिन दरवाजे टस से मस नहीं हुए. पड़ोसियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सीढ़ियां और मेज लगाई और किसी तरह मनोज पुगालिया की पत्नी और उनके तीन बेटों को बाहर खींच लिया.
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. 8 महीने की गर्भवती सिमरन, मनोज पुगालिया, बिहार से आए मेहमान और दो मासूम बच्चे (8 और 12 साल) उस आग की लपटों और जहरीले धुएं के बीच ही रह गए.
अजन्मे बच्चे के साथ थम गई सिमरन की सांसें
हादसे में सबसे ज्यादा पीड़ा उस अजन्मे बच्चे के लिए है, जिसने अभी दुनिया की रोशनी तक नहीं देखी थी. सिमरन और उसके कोख में पल रहे नन्हे मेहमान की इस आग में मृत्यु हो गई. सिमरन के पति का रो-रोकर बुरा हाल है, जिसे ढांढस बंधाने वाले पड़ोसियों की आंखें भी नम हैं. जो घर कुछ दिनों बाद 'नन्हे मेहमान' के आने की पार्टी करने वाला था, मगर उसी घर से एक साथ अर्थियां निकाली गईं.
हादसे में इनकी हुई मौत:-
मनोज पुगलिया (65)
सिमरन पुगलिया (30) - (गर्भवती बहू)
विजय सेठिया (65)
सुमन सेठिया (60)
कार्तिक सेठिया (22)
रुचिका जैन (35)
राशि जैन (12)
तन्मय जैन (6)
जांच और मुआवजे का ऐलान
इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये व घायलों को 50000 रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर सीनियर आईएएस अधिकारी अनुपम राजन और आईपीएस आदर्श कटिहार इंदौर पहुँच चुके हैं. फॉरेंसिक टीम और विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि आखिर चार्जिंग के दौरान यह ब्लास्ट कैसे हुआ?
गंभीर सवाल: तकनीक या खतरा?
यह हादसा कई गंभीर सवाल छोड़ गया है. बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों के बीच सरकारें EV को प्रमोट कर रही हैं, लेकिन क्या इनके चार्जिंग मानक सुरक्षित हैं? और क्या हम अपनी सुरक्षा के लिए जिन 'डिजिटल लॉक्स' पर भरोसा कर रहे हैं, वे आपातकाल में हमारे लिए 'डेथ ट्रैप' तो नहीं बन रहे? इंदौर में यह दूसरी ऐसी घटना है जहां डिजिटल लॉक की वजह से परिवार अपनी जान नहीं बचा पाया.
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आज पुगालिया परिवार का वो उजड़ा हुआ घर एक खामोश चीख है, जो हमें आधुनिकता की अंधी दौड़ में सुरक्षा के बुनियादी पहलुओं को न भूलने की चेतावनी दे रहा है.
धर्मेंद्र कुमार शर्मा