देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से निपटने में जुटे स्वास्थ्य विभाग को डायरिया के 5 नए मरीज मिले.
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि 29 दिसंबर से अब तक कुल 436 मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए. 403 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है. फिलहाल 33 मरीज उपचाराधीन हैं, जिनमें से 8 मरीजों की हालत गंभीर है और वे ICU में भर्ती हैं. मंगलवार को भी ओपीडी में 5 नए मरीज सामने आए हैं, जो दर्शाता है कि संक्रमण अभी पूरी तरह थमा नहीं है.
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम की पाइपलाइनों में सीवेज का पानी मिलने से यह संक्रमण फैला. 6 महीने के मासूम से लेकर बुजुर्गों तक, इस लापरवाही ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है.
कलेक्टर शिवम वर्मा को एमजीएम मेडिकल कॉलेज की कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी दी है. इसके अनुसार, ऑडिट किए गए 21 मामलों में से 15 मौतों का संबंध उल्टी-दस्त और दूषित पानी से पाया गया है. कमेटी कुछ मामलों में मौत के सटीक कारण तक नहीं पहुंच पाई है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कुछ मौतें अन्य बीमारियों से भी हुई हैं. हालांकि वर्मा ने हालांकि इस रिपोर्ट के बारे में विशिष्ट जानकारी नहीं दी.
बता दें कि प्रशासन ने अब तक प्रभावित 18 परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है. जबकि तीन अन्य परिवारों को यह मदद मुहैया कराई जा रही है.
कलेक्टर ने कहा कि भागीरथपुरा में हुईं सभी मौतें बहुत दु:खद हैं, चाहे वे किसी भी कारण से हुई हों. हम पीड़ित परिवारों को सांत्वना देते हुए उन्हें सहायता राशि प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने आश्वासन दिया है कि मौतों के कारणों का विस्तृत विश्लेषण कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के कड़े उपाय किए जाएंगे.
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