शादी के 28 दिन बाद खुलासा, पत्नी निकली 2 महीने की प्रेग्नेंट, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देख उड़े पति के होश

शादी के ठीक एक महीने बाद जब एक पति अपनी पत्नी को इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले गया, तो जो सच सामने आया उसने उसके पैरों तले जमीन खिसका दी. पति का आरोप है कि उसकी पत्नी शादी से पहले ही गर्भवती थी और बाद में मायके वालों ने मिलकर गर्भपात करा दिया.

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शादी से पहले प्रेग्नेंसी छुपाने और चोरी-छिपे गर्भपात कराने का मामला.(File Photo:ITG) शादी से पहले प्रेग्नेंसी छुपाने और चोरी-छिपे गर्भपात कराने का मामला.(File Photo:ITG)

सर्वेश पुरोहित

  • ग्वालियर,
  • 31 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

MP News: ग्वालियर में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि शादी से पहले ही पत्नी गर्भवती थी और इस बात को छिपाया गया. बाद में ससुराल पक्ष की सहमति से भ्रूण हत्या कराई गई. अब कोर्ट ने इस पूरे मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट को सभी दस्तावेजों और कथनों के आधार पर नए सिरे से विचार करने के आदेश दिए हैं.
 
यह मामला ग्वालियर जिले से जुड़ा है, जहां पति विशाल माहौर ने पत्नी और उसके मायके पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत के मुताबिक, विवाह के समय पत्नी पहले से गर्भवती थी, लेकिन यह बात जानबूझकर छिपाई गई.

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शादी के लगभग एक महीने बाद पत्नी की तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया. अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में सामने आया कि पत्नी दो माह से अधिक की गर्भवती थी.

आरोप है कि इस खुलासे के बाद पत्नी अपने मायके चली गई, जहां माता-पिता और अन्य परिजनों के साथ मिलकर एक निजी अस्पताल में गर्भपात कराया गया. पति का कहना है कि यह भ्रूण हत्या का स्पष्ट मामला है और इसमें सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

यह भी पढ़ें: सुहागरात में दिखे पत्नी के पेट पर टांके, RTI लगाई तो पता चला शादी से पहले कराया था गर्भपात

पहले इस मामले की शिकायत झांसी निवासी युवक ने जनकगंज थाने में दी थी, लेकिन केस दर्ज नहीं किया गया. इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन पेश किया गया, जिसे 20 नवंबर 2025 को खारिज कर दिया गया था.

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हालांकि, अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की गई, जहां अदालत ने माना कि मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और कथनों की दोबारा समीक्षा जरूरी है. कोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए हैं कि वे समस्त रिकॉर्ड के आधार पर नए सिरे से विचार कर कारणयुक्त आदेश पारित करें.

फिलहाल इस मामले में निचली अदालत में दोबारा सुनवाई होगी. यह मामला न सिर्फ कानून बल्कि सामाजिक और नैतिक सवाल भी खड़े करता है. अब देखना होगा कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है.

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