प्लेन हादसे से पहले पायलट शांभवी का दादी को आखिरी मैसेज, 'चीनी' कभी यूं नहीं करती थी बात

महाराष्ट्र में हुए चार्टर प्लेन क्रैश में ग्वालियर की बेटी और युवा पायलट शांभवी पाठक की मौत हो गई. हादसे से पहले सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर शांभवी का आखिरी मैसेज गुड मॉर्निंग आया था. शांभवी अजित पवार के साथ उड़ान पर थीं. परिवार और ग्वालियर शहर में शोक की लहर है.

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पायलट शांभवी पाठक (File Photo: ITG) पायलट शांभवी पाठक (File Photo: ITG)

सर्वेश पुरोहित

  • ग्वालियर ,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:12 PM IST

महाराष्ट्र में हुए चार्टर प्लेन क्रैश मामले में ग्वालियर का गहरा जुड़ाव सामने आया है. इस विमान को उड़ा रही थीं ग्वालियर की बेटी और युवा पायलट शांभवी पाठक. हादसे में शांभवी का निधन हो गया, जिससे पूरे परिवार के साथ साथ ग्वालियर शहर में शोक की लहर फैल गई है. शांभवी पाठक वीआईपी चार्टर प्लेन की पायलट थीं और इसी उड़ान में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी सवार थे. इस हादसे के बाद जब शांभवी की पहचान सामने आई तो ग्वालियर में हर कोई स्तब्ध रह गया.

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शांभवी के माता पिता वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं. उनके पिता विक्रम पाठक इंडियन एयर फोर्स में रह चुके हैं. माता का नाम रौली पाठक है. शांभवी का एक छोटा भाई भी है. परिवार की जड़ें ग्वालियर से जुड़ी हैं और शांभवी की प्रारंभिक शिक्षा भी ग्वालियर में ही हुई थी. फिलहाल ग्वालियर के वसंत विहार डी 61 में उनकी दादी मीरा पाठक रहती हैं.

प्लेन क्रैश पायलट शांभवी की मौत 

दादी मीरा पाठक के अनुसार हादसे से पहले सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर शांभवी का आखिरी मैसेज आया था, जिसमें उसने सिर्फ गुड मॉर्निंग लिखा था. इसके बाद परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो सका. कुछ समय बाद विवेक पाठक ने फोन कर अपनी मां मीरा पाठक को भतीजी शांभवी के दुखद निधन की सूचना दी. यह खबर सुनते ही दादी का रो रोकर बुरा हाल हो गया. शांभवी दादी को कभी ऐसे मैसेज नहीं करती थी. 

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परिवार के अनुसार शांभवी पढ़ाई में बेहद होनहार थीं. पहले उनका चयन इंजीनियरिंग में हुआ था और वह इंजीनियर बनना चाहती थीं. लेकिन इंजीनियरिंग में मन नहीं लगा तो उन्होंने पायलट बनने का फैसला किया. अपनी मेहनत और लगन के दम पर वह वीआईपी चार्टर फ्लाइट की पायलट बनीं.

घर में शांभवी को प्यार से चीनी कहा जाता था. वह अपनी दादी को बेहद चाहती थीं और प्यार से उन्हें दादू कहकर बुलाती थीं. दादी मीरा पाठक का कहना है कि शांभवी ज्यादातर वीआईपी लोगों के साथ उड़ान भरती थी और वह मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से काफी प्रभावित थी.

दादी को किया था आखिरी मैसेज

शांभवी के रिश्तेदार अजय तिवारी ने बताया कि वह बहुत मिलनसार और होनहार थी. उसके असमय निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है. वसंत विहार स्थित दादी के घर पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों की लगातार भीड़ जुट रही है. ग्वालियर की इस होनहार बेटी की मौत ने हर आंख नम कर दी है.
 

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