'मछली' के गुर्गे का चेहरा लगाकर मंत्री-विधायक के साथ वायरल किया फोटो, AI मॉर्फिंग से MP में सियासी तूफान

MP News: पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर टीम तस्वीरों की तकनीकी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्हें किसने एडिट किया और कहां से सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया?

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मंत्री कृष्णा गौर के साथ दिखाया अपराधी आशु हसन.(Photo:ITG) मंत्री कृष्णा गौर के साथ दिखाया अपराधी आशु हसन.(Photo:ITG)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 25 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 5:09 PM IST

मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद खड़ा हो गया है. अब तक चुनावी रैलियों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रहने वाले आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सहारे नेताओं की छवि बिगाड़ने तक पहुंच गया है. ताजा मामला भोपाल से सामने आया है, जहां राज्य की एक मंत्री और एक बीजेपी विधायक की तस्वीरों को कुख्यात ड्रग तस्कर के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया. इन तस्वीरों के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया. नतीजा यह हुआ कि क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. सवाल यह है कि आखिर इस षड्यंत्र के पीछे कौन लोग हैं और किस मकसद से भाजपा नेताओं की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई.

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वायरल हुई तस्वीरों में पिछड़ा वर्ग विभाग की मंत्री कृष्णा गौर और हुजूर विधानसभा के भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा को दिखाया गया है. इन तस्वीरों में दोनों नेताओं के साथ कुख्यात ड्रग तस्कर शाहरुख उर्फ आशु हसन दिखाई दे रहा है, जिसे हाल ही में एमडी ड्रग्स तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

पहली तस्वीर में मंत्री कृष्णा गौर एक कार्यक्रम में नजर आती हैं, लेकिन उनके साथ मौजूद भाजपा नेता की जगह अपराधी आशु हसन का चेहरा मॉर्फ कर जोड़ दिया गया. 

दूसरी तस्वीर विधायक रामेश्वर शर्मा की है, जिसमें असल में उन्हें बधाई देने आए खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र लिटोरिया थे. लेकिन फोटो में लिटोरिया की जगह एआई की मदद से ड्रग तस्कर की तस्वीर जोड़ दी गई.

असली तस्वीरों में किया गया बदलाव
16 जुलाई को मंत्री कृष्णा गौर एक कार्यक्रम में थीं, जहां भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष शक्ति राव मौजूद थे. वहीं से ली गई तस्वीर को छेड़छाड़ कर उसमें आशु हसन का चेहरा लगा दिया गया.

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वहीं, विधायक रामेश्वर शर्मा की फोटो उनके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले ली गई थी. जितेंद्र लिटोरिया गुलदस्ता देने पहुंचे थे और उन्होंने खुद अपनी फेसबुक पर तस्वीर पोस्ट की थी. लेकिन बाद में उसी तस्वीर में बदलाव कर ड्रग तस्कर का चेहरा डाल दिया गया. इस तरह बड़ी चालाकी से दोनों नेताओं की छवि को खराब करने की कोशिश की गई.

नेताओं की प्रतिक्रिया
फोटो वायरल होने के बाद मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि यह उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश है और इसकी शिकायत पहले ही पुलिस में दर्ज कराई जा चुकी है. उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है जिसकी पूरी जांच होनी चाहिए. 

वहीं, विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि ''यह हमारे खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र है. सांसद जी ने भी इस मामले पर चिंता जताई है और प्रशासन से अपील की है कि साइबर क्राइम विभाग जल्द जांच कर दोषियों को पकड़कर सख्त कार्रवाई करे.''

ड्रग तस्कर का कनेक्शन और साजिश
गौरतलब है कि शाहरुख उर्फ आशु हसन हाल ही में एमडी ड्रग तस्करी के मामले में पकड़ा गया था. पुलिस जांच में उसका नाम कुख्यात यावर मछली का करीबी होने के रूप में सामने आया. यही वजह रही कि षड्यंत्रकारियों ने भाजपा नेताओं की छवि खराब करने के लिए अपराधी की तस्वीरें जोड़कर फर्जी फोटो बनाए. 

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दरअसल, जब से आशु हसन की गिरफ्तारी हुई है, उसके नेटवर्क और राजनीतिक-सामाजिक रिश्तों की चर्चा जोर-शोर से हो रही है. इसी बीच एआई की मदद से नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें वायरल कर दी गईं 

केस दर्ज, जांच शुरू
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों के बाद भाजपा जिला उपाध्यक्ष राम बंसल ने आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है. 

मास्टरमाइंड कौन?
इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है. यह साफ है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल कर नेताओं को बदनाम करने की कोशिश हुई है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस षड्यंत्र के पीछे आखिर कौन है? कौन लोग हैं जो एआई का इस्तेमाल कर नेताओं को विवादों में घसीटना चाहते हैं? क्या यह सब महज़ सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा है या इसके पीछे कोई संगठित राजनीतिक साजिश है?

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