Happy New Year 20223 : पूरी दुनिया में नए साल के पहले दिन की शुरुआत लोग अपने-अपने अंदाज में करते हैं. ऐसे में हजारों की तादाद में श्रद्धालु अपने नए साल की शुरुआत देवालयों में देव आराधना से भी करते हैं.
इसी को लेकर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक एमपी के उज्जैन में मौजूद महाकालेश्वर मंदिर (Mahakal Mandir) में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. नए साल के पहले दिन रविवार को महाकाल मंदिर में बाबा की भस्मारती की गई. इस भस्मारती में शामिल होने के लिए कई राज्यों से लोग महाकाल मंदिर पहुंचे.
सुबह चार बजे खुले पट
रविवार सुबह 4 बजे बाबा महाकालेश्वर मंदिर के पट खोले गए. जिसके बाद पंडे-पुजारियों ने बाबा महाकाल का गर्म जल से अभिषेक पूजन किया. इसके बाद जिसके बाद दूध, दही, पंचामृत, द्रव्य प्रदार्थ, फलों के रस और भांग से बाबा महाकाल का अभिषेक किया गया.
फिर बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया. पुजारीयों ने विधि-विधान से भस्म आरती की. अंत में भगवान महाकाल की ढोल-नगाडों से श्रंगार आरती की गई.
उज्जैन में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद बड़ी तादाद में दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आ रहे हैं जिसके चलते हर वर्ष की तुलना में इस वर्ष श्रद्धालुओं की दोगुनी भीड़ दिखाई दी. श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए महाकाल मंदिर में विशेष दर्शन व्यवस्था भी की गई है.
900 मीटर लंबा है महाकाल लोक
साल 2022 में 11 अक्टूबर को महाकाल कॉरिडोर का लोकार्पण पीएम मोदी द्वारा किया गया था. उज्जैन में बन रहा कॉरिडोर काशी विश्वनाथ मंदिर से आकार में करीब 4 गुना बड़ा है. अभी महाकाल कॉरिडोर के पहले फेज का उद्घाटन किया है, जिसकी लागत 350 करोड़ रुपये है. दूसरे फेज की लागत 450 करोड़ रुपये होगी.
महाकाल कॉरिडोर में शिव तांडव स्त्रोत, शिव विवाह, महाकालेश्वर वाटिका, महाकालेश्वर मार्ग, शिव अवतार वाटिका, प्रवचन हॉल, रूद्रसागर तट विकास, अर्ध पथ क्षेत्र, धर्मशाला और पार्किंग सर्विसेस भी तैयार किया जा रहा है.
यह पूरा कॉरिडोर 900 मीटर लंबा है. इस कॉरिडोर में 190 मूर्तियां हैं, जो भगवान शिव के अलग-अलग रूपों को दिखाती है. यहां दो भव्य प्रवेश द्वार- नंदी द्वार और पिनाकी द्वार बने हैं. इसमें त्रिशूल के डिजाइन के 108 स्तंभ हैं. साथ ही शिव पुराण की कहानियों को दर्शाने वाले 50 भित्ति चित्र बनाए गए हैं.
राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से मंगाए गए खास बलुआ पत्थर यहां लगाए गए हैं. राजस्थान, गुजरात और ओडिशा के कलाकारों ने इस कॉरिडोर को तैयार किया है. यहां पर कालिदास के 'अभिज्ञान शकुंतलम' में उल्लेखित बागवानी प्रजातियों को भी गलियारे में लगाया गया है. इसमें रुद्राक्ष, बकुल, कदम, बेलपत्र और सप्तपर्णि जैसी धार्मिक महत्व वाली 40-45 प्रजातियां हैं.
12 ज्योतिर्लिंगों के नाम
पुराणों में बताए गए 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है. बाकी सभी ज्योतिर्लिंग पूर्वमुखी है. महाकाल के अलावा गुजरात में सोमनाथ और नागेश्वर, आंध्र प्रदेश में मल्लिकार्जुन, मध्य प्रदेश में ओमकारेश्वर, उत्तराखंड में केदारनाथ, महाराष्ट्र में भीमाशंकर, त्रयम्बकेश्वर और गृश्नेश्वर, वाराणसी में विश्वनाथ, झारखंड में बैद्यनाथ और तमिलनाडु में रामेश्वर ज्योतिर्लिंग है.
संदीप कुलश्रेष्ठ