कूल्हे का कैंसर ट्यूमर... 20 दिनों में 3 सर्जरी कर निकाला, डॉक्टरों ने बचाई तीन बच्चों की मां की जान

विदिशा की रहने वाली महिला एक दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी 'मल्टीपल न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस' से जूझ रही थी. समय के साथ उनके कूल्हे की एक गांठ ने कैंसर के विकराल ट्यूमर का रूप ले लिया था, जिससे उनका चलना, बैठना और सोना तक दूभर हो गया था.

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₹4 लाख का इलाज हुआ मुफ्त.(Photo:ITG) ₹4 लाख का इलाज हुआ मुफ्त.(Photo:ITG)

aajtak.in

  • भोपाल,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:33 PM IST

भोपाल स्मारक अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (BMHRC) के कैंसर सर्जरी विभाग में विदिशा की 35 वर्षीय महिला की अत्यंत जटिल सर्जरी की गई. महिला मल्टीपल न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नामक बीमारी से पीड़ित थी. समय के साथ कूल्हे पर बनी गांठ ने कैंसर के ट्यूमर का रूप ले लिया था और कूल्हे का एक हिस्सा सामान्य आकार से कई गुना तक बढ़ गया था.

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इससे मरीज को चलने, बैठने और सोने में गंभीर परेशानी होने लगी थी. मरीज की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. निजी अस्पतालों में इस प्रकार की सर्जरी पर 3 से 4 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है, लेकिन बीएमएचआरसी में आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका इलाज निशुल्क किया गया.

BMHRC के कैंसर सर्जरी विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ सोनवीर गौतम ने बताया कि महिला विदिशा जिले की रहने वाली हैं और उनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं. कूल्हे के एक हिस्से पर स्थित यह ट्यूमर बहुत बड़ा और अत्यधिक रक्तवाहिनियों से जुड़ा हुआ था. उसके ऊपर और आसपास की नसें साफ दिखाई दे रही थीं.

यदि एक ही बार में ट्यूमर हटाने की कोशिश की जाती तो ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता था, जो जानलेवा साबित होता. ऐसे मामलों में जोखिम अधिक होने के कारण कई सर्जन ऑपरेशन से परहेज करते हैं. 

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इसी वजह से हमने तीन चरणों में ऑपरेशन करने का फैसला लिया. ये तीनों सर्जरी 20 दिनों के भीतर की गईं. एसोसिएट प्रोफेसर डॉ कनिका सुहाग के नेतृत्व में एनीस्थीशियोलॉजी विभाग की टीम ने भी सर्जरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 

पहला चरण:  सबसे पहले ट्यूमर तक जाने वाली बड़ी रक्तवाहिनियों की रक्त आपूर्ति रोकी गई (डीवेस्कुलराइजेशन), ताकि खून बहने का खतरा कम हो.

दूसरा चरण: रेडियोलॉजी विभाग में विजिटिंग इन्टरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ अंकित शाह ने एम्बोलाइजेशन कर ट्यूमर के अंदर की छोटी रक्तवाहिनियों को बंद किया गया. इससे रक्त प्रवाह और कम हो गया.

तीसरा चरण: जब रक्तस्राव का जोखिम नियंत्रित हो गया, तब अंतिम सर्जरी कर पूरा ट्यूमर सुरक्षित रूप से निकाल दिया गया. वर्तमान में मरीज की स्थिति में स्पष्ट सुधार है.

अनुवांशिक बीमारी: मल्टीपल न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें नसों पर गांठें बनती हैं. यह लगभग 2,500 से 3,000 लोगों में से एक को होती है. अधिकतर मामलों में गांठें सामान्य रहती हैं, लेकिन कुछ मामलों में वे तेजी से बढ़कर कैंसर का रूप ले सकती हैं. नियमित जांच और समय पर उपचार आवश्यक है.

इनका कहना

BMHRC की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने कहा, इतने बड़े और जटिल ट्यूमर की सर्जरी के लिए विशेष अनुभव और टीम वर्क की आवश्यकता होती है. हमारी विशेषज्ञ टीम ने चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित उपचार किया. हमें खुशी है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीज को निशुल्क और सफल इलाज मिल सका. हमारा प्रयास है कि गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बीएमएचआरसी में भरोसेमंद और विशेषज्ञ उपचार मिले.

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