रायपुर साहित्य महोत्सव: साहित्य, सिनेमा और टेलीविजन धारावाहिकों पर हुई दिलचस्प चर्चा

रायपुर साहित्य महोत्सव के आखिरी दिन कई विषयों पर गोष्ठियां आयोजित हुईं.

Advertisement

aajtak.in

  • रायपुर,
  • 14 दिसंबर 2014,
  • अपडेटेड 8:47 PM IST

रायपुर साहित्य महोत्सव के तीन दिवसीय आयोजन के अंतिम दिवस पर रविवार दिनभर विभिन्न मंडपों में बड़ी संख्या में श्रोताओं ने साहित्यिक और सांस्कृतिक विषयों पर विचार गोष्ठियों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. छात्र-छात्राओं सहित साहित्य प्रेमी नागरिकों और साहित्यकारों की चहल-पहल से पुरखौती मुक्तांगन परिसर गुलजार रहा.

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी मंडप में आमिर खान के टीवी शो ‘सत्यमेव जयते’ की टीम के साथ श्रोताओं की बातचीत में कई महत्वपूर्ण और दिलचस्प तथ्य सामने आए. इस टीवी सीरियल की निर्माण प्रक्रिया से जुड़े सत्यजीत भटकल और लेंसनाट फर्नांडिज ने वक्ता के रूप में और अजय ब्रम्हात्मज ने सूत्रधार के रूप में श्रोताओं के साथ अपने अनुभवों और विचारों को शेयर किया.

Advertisement

भटकल ने कहा कि इस धारावाहिक के माध्यम से देश और समाज की समस्याओं तथा ज्वलंत सवालों पर जनजागरण का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी टीम लोक संस्कृति से जुड़े विषयों पर भी धारावाहिक निर्माण का प्रयास करेगी. भटकल ने कहा कि हमारे देश में इन सवालों और समस्याओं पर कई कहानियां हैं. उन्होंने कहा कि रायपुर साहित्य महोत्सव के इस मंडप में श्रोताओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति से यह साबित होता है कि साहित्य से आज भी लोगों मोह कम नहीं हुआ है. अगर कम होता तो शहर से दूर इतनी बड़ी संख्या में लोग नहीं आते, लेकिन लोग काफी उत्साह के साथ यहां आए हैं.

अजय ब्रम्हात्मज ने कहा कि यह धारावाहिक अभी बंद नहीं हुआ है, केवल हमारी टीम ने थोड़ा सा ब्रेक लिया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों को साल 2016 में एक बार फिर यह धारावाहिक देखने को मिलेगा.

Advertisement

इसी कड़ी में मुकुटधर पाण्डेय मंडप में पहला सत्र ‘बचपन: टीवी सिनेमा और किताबें’ विषय पर आयोजित किया गया. इसमें वक्ता के रूप में शम्भूलाल शर्मा ‘वसंत’, नीरज मनजीत, और क्षमा शर्मा ने विषय वस्तु पर विचार व्यक्त किए. वक्ताओं ने बाल साहित्य के रचनाकारों की कम होती संख्या पर चिंता प्रकट की. क्षमा शर्मा ने कहा कि किताबों की तरह टेलीविजन भी शिक्षा का एक अच्छा माध्यम हो सकता है. नीरज मनजीत ने कहा कि आज के बच्चों को ऐसी शिक्षा देने की जरूरत है, जो उनमें मानवीय मूल्यों के साथ संवेदनशीलता भी विकसित कर सके.

मुकुटधर पाण्डेय मंडप में ‘आज का सिनेमा और गीत रचना’ विषय पर विचार-गोष्ठी हुई. इसमें मनोज मुंतशिर, नवाब आरजू और सूत्रधार के रूप में वरुण ग्रोवर ने अपने विचार प्रकट किए. आरजू ने कहा कि हिन्दी फिल्मों में आज गीतकारों के सामने पहले से ज्यादा चुनौती है. फिल्मी गीतों से साहित्य गायब हो रहा है, यह स्थिति चिन्ताजनक है. म्यूजिक कम्पनियों की मांग के अनुसार पहले गीतों के धुन तैयार किए जाते हैं, और बाद में गीत-रचना होती है, जिसमें वाद्य यंत्रों का इतना ज्यादा शोर होता है, कि गीतों के बोल भी समझ में नहीं आते, लेकिन ग्रोवर ने कहा कि आज सिनेमा के किरदारों को लेकर पहले से बेहतर गीतों की रचना हो रही है. मनोज मुंनशिर ने नये जमाने के हिसाब से गीत-रचना की जरूरत पर बल दिया.

Advertisement

मुक्तिबोध मंडप में आज ‘बदलते परिवेश में हिन्दी कहानी’ विषय पर परिचर्चा से सत्र की शुरूआत हुई. इसके बाद आमंत्रित कवियों का काव्य पाठ हुआ. दोपहर के सत्र में ‘साहित्य में शुचिता’ विषय पर बातचीत हुई और अपरान्ह के खुले सत्र में भी काव्य पाठ हुआ. बख्शी मंडप में ही प्रसिद्ध कहानीकारों के कथा-कथन का कार्यक्रम हुआ. बातचीत का एक सत्र ‘असहमतियों के बीच’ विषय पर भी आयोजित किया गया. इसमें कश्मीर से आए अभिनेता भवानी बशीर ने कहा कि असहमतियों के बीच साहित्य से समाज को रोशनी मिल सकती है. विजय मल्ला ने इस विचार गोष्ठी के आयोजन के लिए आयोजकों को धन्यवाद दिया. कश्मीर की क्षमा कौल ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी. इसके अलावा सरगुजा अंचल के लोक साहित्य और नये दौर में पत्रकारिता विषय पर भी परिचर्चा हुई.

हबीब तनवीर मंडप में हिन्दी सिनेमा के गीतकारों का काव्य पाठ हुआ और सृजनात्मक लेखन पर कार्यशाला भी हुई. सरगुजा के लोकसाहित्य पर सतीश उपाध्याय सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपनी बात रखी. मुकुटधर पाण्डेय मंडप में सोशल मीडिया पर केन्द्रित परिचर्चा ‘आभासी संसार में शब्द सर्जना’ विषय पर जगदीश्वर चतुर्वेदी और वरुण ग्रोवर ने भी अपने विचार प्रकट किए.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement