तारक मेहता फेम शैलेश लोढ़ा बोले- मैं डरपोक पति, मेरी पत्नी मेरी गुरु

तारक मेहता का उल्टा चश्मा के मुख्य किरदार तारक मेहता यानी शैलेश लोढ़ा ने साहित्य आजतक के मंच पर कहा कि मैंने कभी पत्नी पर तंज भरी कविताएं नहीं लिखीं. मैं बेहद डरपोक पति हूं. और ये होने में कोई बुराई नहीं है. मेरी पत्नी मेरी गुरु हैं.

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साहित्य आजतक के मंच से कविताएं सुनाते कवि-अभिनेता शैलेष लोढ़ा. साहित्य आजतक के मंच से कविताएं सुनाते कवि-अभिनेता शैलेष लोढ़ा.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 7:41 AM IST

  • बेटी, पत्नी, मां और भ्रष्टाचार पर सुनाई उम्दा कविताएं
  • सोशल मीडिया-मोबाइल का कम उपयोग करने को कहा
तारक मेहता का उल्टा चश्मा के मुख्य किरदार तारक मेहता यानी शैलेश लोढ़ा ने साहित्य आजतक के मंच पर कहा कि मैंने कभी पत्नी पर तंज भरी कविताएं नहीं लिखीं. मैं बेहद डरपोक पति हूं और ये होने में कोई बुराई नहीं है. मेरी पत्नी मेरी गुरु हैं. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है. पत्नी पर बात नहीं है. जो दिखता है लोग उसपर लिखते हैं. मैं आसपास पर ही लिखता हूं. पत्नी पर कभी कोई व्यंग्य नहीं किया.

बेटियों पर... बेटी ने पूछा कितनी फीस लेते हो एक दिन की

ये मेरा फेवरेट सब्जेक्ट नहीं है. सबका होना चाहिए. सृष्टि की बेटियां कितनी हसीन हैं. मैंने बेटी की कविता लिखी. बेटी ने पूछा कि आप उदयपुर में हैं क्या आप जोधपुर आ सकते हैं. मैंने मना कर दिया. कहा बेटी व्यस्त हूं. थोड़ी देर बाद बेटी का फिर फोन आया पूछा कि आपकी एक दिन की फीस कितनी है. मैंने पूछा कि बेटा क्यों पूछ रही हो. तो उसने कहा कि अगले हफ्ते स्कूल के एनुअल फंक्शन में मेरी परफॉर्मेंस है. आपको चीफ गेस्ट बनाने के लिए स्कूल के प्रिंसिपल से बात कर लूं.

जब सोशल मीडिया नहीं था, तब जिंदगी थी

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सहजता थी, सरलता थी, जिंदगी थी...तब ये सोशल मीडिया नहीं था. मुझे नहीं पता कि आपको दिन भर के अंत में सोशल मीडिया से क्या मिलेगा. हम चेहरे देखकर कमेंट्स बदल देते हैं. तो जिस जगह पर आप लोगों से बात करते ही नहीं है. तो वहां रहने का क्या फायदा. आजकल इंसानों के बच्चे मशीनों के पास जा रहे हैं. बच्चे मशीनों से दूर रहेंगे तो संस्कृति बची रहेगी. जिंदगी में किताबों की जगह कोई नहीं ले सकता. मोबाइल तो कभी नहीं और सोशल मीडिया जिंदगी में कभी भी नहीं. ताली नहीं बजने पर बोले पता है भूख लगी होगी. लंच टाइम है. मोबाइल को जेब में रख लीजिए, इसने संवेदनाओं को मार दिया है. जो आप देख रहे हैं उसका आनंद अलग है.

किताब 'दिलजले का फेसबुक स्टेटस'

सबका किसी न किसी स्तर पर दिल टूटा ही है. दिल टूटता है तो दिल शायर हो जाता है. इस किताब में वही लिखा है जो एक दिल टूटने वाले का सोशल मीडिया प्रोफाइल है. इस किताब में आज के दौर के टूटे दिल की सोशल मीडिया कहानी है.

मैं अपना भ्रष्टाचार खत्म करूं, आप अपना करो

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भ्रष्टाचार तब खत्म होगा, जब एक बटा 125 करोड़ भारतीय अपना-अपना भ्रष्टाचार खत्म करेंगे. तभी जाकर पूरे देश का भ्रष्टाचार खत्म होगा. आप अपना खत्म करो, मैं अपना खत्म करूंगा. जबतक हम नहीं बदलेंगे तब तक कुछ नहीं बदलेगा.

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