साहित्य आजतक: कवि सम्मेलन में पहुंचे युवा कवियों ने अपनी कविताओं से बांधा समां

'साहित्य आजतक' आज आखिरी दिन है. हल्लाबोल मंच के सत्र 'कवि सम्मेलन में' चार युवा कवियों ने शिरकत की. इस दौरान चारों कवियों ने अपनी कविता से समां बांध दिया.

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पुनीत शर्मा और रमणीक सिंह पुनीत शर्मा और रमणीक सिंह

देवांग दुबे गौतम

  • नई दिल्ली,
  • 18 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 2:19 PM IST

'साहित्य आजतक' के हल्लाबोल मंच के सत्र 'कवि सम्मेलन में' चार युवा कवियों ने शिरकत की. इस दौरान चारों कवियों ने अपनी कविता से समां बांध दिया. इनकी कविताओं पर दर्शकों ने जमकर लुत्फ उठाया. हुसैन हैदरी, रमणीक सिंह, पुनीत शर्मा और पंकज शर्मा ने अपनी शानदार कविताओं से दर्शकों को तारीफ करने पर मजबूर कर दिया.

हुसैन हैदरी ने छिपकली नाम से एक कविता सुनाई. हुसैन द्धारा सुनाई गई कविता कुछ इस तरह है..

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सरकार किस तरह हिंसा करती है अंहिसा के पर्दों में छिपकर...

खाकी रंग दीवारों पर लटकती गांधी जी की बड़ी सी फोटो के पीछे से दोपहरी में एक लंबी बुरी सी छिपकली निकलती है...

रेंगकर खामोशी से इर्द-गिर्द फोटो के गश्त यह लगाती है...

और जैसे ही कोई खीट-पतंगा निकलता है उसे दबोच लेती है...

पंख नोच देती है, मांस खा जाती है, जिंदा निगल जाती है...

फिर बड़े सलीखे से जैसे कुछ हुआ नहीं हो, कोई भी मरा ना हो, रेंगती हुई वापस गांधी जी के फोटो के पीछे लौट जाती है....

इस दौरान युवाओं में अपनी कविताओं से अलग पहचान बना चुके पकंज शर्मा ने मोहब्बत पर एक कविता सुनाई.

तेरी गलियों में बनकर फकीर मैं आया हूं...

हंसता रहता हूं और प्रेम पीर लाया हूं...

तेरे जज्बात सुलग ना जाएं कहीं फिर से इसलिए आंखों में मैं भरकर नीर लाया हूं...

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तू यहीं है कहीं तो मुझे सुनती होगी, बिखरे ख्वाबों में कहीं बुनती होगी...

मैं तेरा चांद था जो टूट गया था आधा, टूटे तारों में कहीं चुनती होगी मुझे...

पंकज शर्मा के बाद मंच पर पहुंचे पुनीत शर्मा ने भी अपने कविता से लोगों का दिल जीत लिया. पुनीत शर्मा ने जो कविता सुनाई वह कुछ इस तरह है.

मैं अपने सुकून का दुश्मन हूं, मेरे पास कमाने को शोहरत है...

गंवाने को एक अकेला जीवन है, जेब में सीले हुए नोट जैसी उम्मीद है उसे भी जानबूझकर खो जाने देता हूं...

इस आग को बुझाने के लिए मुझे उजाले का दुश्मन करार दिया गया था...

अब मैं उसी रोशनी में इस देश को जलते हुए देखकर जोर-जोर से हंसना चाहता हूं...

तीन युवा कवियों के बाद मंच पर एक और युवा कवि रमणीक सिंह पहुंचे. इन्होंने जो कविता सुनाई वो कुछ इस प्रकार है.

आयोग बैठा दिया गया है निष्पक्ष जांच होगी...

राजा दोषी पाया जाएगा यह उम्मीद उतनी ही मूखर्तापूर्ण है जितना यह विश्वास कि पटरी मर सकती है ट्रेन के नीचे आकर...

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