साहित्य आजतक: 'कहानी जिंदा है लेकिन दादी-नानी विलुप्त हो गईं'

साहित्य आजतक 2018 कार्यक्रम का आज दूसरा दिन है. दूसरे दिन की शुरुआत प्रसून जोशी के साथ हुई. दूसरे दिन देश के कई जाने-माने लेखक-कवि इसमें हिस्सा लेंगे.

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साहित्य आजतक के मंच पर मालती जोशी साहित्य आजतक के मंच पर मालती जोशी

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 17 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 6:40 PM IST

किस्से-कहानियों की परंपरा कब शुरू हुई, इसे बताना मुश्किल है. लेकिन आज भी इसकी विरासत है, साहित्य आजतक के मंच पर इसी विरासत पर बात हुई. 'सीधी बात' मंच पर अंजना ओम कश्यप के साथ पद्मश्री मालती जोशी ने 'कथा विरासत' पर चर्चा की.

हिंदी और मराठी में लगभग 60 किताबें लिख चुकी मालती जोशी ने कहा कि कहानी हमेशा जिंदा रहती है लेकिन अब दादी-नानी विलुप्त हो गए हैं. आप कितना भी कहिए अब लोग फेसबुक-मोबाइल नहीं छोड़ सकते हैं, हमें उनके हिसाब से ढलना पड़ेगा.

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मालती जोशी ने कहा कि आज के सीरियल पूरी तरह से अतार्किक हैं, जो तार्किक व्यक्ति होगा वह इन चीजों में नहीं पड़ेगा. सीरियल वालों को सोचना चाहिए कि वह नई पीढ़ी को क्या सिखाने जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मेरी सारी कहानियां घर के अंदर ही निकलती हैं. मालती जोशी ने इस दौरान अपनी कहानी 'खूबसूरत झूठ' भी सुनाई. इस कहानी में उन्होंने एक परिवार के किस्से को सुनाया, जिसमें नई पीढ़ी और पुरानी पीढ़ी के मेल को दिखाया गया. इस पारिवारिक कहानी के अलावा उन्होंने NO SYMPATHY PLEASE कहानी भी सुनाई जो गंभीर विषय पर थी.

आपको बता दें कि मालती जोशी भारतीय परिवारों की चहेती लेखिका हैं. उनकी कहानियों का संसार इन्हीं परिवारों के इर्दगिर्द फैला हुआ है. गुलजार ने उसकी कहानियों पर 'किरदार' तथा जया बच्चन ने 'सात फेरे' नाम से धारावाहिक भी बनाए.

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हिंदी और मराठी में आपकी लगभग 60 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें ‘पटाक्षेप’, ‘सहचारिणी’, ‘शोभा यात्रा’, ‘राग विराग’ जैसे उपन्यास और ’पाषाण युग’, ‘मध्यांतर’, ’समर्पण का सुख’,जैसे कहानी संकलन काफी चर्चित हैं. साहित्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए मालती जोशी को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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