साहित्य, कला और कविता प्रेमियों के मंच 'साहित्य आजतक' का आगाज हो गया है. दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इसके बाद इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने अपने स्वागत भाषण में दर्शकों और कला प्रेमियों का आभार जताते हुए कहा कि उन्हीं के प्यार और साथ की वजह से 'साहित्य आजतक' साल दर साल सफलताओं की सीढ़ियां छू रहा है.
कली पुरी ने कहा कि पिछले साल प्रदूषण की वजह से कार्यक्रम में आए लोगों को काफी तकलीफ हुई थी बावजूद इसके आप लोगों ने हमारा साथ दिया. लोगों के इसी साथ को देखते हुए इस साल बारिश ने कार्यक्रम में प्रदूषण की दिक्कत को कम कर दिया है. कली ने कहा कि आप लोगों का समर्थन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है और इसके लिए हम हमेशा आपके आभारी हैं.
ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली ने कहा कि दोस्ती में लेन-देन की बात नहीं होती पर आशा है कि हमारा ये तोहफा आपको पसंद आएगा. 'साहित्य आजतक' आपके और आपके परिवार के लिए हमारी तरफ से एक छोटी से भेंट है. इसमें भारत के कोने-कोने से 140 हस्तियां 3 दिन तक कविताएं, कहानी, शेर, मुशायरा, संगीत, नाटकों को आपके लिए पेश करेंगीं.
'साहित्य आजतक' के तीसरे संस्करण में लगातार 5 मंचों से चर्चा की जाएगी. कली ने कहा कि ये जरूरी है कि इस सोशल मीडिया के जमाने में हमारी संस्कृति अनफॉलो न हो जाए. उन्होंने कहा कि इसी वजह से आप कार्यक्रम से जुड़ी यादों को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जमकर शेयर कीजिए. कली ने कहा कि खुशी की बात ये है कि अब 'साहित्य आजतक' का ये कार्यक्रम साल में एक बार नहीं होगा बल्कि हमारी साहित्य वेबसाइट पर हर वक्त आप इसका लाभ ले सकते है जो आपके लिए हर समय अपडेट रहेगी.
'आजतक' के 18 साल सफर पर बात करते हुए कली पुरी ने कहा कि आपके मनपंसद चैनल ने 16 मोबाइल चैनल्स के साथ डिजिटल जेनरेशन में धमाकेदार एंट्री की है. आज के दौर में लोगों के पास वक्त की कमी रहती है और इसी वजह से हम 'आजतक' को आपके मोबाइल में छोटे पैक के रूप में लेकर आए हैं.
कली पुरी ने कहा कि सुहाने मौसम के साथ आप सब अब तीन दिनों तक इस खास कार्यक्रम का लुत्फ उठाने को तैयार रहिए.
‘साहित्य आजतक’ का यह कार्यक्रम फ्री है, पर इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है. इसके लिए आप ‘आजतक’ और हमारी दूसरी सहयोगी वेबसाइट पर दिए गए लिंक पर जाकर या फिर 7836993366 नंबर पर मिस्ड कॉल करना भर होगा, और आपका पंजीकरण हो जाएगा. तो आइए साहित्य के इस महाकुंभ में, हम आपके स्वागत के लिए तैयार हैं.
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अनुग्रह मिश्र