स्मार्टफोन अब हमारी जिंदगी का बहुत अहम हिस्सा बन चुका है. ऑफिस के काम हों या फिर कुछ याद रखना हो डायरी
से लेकर अलॉर्म घड़ी तक का सारा काम एक फोन कर देता है. न कोई झंझट न परेशानी लेकिन क्या आपने खुद पर कभी गौर किया है.
आप बेवजह तनाव में आ जाते हैं, हर समय थकान का अनुभव होता और याद्दशत भी अब पहले जैसी नहीं रही तो इसका इल्जाम मौसम या अन्य किसी चीज को देने से पहले ध्यान दें. कहीं , इंटरनेट और अन्य तरह के सोशल मीडिया पर रहना तो आपकी बीमारी की वजह नहीं.
अच्छा नहीं होता फोन से इतना प्यार
मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगे हमारे दिमाग और शरीर को काफी अंदर तक नुकसान पहुंचाती हैं. कैंसर का खतरा तो बढ़ता ही है साथ हमारे दिमाग की नसें भी कमजोर हो जाती हैं.
भूलने की बीमारी
स्मार्टफोन और इंटरनेट को आप भी अपना करीबी दोस्त समझते होंगें? लेकिन आपके ये दोस्त आपको भुलक्कड़ बना रहे हैं. अगर आपको अपनी याददाश्त को सही रखना है तो जरूरत के हिसाब से ही इनका उपयोग कीजिए, नहीं तो इन पर ज्यादा निर्भर होने से आपकी मैमोरी कमजोर हो सकती है.
कई रिसर्च बताती हैं कि छोटी-छोटी जानकारी पाने या पर जोर डालने की बजाए इंटरनेट और स्मार्टफोन की मदद लेते हैं. डिजिटल डिवाइस पर बढ़ती निर्भरता के कारण डिजिटल एम्नेशिया बीमारी होती है. इसके चलते हम छोटी-छोटी बातें भी भूलने लगते हैं.
आपका फोन है कीटाणुओं का घर
एक शोध में यह बात सामने आई है कि आपके फोन में एक टॉयलेट की तुलना में 10 प्रतिशत से भी ज्यादा कीटाणु होते हैं. अब आप समझ सकते हैं कि इंफेक्शन से होने वाली ज्यादतर बीमारियां की वजह आपका स्मार्टफोन है.
बच्चों को लिए है नुकसानदेह
पिछले दिनों हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई हैं कि जो माएं गर्भावस्था और उसके बाद फोन का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं. उनके बच्चों में अक्सर ही चिड़चिड़ेपन और स्वभाव की दिक्कतें आती हैं.
वन्दना यादव