आज के समय में ज्यादातर लोगों को बढ़े हुए पेट की शिकायत है. अनावश्यक चर्बी जब हमारी कमर के चारों ओर जम जाती है तो बेली फैट की स्थिति हो जाती है. इस अनावश्यक फैट के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो जाती हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)
कई स्टडी में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि अनावश्यक फैट के कारण कई गंभीर बीमारियां व्यक्ति को अपनी ग्रस्त में ले लेती हैं. आइए जानते हैं पेट पर जरूरत से ज्यादा फैट आपको किन बीमारियों का शिकार बना सकता है और क्यों... (प्रतीकात्मक फोटो)
टाइप 2 डायबिटीज- जिन लोगों के पेट पर ज्यादा चर्बी होती है उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, क्योंकि शरीर में मौजूद विसेरल फैट इंसुलिन के प्रोडक्शन में बाधा डालने का काम करता है.
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जिन चीजों में शुगर का स्तर ज्यादा होता है उन्हें खाने से ब्लड स्ट्रीम
में शुगर और इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है. जिसकी मदद से शरीर में मौजूद
कोशिकाएं ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूस करती हैं. कुछ समय के बाद ये
कोशिकाएं शुगर और इंसुलिन को पर्याप्त मात्रा में इस्तेमाल करना बंद कर देती हैं ,
जिसके कारण ब्लड शुगर का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो व्यक्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
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दिल की बीमारी- कई स्टडी में सामने आ चुका है कि शरीर में मौजूद विसेरल फैट कुछ प्रकार के मोलेक्युलर प्रोटीन प्रोडूस करता है, जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. इनमें से कुछ मोलेक्युल्स ब्लड वेसेल्स को जकड़ देते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर का स्तर बढ़ जाता है और दिल की बीमारी होने का खतरा बेहद अधिक हो जाता है.
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डिप्रेशन- कई स्टडी में सामने आ चुका है कि पेट पर मौजूद चर्बी शरीर के हेल्दी न्यूरोट्रांसमीटर फंक्शन पर बुरा असर डालती है. इससे हार्मोन में भी कई तरह के बदलाव होते हैं. साथ ही इससे समय-समय पर व्यक्ति के मूड स्विंग होने लगते हैं. अगर इसपर ध्यान न दिया जाए तो व्यक्ति धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार होने लगता है.
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ब्लड प्रेशर- जब शरीर में इंसुलिन और ब्लड शुगर का स्तर नॉर्मल से अधिक हो जाता है तो ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है. अधिक ब्लड प्रेशर किसी भी व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.
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डिमेंशिया- जिन लोगों के पेट पर ज्यादा चर्बी होती है उनमें डिमेंशिया और अल्जाइमर होने की संभावना काफी ज्यादा होती है. हालांकि, इस बात की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है. लेकिन माना जाता है कि फैट सेल्स से निकलने वाला हार्मोन लेप्टिन मस्तिष्क की कोशिकाओं, चीजों को याद रखने की क्षमता, याद्दाश्त और भूख पर बुरा असर डालता है. (प्रतीकात्मक फोटो)
कैंसर- विसेरल फैट सेल्स से निकलने वाला साइटोकिन्स हार्मोन हेल्दी सेल्स में कैंसर की गतिविधियों को बढ़ाने का काम करता है. इसका खतरा उन महिलाओं में ज्यादा होता है, जिनमें मासिक धर्म समाप्त हो जाता है. दरअसल, इसका मुख्य कारण यह है कि महिलाओं की ओवरी में एस्ट्रोजन हार्मोन का प्रोडक्शन कम हो जाता है, जिससे फैट सेल्स ही एस्ट्रोजन का स्रोत बन जाते हैं.
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जिन महिलाओं का वजन ज्यादा होता है, उनमें ज्यादा फैट सेल्स होने के कारण यह हार्मोन ज्यादा बनता है. बता दें, इस हार्मोन के ज्यादा प्रोडक्शन से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना रहती है. वहीं पुरुषों में ज्यादा चर्बी होने के कारण कोलोरेक्टल कैंसर हो सकता है.
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नींद न आना- पेट और गर्दन पर ज्यादा चर्बी होने के कारण व्यक्ति खर्राटें तो लेता ही है साथ ही इससे स्लीप एप्निया का सामना भी करना पड़ सकता है. दरअसल, स्लीप एप्निया में रात में सोते समय व्यक्ति की कुछ चंद लम्हों के लिए सांस रुकने लगती हैं. इसका सीधा संबंध फेफड़ों और गले की नली पर मौजूद फैट से है, जिससे सांस लेने में मुश्किल होती है. सोते समय सांस लेने में मुश्किल होने के कारण अक्सर लोग ठीक से सो नहीं पाते हैं, जिससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है.
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सूजन- पेट पर मौजूद विसेरल फैट शरीर में सूजन पैदा करने वाले मॉलिक्यूल्स को प्रभावित करता है. इससे शरीर में ज्यादा सूजन आती है. साथ ही शरीर में हार्मोन का संतुलन भी बिगड़ जाता है. शरीर की सूजन कई गंभीर बीमारियों को न्योता देने का काम करती है. इससे मेटाबॉलिज्म पर भी बुरा असर पड़ता है.
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