दूध के पैकेट नीले, हरे और नारंगी रंग के क्यों होते हैं? खरीदने से पहले जान लें इनका मतलब

दूध के पैकेट कई रंग के आते हैं जैसे नीला, हरा या नारंगी आदि. लेकिन क्या आप जानते हैं ये रंग सिर्फ सजावट नहीं बल्कि दूध की शुद्धता और फैट की पहचान बताते हैं.

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दूध के पैकेट का रंग उसमें मौजूद फैट की मात्रा को दर्शाता है. (Photo: ITG) दूध के पैकेट का रंग उसमें मौजूद फैट की मात्रा को दर्शाता है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:22 PM IST

Milk packet colours meaning: मार्केट में मिलने वाला दूध अक्सर पैकेट में आता है जो अलग-अलग रंग के होते हैं. दूध का पैकेट खरीदते समय क्या आपने कभी गौर किया है कि किसी पैकेट का रंग नीला, किसी का हरा तो किसी का संतरा क्यों होता है? हम में से ज्यादातर लोग इसे सिर्फ ब्रांडिंग या डिजाइन समझते हैं, लेकिन इन रंगों के पीछे सेहत और शुद्धता का एक गहरा गणित छिपा है. असल में दूध के ये कलर कोड ग्राहकों को यह बताने के लिए होते हैं कि उस पैकेट के अंदर किस तरह का दूध है और उसमें फैट (मलाई) की मात्रा कितनी है. दूध की थैलियों पर मौजूद ये रंग आपको अपने लिए सही दूध खरीदने में मदद करते हैं ताकि आप अपने लिए सही दूध खरीद सकें.

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नीला, हरा और नारंगी रंग का मतलब?

भारत में दूध के पैकेटों पर रंगों का इस्तेमाल दूध की कैटेगरी को दर्शाने के लिए किया जाता है. आमतौर पर नीला पैकेट 'टोन्ड मिल्क' (Toned Milk) के लिए होता है, जिसमें फैट की मात्रा कम यानी 3 प्रतिशत फैट और कम से कम 8.5 प्रतिशत सॉलिड नॉट फैट (SNF) होता है.

वहीं, नारंगी या मेजेंटा रंग का पैकेट फुल क्रीम मिल्क की पहचान है जिसमें सबसे ज्यादा मलाई होती है और फैट की मात्रा 6 प्रतिशत और सॉलिड नॉट फैट 9 प्रतिशत होता है. हरे रंग का पैकेट अक्सर स्टैंडर्ड या होल मिल्क को दर्शाता है जिसमें फैट की मात्रा 4.5 प्रतिशत और SNF 8.5 प्रतिशत रखी जाती है. इसके अलावा कई कंपनियां पीले रंग का दूध जीरो फैट या लो फैट मिल्क के लिए इस्तेमाल करती हैं.

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यह सिस्टम इसलिए बनाया गया है ताकि ग्राहक को पैकेट के पीछे लिखे बारीक अक्षरों को पढ़ने की जरूरत न पड़े और वह सिर्फ रंग देखकर अपनी जरूरत के हिसाब से सही ऑप्शंस चुन सके.

दुनिया भर में क्या है दूध का कलर कोड?

सिर्फ भारत ही नहीं विदेशों में भी दूध के प्रकार को पहचानने के लिए खास रंगों का इस्तेमाल होता है. बीबीसी गुड फूड के अनुसार, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों में नीले रंग का ढक्कन या पैकेट फुल फैट दूध के लिए इस्तेमाल होता है जबकि हरा रंग सेमी-स्किम्ड के लिए होता है. वहीं, अमेरिका में इंटरनेशन डेयरी फूड्स एसोसिएशन (IDFA) के मुताबिक, लाल रंग अक्सर होल मिल्क (3.25 प्रतिशत फैट) के लिए और हल्का नीला या गुलाबी रंग लो-फैट दूध के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

एक्सपर्ट्स की राय और सेहत का कनेक्शन

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में लोगों दूध लेने के लिए बस एक तरीका अधिक अपनाते हैं. यदि पतला दूध चाहिए तो स्किम्ड या टोन्ड मिल्क ले लीजिए और यदि गाढ़ा दूध चाहिए तो फुल क्रीम दूध ले लीजिए. 

हेल्थलाइन कहता है, बच्चों और एथलीट्स के लिए फुल क्रीम (नारंगी पैकेट) बेहतर है क्योंकि इसमें विटामिन-D और ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा अधिक होती है. वहीं वजन घटाने वालों या हार्ट के मरीजों के लिए नीला पैकेट (स्किम्ड या टोन्ड मिल्क) सुरक्षित माना जाता है.

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