Ceiling Fan dust accumulation: गर्मियों का मौसम आते ही घर-घर में सीलिंग फैन दिनभर चलते हैं. ऐसे में इनकी सर्विसिंग के साथ-साथ इनकी सफाई का भी ख्याल रखना होता है, वरना ये स्पीड और हवा पर असर डाल सकते हैं. लेकिन आपने गौर किया होगा कि हफ्तों तक चलने वाले इन पंखों के किनारों पर काली धूल की एक मोटी परत जम जाती है. ऐसे में मन में सवाल आता है कि जो पंखा इतनी तेजी से घूम रहा है, वह धूल को दूर फेंकने के बजाय उसे चिपका कैसे लेता है? ज्यादातर लोग इसे सिर्फ गंदगी मानकर साफ कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे फिजिक्स के 2 बड़े कारण हैं. तो आइए उन कारणों को जानते हैं.
जब पंखा तेजी से हवा में घूमता है तो उसके ब्लेड्स हवा के कणों के साथ रगड़ खाते हैं. इस घर्षण (Friction) की वजह से पंखे के किनारों पर एक इलेक्ट्रिक चार्ज पैदा हो जाता है जिसे स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं.
हवा में तैरते धूल के कणों का भी अपना इलेक्ट्रिक चार्ज होता है. जैसे ही ये कण पंखे के संपर्क में आते हैं वे चुंबक की तरह ब्लेड्स के किनारों से चिपक जाते हैं. यही वजह है कि पंखे के बीच वाले हिस्से के मुकाबले उसके किनारों पर धूल ज्यादा जमी दिखाई देती है.
दूसरा मुख्य कारण है, फ्लूइड डायनमिक्स का बाउंड्री लेयर इफेक्ट. दरअसल, जब पंखा घूमता है तो उसके ब्लेड के बिल्कुल करीब वाली हवा की परत स्थिर रहती है. इसे ही बाउंड्री लेयर कहते हैं. इस पतली परत में हवा की गति न के बराबर होती है. धूल के छोटे कण इस परत में फंस जाते हैं और सेंट्रीफ्यूगल फोर्स यानी बाहर की ओर धकेलने वाला बल भी उन्हें वहां से हटा नहीं पाता. धीरे-धीरे ये कण एक-दूसरे पर जमा होते जाते हैं और मोटी परत बन जाती है.
भारत जैसे देशों में जहां उमस अधिक होती है, वहां धूल जमने की गति और बढ़ जाती है. हवा में मौजूद नमी धूल के कणों को चिपचिपा बना देती है. जब ये चिपचिपे कण चार्ज्ड ब्लेड्स से टकराते हैं तो वे इतनी मजबूती से चिपक जाते हैं कि पंखे की फुल स्पीड भी उन्हें हिला नहीं पाती. बस यही कारण हैं कि पंखे पर अक्सर धूल जमी रहती है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क