दिल्ली देर से उठ रही, मुंबई सो ही नहीं रही! भारत में नींद का संकट, जानिए किस शहर का क्या है हाल

भारत के बड़े शहरों में नींद की समस्या तेजी से बढ़ रही है. वेकफिट की नई रिपोर्ट के अनुसार, लोग देर रात तक जाग रहे हैं, कम सो रहे हैं और स्क्रीन टाइम के कारण उनकी नींद की क्वालिटी लगातार खराब हो रही है. मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक पाई गई है.

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दिल्ली में 32 प्रतिशत लोगों ने नींद न आने की समस्या है. (Photo: ITG) दिल्ली में 32 प्रतिशत लोगों ने नींद न आने की समस्या है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:08 PM IST

आजकल अगर आप दिन में 10 लोगों के साथ बातचीत करेंगे तो शायद उनमें से 8 के मुंह से आपको सुनने मिल जाएगा कि वो रात में ढंग से सोए नहीं हैं. अब सोचिए अगर इन 10 लोगों को भारत में रहने वाले करोड़ों लोगों से बदलें तो देश की आधी से ज्यादा आबादी इन दिनों ढंग से नींद न आने की बीमारी से परेशान है. इसकी वजह आजकल शहरों में रहने वाले लोगों की तेजी से बदलती लाइफस्टाइल है, जिसका सबसे बड़ा असर उनकी नींद पर दिख रहा है.

एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि लोग अब पहले के मुकाबले कम सो रहे हैं, देर रात तक जागते हैं और उनकी नींद की क्वालिटी भी लगातार खराब होती जा रही है. इसकी वजह से लोगों के शरीर में बहुत सी बीमारियां घर बना रही हैं. नींद पूरी न होने से ध्यान लगाने में परेशानी होती है, छोटे-छोटे फैसले लेना भी मुश्किल लगने लगता है. इसके साथ ही लोगों में दिल की बीमारी, मोटापा, डायबिटीज, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है. दरअसल, अच्छी और पूरी नींद हमारे शरीर के लिए उतनी ही जरूरी है जितना सही खाना और एक्सरसाइज.

सर्वे में सामने आई सच्चाई
वेकफिट (Wakefit.co) की एक नई रिपोर्ट भारतीय शहरों में नींद की समस्या तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ज्यादा स्क्रीन टाइम, इर्रेगुलर लाइफस्टाइल और काम का बढ़ता दबाव है. इस सर्वे में देश के कई बड़े शहरों को नींद से जुड़े अलग-अलग पैमानों पर रैंक किया गया है, जैसे कि सोने का समय, उठने का समय, नींद न आने की समस्या और दिनभर की थकान.

किस शहर की नींद कैसी?

चेन्नई: यहां रहने वालों की स्लीप क्वालिटी सबसे अच्छी
चेन्नई को सबसे अनुशासित नींद वाला शहर माना गया है. यहां रहने वाले लोग सही समय पर सोते और सही समय पर जागते हैं. ऐसे में ये स्लीप क्वालिटी के मामले में भारत का नंबर-1 शहर. यहां देर से सोने वालों की संख्या 48.8 प्रतिशत है, जो अन्य शहरों के मुकाबले सबसे कम है, जबकि 23.8 प्रतिशत लोग देर से उठते हैं. हालांकि इसके बावजूद 61.9 प्रतिशत लोगों ने माना कि वो सुबह उठने के बाद भी पूरी तरह फ्रेश महसूस नहीं करते, जो ये दिखाता है कि केवल समय पर सोना ही नहीं, बल्कि नींद की क्वालिटी भी जरूरी है.

हैदराबाद: सबसे बैलेंस्ड स्लीपर
हैदराबाद को सबसे ज्यादा बैलेंस्ड तरीके से नींद लेने वाले लोगों का शहर बताया गया है. यहां 42 प्रतिशत लोग देर से सोते हैं और 31 प्रतिशत लोगों को नींद न आने की शिकायत है. इन आंकड़ों से ये संकेत मिलता है कि अन्य मेट्रो शहरों की तुलना में यहां नींद का पैटर्न थोड़ा बैलेंस्ड है.

गुरुग्राम: ‘रेजिलिएंट’ स्लीपर सिटी
गुरुग्राम तीसरे स्थान पर रहा और इसे ‘रेजिलिएंट स्लीपर सिटी’ कहा गया है. यहां रहने वाले युवा काम में व्यस्त रहने और बिजी शेड्यूल के बावजूद अपनी नींद को किसी हद तक बैलेंस रखने में सफल रहे हैं.

बेंगलुरु: स्लीप पैराडॉक्स
बेंगलुरु में ‘स्लीप पैराडॉक्स’ देखने को मिला. यहां 36.3 प्रतिशत लोग आधी रात के बाद सोते हैं, जबकि 54 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वो सुबह उठने के बाद भी फ्रेश महसूस नहीं करते. इसका मतलब है कि भले ही लोग सो रहे हैं, लेकिन उनकी नींद की क्वालिटी सही नहीं है.

दिल्ली: सबसे ज्यादा देर से उठते हैं लोग
दिल्ली में 45 प्रतिशत लोग देर से उठते हैं, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसके साथ ही 32 प्रतिशत लोगों ने नींद न आने की समस्या भी बताई, जिससे ये साफ है कि यहां नींद से जुड़ी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं.

कोलकाता: लेट-नाइट सिटी
कोलकाता को इस रिपोर्ट में लेट-नाइट सिटी कहा गया है, क्योंकि यहां 75.5 प्रतिशत लोग देर रात तक जागते हैं. ये आदत धीरे-धीरे उनकी नींद और सेहत दोनों पर बुरा असर डाल रही है.

मुंबई: नींद की सबसे ज्यादा दिक्कत
मुंबई को सबसे ज्यादा नींद से जूझता हुआ शहर पाया गया है. यहां 76.5 प्रतिशत लोग देर से सोते हैं और 42.5 प्रतिशत लोग देर से उठते हैं. इसके अलावा 62.6 प्रतिशत लोग सुबह उठकर भी थके हुए महसूस करते हैं और करीब 60 प्रतिशत लोगों को ऑफिस के दौरान नींद आती है, जो गंभीर स्लीप डेप्रिवेशन यानी नींद की कमी की ओर इशारा करता है.

स्क्रीन टाइम और थकान बना रहे हालात खराब
रिपोर्ट के अनुसार, लोगों का मोबाइल फोन पर ज्यादा समय बिताना और लैपटॉप, टीवी या फिर किसी भी तरह की स्क्रीन के आगे घंटों बैठे रहना नींद खराब होने की सबसे बड़ी वजह बन गया है. करीब 87.6 प्रतिशत लोग सोने से पहले फोन का इस्तेमाल करते हैं. सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वेब सीरीज देखना और लंबे समय तक स्क्रीन पर लगे रहना नींद की क्वालिटी को खराब कर रहा है और लोगों की नींद को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.

काम के दौरान भी आ रही नींद
रात में ढंग से नींद न आने के कारण अब लोगों के काम पर भी असर पड़ रहा है. करीब 57.8 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्हें काम के दौरान नींद महसूस होती है, जो 2025 के मुकाबले 7.8 प्रतिशत ज्यादा है. खासकर बड़े शहरों में ये समस्या ज्यादा गंभीर है, जहां दिल्ली में 64.4 प्रतिशत, बेंगलुरु में 61.7 प्रतिशत और मुंबई में 59.2 प्रतिशत लोग दिन में नींद महसूस करते हैं.

सुबह उठकर भी नहीं रहते फ्रेश
करीब 48.7 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वो सुबह उठने के बाद भी फ्रेश महसूस नहीं करते हैं. ये समस्या मुंबई, चेन्नई और दिल्ली जैसे शहरों में सबसे ज्यादा देखने को मिली, जहां 62.6 प्रतिशत, 61.9 प्रतिशत और 57.4 प्रतिशत लोग उठने के बाद भी थकान महसूस करते हैं.

रिपोर्ट में ये भी सामने आया कि लोगों की लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है. आजकल सिर्फ 12 प्रतिशत लोग ही रात 10 बजे से पहले सोते हैं, जबकि करीब 60 प्रतिशत लोग 11 बजे के बाद सोने जाते हैं. ये बदलाव धीरे-धीरे लोगों की नींद के पैटर्न को बिगाड़ रहा है.
करीब 29.1 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो देर रात सोते हैं लेकिन काम के कारण सुबह जल्दी उठ जाते हैं. ऐसे में वो रोजाना सिर्फ 5 से 6 घंटे की नींद ही मिल पाती है, जिसे ‘कंप्रेस्ड स्लीप साइकिल’ कहा जाता है.

देशभर में भी यही हाल
एक अन्य बड़े सर्वे में, जिसमें देश के 393 जिलों से करीब 89,000 लोगों ने हिस्सा लिया, ये सामने आया कि भारत में बड़ी संख्या में लोग अभी भी गहरी और पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं. इस सर्वे के अनुसार, करीब 46 प्रतिशत लोग पिछले 12 महीनों में 6 घंटे से कम सोए हैं.

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