अक्सर मूवीज और कहानियों में दिखाया जाता है कि सांप अपना बदला लेते हैं या वो इंसान का चेहरा याद रखते हैं. लोग इस बात को हमेशा से ही सच मानते है रहे हैं. यहां तक कि आपने दादी-नानी से भी इस बारे में सुना होगा कि सांप चेहरा पहचानकर अपना बदला लेने आते हैं. लेकिन क्या हकीकत में ऐसा होता है? साइंटिफिक रिसर्च और एक्सपर्ट्स का कहना है कि सांपों के पास इंसानों की तरह इमोशनल दिमाग नहीं होता लेकिन उनके पास गंध और वाइब्रेशन को समझने की गजब की ताकत होती है.
साइंस डेली में पब्लिश्ड रिपोर्ट का कहना है कि सांप की नजर इंसान या अन्य जीवों की तरह तेज नहीं होती. वो दूर की चीज को क्लियर नहीं देख सकते. हालांकि सांप हिलती हुई चीजों के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होते हैं. वह जमीन के वाइब्रेशन और थर्मल इमेजरी (गर्मी) के जरिए अपने सामने मौजूद जीव का अंदाजा लगाते हैं इसलिए यदि आप उनके पास शांत रहते हैं तो वे आपको खतरा नहीं मानते. लेकिन यह कहना कि वे इंसान का चेहरा याद रखते हैं, साइंस इस दावे को सही नहीं मानता.
एक्सपर्ट कहते हैं कि सांप की सबसे बड़ी ताकत उनकी जीभ और सूंघने की क्षमता है. वे अपनी जीभ का इस्तेमाल करके हवा में मौजूद पार्टिकल्स को इकट्ठा करते हैं और अपने जैकबसन ऑर्गन (Jacobson’s Organ) के जरिए दिमाग तक सिग्नल भेजते हैं जो उन्हें खतरे का अंदेशा देती है.
लाइव साइंस का कहना है, सांप अपने मालिक या देखभाल करने वाले को उनके चेहरे से नहीं बल्कि उनकी गंध से पहचानते हैं. यदि कोई व्यक्ति रोज उन्हें खाना देता है तो वे उस गंध के साथ सुरक्षा और भोजन को जोड़ लेते है जिसे वो एक आइडेंटिटी के रूप में रख लेते हैं.
इंसानों के मुकाबले सांपों का दिमाग काफी सरल होता है. उनमें लिम्बिक सिस्टम की कमी होती है जो प्यार या नफरत जैसे इमोशन्स को प्रोसेस करता है. हालांकि, उनकी मेमोरी सर्वाइवल (बचाव) पर टिकी होती है. सांप उन चेहरों या गंधों को याद रख सकते हैं जिनसे उन्हें खतरा महसूस हुआ हो जिसे एसोसिएटिव लर्निंग कहा जाता है. यानी वे आपको दोस्त नहीं मानते बल्कि एक खतरा न देने वाली चीज के रूप में पहचान लेते हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क